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Wednesday, June 3, 2020

PU की सेमेस्टर परीक्षाएं रद्द करवाने के लिए नरेश गौड़ मैदान में

3rd June 2020 at 1:22 PM
छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के हित में होगा परीक्षा को रद्द करना 
चंडीगढ़//लुधियाना: 3 जून 2020: (कार्तिका सिंह//एजुकेशन स्क्रीन)::
फीस वृद्धि का आंदोलन सफलता पूर्वक विजयी बनाने के बाद अब कामरेड नरेश गौड़ ने नया संघर्ष शुरू किया है जो बहुसंख्यक छात्रों की आवाज़ है। यह नया संघर्ष है परीक्षा रद्द करवाने का संघर्ष। पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) चंडीगढ़ के कुछ पाठ्यक्रमों की फीस वृद्धि के खिलाफ लड़ाई के अपने प्रयासों में सफल होने के बाद, जिसके परिणामस्वरूप पीयू के सिंडिकेट ने अपने फैसले को वापस लेने के लिए मजबूर किया है, पंजाब विश्वविद्यालय के सीनेटर श्री नरेश गौड़ ने अब एक और काम अपने हाथों में ले लिया है जो छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के हित में है "पीयू की परीक्षा रद्द" करने के लिए है। यदि इस परीक्षा को रद्द कर दिया जाता है तो कोरोना काल में डरे सहमे हुए छात्रों के सिर पर लटकती आ रही तलवार हट जाएगी। 
इसका विवरण देते हुए कामरेड नरेश गौड़ ने कहा कि, कोविद महामारी के मद्देनजर, फाइनल सहित सभी सेमेस्टर परीक्षाओं को रद्द करने की याचिका पीयू के कुलपति को दे दी गई है। उन्होंने कहा, डर के इस समय में, चिंता और असुरक्षा के शिकार छात्र परीक्षा में बैठने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं। हाल ही में छात्र नेताओं के एक समूह ने भी श्री  गौड़ से मुलाकात की और परीक्षाओं में उपस्थित होने से संबंधित अपनी चिंताओं को व्यक्त किया। गौरतलब है कि छात्रों की इस भयभीत मानसिकता की बात कोई भी नहीं कर रहा था। 
इस मुद्दे को गहराई से समझाते हुए उन्होंने कहा, छात्रों ने उन्हें अवगत कराया है कि इस महामारी की स्थिति के कारण अधिकांश छात्रों की मानसिक स्थिति स्थिर नहीं है और उन्हें परीक्षा में बैठने के लिए कहना उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा देगा। यहां तक कि छात्रों के अभिभावक भी परीक्षा केंद्रों पर अपने वार्ड भेजने को तैयार नहीं हैं। स्थिति को ध्यान में रखते हुए श्री गौड़ ने वीसी से अनुरोध किया और सुझाव दिया कि छात्रों को अंतिम सेमेस्टर में प्राप्त औसत अंकों के आधार पर ग्रेड दिया जाए। और यदि कोई भी छात्र अपने पिछले प्रदर्शन को सुधारने के लिए परीक्षा में शामिल होना चाहता है, तो उसे इस स्थिति के आधार पर सितंबर, अक्टूबर या नवंबर के महीने में अवसर दिया जा सकता है। उन्होंने कहा, यह फार्मूला महाराष्ट्र सरकार ने अपनाया है, जहां मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को रद्द कर देने का निर्देश दिया है। यदि यही फार्मूला पंजाब में भी अपनाया जाये तो छात्रों की सारी चिंताएं भी दूर हो सकती हैं और उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिलेगी। 
कोरोना के खतरों की चिंता करते हुए श्री गौड़  ने कहा कि जहां परीक्षा न देने से छात्रों का मानसिक बोझ कम होगा, वही इस स्थिति में परीक्षा कर्तव्यों में भाग लेने वाले शिक्षकों को भी बचायेगा, जहां सामाजिक दूरी जैसी सावधानियों का सख्ती से पालन किया जाना है। आगे जहां तक विश्वविद्यालय का संबंध है, यह विश्वविद्यालय के वित्तीय बोझ को कम करेगा, जो पहले से ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है। इस लिए इसका फायदा यूनिवर्सिटी को भी होगा। 
इस संबंध में श्री गौड़ ने कहा, उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को आश्वासन दिया कि उनकी भावनाओं को वीसी को पुरजोर तरीके से अवगत कराया जाएगा और आने वाले भविष्य में भी छात्रों की बेहतरी से जुड़े फैसलों के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस अभियान से छात्रों ने सुख की सांस ली है। 
*नरेश गौड़ पीयू चंडीगढ़ की सीनेट के सदस्य हैं और प्रगतिशील आंदोलनों में अक्सर अग्रसर रहते हैं।