Tuesday, September 30, 2025
पेक की एनएसएस इकाई ने आयोजित किया मेगा हेल्थ कैंप
Sunday, September 28, 2025
PEC में आयोजित हुई पिकोसा की एनुअल जनरल मीटिंग
Received on Sunday 28th September 2025 at 05:37 PM Regarding PICOSA AGM
PEC समुदाय को और सशक्त बनाने का संकल्प भी लिया
Friday, June 6, 2025
PEC और पॉवरग्रिड में MoU पर हस्ताक्षर
From PEC on Friday 6th June 2025 at 7:07 PM Regarding MoU between PEC and PowerGrid
PEC में उत्कृष्टता केंद्र के लिए पावरग्रिड ने दी17 करोड़ की स्वीकृति
चंडीगढ़: 06 जून 2025: (मीडिया लिंक रविंद्र//एजुकेशन स्क्रीन डेस्क)::
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पॉवरग्रिड) ने 06 जून, 2025 को पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पॉवरग्रिड के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) पहल के तहत पेक में "पॉवरग्रिड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" की स्थापना के लिए हुआ।
यह अवसर बेहद गरिमामयी था, जिसमें पॉवरग्रिड की ओर से श्री तरुण बजाज, कार्यकारी निदेशक (उत्तरी क्षेत्र-II) और पेक की ओर से प्रो. राजेश कुमार भाटिया, निदेशक ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव श्री राजीव वर्मा (आईएएस), पॉवरग्रिड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर श्री आर. के. त्यागी, शिक्षा सचिव सुश्री प्रेरणा पुरी (आईएएस), और अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद थे। इस अवसर पर पॉवरग्रिड के वरिष्ठ अधिकारी श्री विक्रम सिंह भल (कार्यकारी निदेशक - कोऑर्डिनेटर सीएमजी), श्री जसबीर सिंह (कार्यकारी निदेशक - सीएसआर), श्री रुबिंदरजीत सिंह बरार (निदेशक, तकनीकी शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन), साथ ही पेक के डीन, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ फैकल्टी और तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
PEC इंजीनियरिंग जैसे तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्राप्त कर सकें। एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिक के रूप में पॉवरग्रिड ने इस पहल को सहर्ष स्वीकार किया और “पॉवरग्रिड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की स्थापना में सहायता देने के लिए आगे आया।
इस पर बताई गई लागत वाली रकम 17 करोड़ 19 लाख 26 हजार रुपये (₹17,19,26,000/-) है जो की एक नया इतिहास रचेगी। इस लागत से स्थापित होने वाला यह केंद्र छात्रों के लिए सीखने के नए द्वार खोलेगा। इससे रिसर्च स्कॉलर्स और फैकल्टी को पावर और एनर्जी सेक्टर में अनुसंधान को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह सुविधा विशेष रूप से पेक के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम को और अधिक व्यावहारिक व औद्योगिक प्रासंगिकता देने के लिए तैयार की गई है। इसमें न्यूमेरिकल रिले, फेज़र मेजरमेंट यूनिट्स (पीएमयू), इन्वर्टर, साइबर सुरक्षा, ई-मोबिलिटी, कंट्रोलर लैब जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना की जाएगी, जो रियल-टाइम सिमुलेशन के माध्यम से प्रशिक्षण व प्रदर्शन में मदद करेंगी।
इस अवसर पर PEC के निदेशक ने पॉवरग्रिड का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सीएसआर पहल छात्रों और शोधकर्ताओं को अत्यंत लाभान्वित करेगी।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित POWERGRID के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) श्री आर. के. त्यागी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए PEC के प्रति अपने भावनात्मक जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने 'वन ग्रिड, वन नेशन, वन फ्रिक्वेंसी' की अवधारणा पर ज़ोर दिया — देश के एक छोर से दूसरे छोर तक सभी ग्रिड्स का समन्वय के साथ संचालन। उन्होंने कहा, "CSR के तहत यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस हमारी ओर से एक छोटा-सा योगदान है।"
इसी अवसर पर मुख्य अतिथियों में शामिल विशेष शख्सियत राजीव वर्मा (IAS), मुख्य सचिव, चंडीगढ़ ने POWERGRID और PEC के इस प्रयास की सराहना की, जो लोगों को सशक्त बनाकर पूरे क्षेत्र को रूपांतरित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि यह उत्कृष्टता केंद्र उन्नत अनुसंधान और नवाचार का एक प्रकाशस्तंभ बनेगा। यह केंद्र स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और शोधार्थियों (PhD) को अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा। यह पावर और ऊर्जा क्षेत्रों को 'विकसित भारत', 'ऊर्जा सुरक्षा' और 'शून्य उत्सर्जन राष्ट्र' की दिशा में गति देगा।
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पॉवरग्रिड), विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत एक महारत्न सार्वजनिक उपक्रम है, जिसका उत्तरी क्षेत्र-II का मुख्यालय जम्मू में स्थित है। पॉवरग्रिड, अंतर-राज्यीय विद्युत ट्रांसमिशन में संलग्न है और इसके पास 1,80,239 सर्किट किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन, 283 सबस्टेशन और 5,64,961 MVA से अधिक की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता है। अत्याधुनिक तकनीक और डिजिटल समाधानों के उपयोग से पॉवरग्रिड ने >99% ट्रांसमिशन सिस्टम उपलब्धता बनाए रखी है, जो कि एक उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचायक है।
उत्तरी क्षेत्र-II में पॉवरग्रिड की ट्रांसमिशन प्रणाली पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा के कुछ हिस्सों, और केंद्र शासित प्रदेशों चंडीगढ़, लद्दाख, एवं जम्मू-कश्मीर में फैली हुई है। इस नई परियोजना से विकास की रफ्तार और तेज़ होगी।
Friday, November 8, 2024
परंपरा, नवाचार और एकता का जश्न:
Friday 8th November 2024 at 9:52 PM Communication, Information & Media Cell (CIM) Clubs
पेककफेस्ट 2024 की हर्षोल्लास के साथ हुई भव्य शुरुआत
Monday, August 12, 2024
जसपाल भट्टी साहिब की यादों को ताज़ा करने की नई पहल
Monday12th August 2024 at 4:30 PM
उनकी प्रतिमा का अनावरण होगा 14 अगस्त, 2024 को
चंडीगढ़: 12 अगस्त, 2024: (के के सिंह//एजुकेशन स्क्रीन डेस्क)::
हकीकत पर चिंता नहीं बल्कि एक चिंतन जगाना शायद उनका छिपा हुआ मकसद भी हुआ करता था। हंसी की फुहारों में वह एक चेतना जगा जाते थे। न गम की बात, न ही रोना धोना और न ही किसी दुःख की चर्चा लेकिन समाज को दुःख पहुंचाने वाले कारणों को बहुत ही सलीके से बेनकाब कर जाते थे। उनका ज़ाहि अंदाज़ तब भी अपना रंग दिखता रहा जब वह बहुत पहले एक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी अख़बार में कार्टून बनाया करते थे। लोग हर रोज़ उनके कार्टून का सन्देश देखने के लिए अख़बार की इंतज़ार किया करते थे।
उनकी यादों को ताज़ा करने की पहल की है PEC अर्थात पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के प्रबंधन ने। चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन (PECOSA) द्वारा एक विशेष समारोह पद्म भूषण से सम्मानित, सम्मानित इंजीनियर, 1978 के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग बैच के पूर्व छात्र, प्रसिद्ध भारतीय टेलीविजन के दिग्गज़ श्री जसपाल भट्टी जी की याद एवं उनके सम्मान में उनकी प्रतिमा का अनावरण 14 अगस्त, 2024 को शाम 4:00 बजे से, PEC ऑडिटोरियम के बाहर किया जा रहा है।
माननीय निदेशक, पीईसी, प्रो. (डॉ.) राजेश कुमार भाटिया इस शुभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे, उनके साथ ही प्रो. (डॉ.) राजेश कांडा (प्रमुख, पूर्व छात्र, कॉर्पोरेट और अंतर्राष्ट्रीय संबंध), इस मौके पर सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस पूरे समारोह का आयोजन इंजीनियर टीकम चंदर बाली (अध्यक्ष, पेकोसा) और इंजीनियर एच.एस. ओबेरॉय (जनरल सचिव, पेकोसा) द्वारा किया गया है।
यह शाम पूरी तरह से हमारे सम्मानित पूर्व छात्र व् इंजीनियर जसपाल भट्टी और उनके जीवन को समर्पित होगी। इस बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम में उनके मित्र, अन्य पूर्व छात्र, संकाय सदस्य और छात्रों का वर्तमान बैच भी शामिल होगा।
Sunday, February 11, 2024
PEC के 1988 बैच ने PEC को दान दिए 2 ई-वाहन
Saturday10th February 2024 at 9:08 PM
दोनों ई-वाहनों की चाबियाँ सौंपी गई माननीय निदेशक, प्रोफेसर (डॉ.) बलदेव सेतिया को
जब शिक्षा दीक्षा पूर्ण हो जाती है तब उस शिक्षा से मिला फायदा ज़िंदगी को कामयाबी दिलाता है। उस कामयाबी से दौलत भी मिलती है और शोहरत भी। उस दौलत में से बहुत से लोग दसवंद अर्थात दशम हिस्सा निकाल कर धर्म स्थलों के लिए दान स्वरूप निकालते हैं। इसी भावना से बहुत से छात्र भी अपने उन शिक्षा संस्थानों के लिए दान देते हैं जहाँ से उन्हें ज़िंदगी जीने के लिए आवश्यक ज्ञान मिलता है। PEC अर्थात पंजाब इंजिनयरिंग कालेज के छात्रों ने भी अपने इस पावन पवित्र शिक्षा के मंदिर के लिए दान निकाला जिसकी चर्चा भी काफी हुई। लोगों ने इसकी प्रशंसा भी की।
Wednesday, January 31, 2024
PEC में एक और विशेष ज्ञान सेशन का आयोजन
Wednesday 31st January 2024 at 3:26 PM
डॉ. साकेत चट्टोपाध्यायने बताए "ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड एंटरप्रेन्योरशिप" पर विशेष गुर
Sunday, December 17, 2023
PEC में त्रिदिवसीय AICTA कांफ्रेंस 18 से 20 दिसंबर 2023
17th December 2023 at 12:05 PM
आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से बदलती दुनिया और नई चुनौतियां भी
Sunday, November 26, 2023
अंगदान अभियान से हो सकती पुनर्जन्म के करिश्मे की शुरुआत
महर्षि दधीचि की क़ुरबानी को आगे बढ़ाया अब पीजीआई ने
चंडीगढ़: 26 नवंबर 2023: (कार्तिका कल्याणी सिंह //एजुकेशन स्क्रीन)::
पीजीआई ने हाल ही में एक विशेष आयोजन के ज़रिए कुछ ख़ास मानवीय जिम्मेदारियों की तरफ ध्यान दिलाया है। इस आयोजन को देख सुन कर कुछ चिंताएं भी मन में उठती हैं और कभी कभी आत्मग्लानि सी भी महसूस होती है। यही भावना खुद पर भी और समाज के एक बहुत बड़े वर्ग तक भी जो इस तरफ से अभी तक उदासीन है। हम मृत्यु के बाद देह को व्यर्थ में नष्ट कर डालते हैं जबकि वह बहुत से जीवन बचाने के काम भी आ सकती है। इसी अभियान की सफलता से एक दिन मानव को मृत्यु पर विजय दिलाने का मिशन भी सफल हो सकता है। अंगदान अब बेहद ज़रूरी हो गया है और यह सब बेहद आसान भी है।
विकास और शिक्षा के नाम पर हम जो भी कहते रहें लेकिन हकीकत यही है कि हम आज भी ज़िंदगी और जीवित लोगों की वह कदर नहीं करते जो की जानी चाहिए। बहुत से लोग सड़क हादसों जा विभिन्न बीमारियों की वजह से अस्पताल पहुंचते हैं। उनके इलाज के लिए बहुत बार बहुत से अंगों की ज़रूरत पड़ती है। देश में इस मकसद के लिए जितनी मांग है उसके हिसाब से केवल दस फीसदी की ही पूर्ति हो पाती है।
यदि अंगदान की इस दर को बढ़ाया जा सके तो बहुत से लोगों को स्वस्थ जीवन प्रदान करना काफी हद तक सहज हो सकेगा। पीजीआई में हुए एक विशेष आयोजन ने इस तरफ विशेष ध्यान आकर्षित किया है। इसमें इस दिशा में हुए विकास का विस्तृत विवरण भी मिला। इन्हें में से एक है जिसे एनआरपी तकनीक कहा जाता।
इस तकनीक के अंतर्गत मर चुके अंगों को पुर्नजीवित किया जाता है। यदि यह तकनीक और सफल होती है तो शायद किसी दिन मौत पर भी विजय पाई जा सके। इस तकनीक के चलते खून और ऑक्सीजन देकर मृत अंगों को पुनर्जीवित किया जाता है और फिर उन्हें ज़रूरतमंद मरीज़ों के शरीर में सफलता के साथ प्रत्यारोपित भी किया जा रहा है। इस सफलता की दर यदि बढ़ जाए तो मौत भी विज्ञान के वश में हो जाएगी। उसे बहुत से मामलों में रोका जा सकेगा। बहुत से लोगों का जीवन अनंत तक लम्बा हो सकेगा हालाँकि स्वास्थ्य की समस्याएं और स्वास्थ्य की संभाल फिर भी लगातार धयान का विषय बनी ही रहेगी।
उल्लेखनीय है कि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में लगातार जो नई तकनीक ईजाद हो रही है उसके जो परिणाम सामने आएँगे उनका फायदा बहुत अद्वित्तीय होगा। डाक्टर भगवान का रूप ही नहीं बल्कि सचमुच भगवान बन जाएंगे। उन तकनीक और तरीकों में से ही एक है नॉर्मोथर्मिक रीजनल परफ्यूजन यानी एनआरपी तकनीक। इसकी मदद से अब मृत अंगों को ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति से पुनर्जीवित कर मरीजों में प्रत्यारोपित किया जा रहा है।
लेकिन इसकी भी अपनी सीमाएं हैं और वक़्त की मजबूरियां भी। इस तकनीक के अंतर्गत एक ध्यान रखनाआवश्यक है कि वक़्त को तेज़ी से संभाला जाए। तय समय पर प्राप्त अंग को निश्चित समय के अंदर अंदर प्रत्यारोपित न करने पर वह बेकार हो जाता है। इस तरह सारी कोशिश भी विफल होने का अंदेशा बना रहता है। अनुमान लगाएं जब महाऋषि दधीचि ने वज्र बनाने के लिए अपनी हड्डियां दान कीं होंगी तो उस समय भी कितनी बातों का ध्यान रखा गया होगा। कहानी सुनने में बहुत रुचिकर और सहज लगती है लेकिन वास्तव में कितनी कठिन रही होगी।
गौरतलब है कि यह चमत्कारी तकनीक अभी चंद देशों में ही उपयोग की जा रही है, जिनमें से अमेरिका एक है। लेकिन जहां भी हो रही है, वहां अंग प्रत्यारोपण की दर तेजी से बढ़ रही है। यह कहना है यूनिवर्सिटी ऑफ राेचेस्टर के किडनी और पैनक्रियाज के सर्जिकल डायरेक्टर डॉ. रणदीप कश्यप का। वह पीजीआई के किडनी और अग्नाशय प्रत्यारोपण पर सेक्टर- 17 स्थित एक होटल में आयोजित स्वर्ण वर्षगांठ शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को बतौर वक्ता मौजूद थे।
डॉ. रणदीप ने बताया कि खराब होने वाले 60 प्रतिशत अंगों को इस तकनीक की मदद से पुनर्जीवित कर उसका प्रत्यारोपण किया जा रहा है। इससे प्रत्यारोपण की दर में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। डॉ. रणदीप का कहना है कि समय पर मैचिंग डोनर न मिलने से काफी ज्यादा अंग बेकार हो जाते हैं। ऐसे में इस तकनीक से उन अंगों को मैचिंग डोनर मिलने तक जीवित रखा जा सकता है। इस तकनीक के जरिए मृत अंगों में पुन: ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति शुरू की जाती है। इसकी सफलता दर भी 60 से 65 प्रतिशत है। उम्मीद भी की जनि चाहिए और प्रार्थना भी कि इस दर को बढ़ाया जा सके।
कौन कौन से महत्वपूर्ण अंग किए जा रहे हैं सुरक्षित यह जान लेना भी ज़रूरी है। एनआरपी तकनीक का उपयोग कर के किडनी, लिवर, फेफड़ा, हृदय और पैंक्रियाज जैसे अंगों को बंद होने के बाद दोबारा जीवित किया जा रहा है।
डॉ. रणदीप ने बताया कि इस तकनीक का प्रयोग कर अमेरिका में सबसे ज्यादा खराब किडनी प्रत्यारोपण हो रही है। सड़क दुर्घटना या ऐसे ही अन्य मामलों में मौत के बाद अंगों में खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति घंटों बंद होने से वे शरीर के अंदर ही बेकार हो जाते हैं। उस स्थिति में उन अंगों को बाहर निकालकर एक विशेष मशीन की मदद से तब तक सक्रिय रखा जा सकता है, जब तक जरूरी हो।
आज के युग में करिश्मे दिखाने वाली तकनीक एनआरपी नाज़ा इतिहास रच रही है। मेडिकाल क्षेत्र इस करिश्मे को लेकर बहुत उम्मीदें हैं। इसके चमत्कार की चर्चा बहुत तेज़ी से हो रही है। नॉर्मोथर्मिक रीजनल परफ्यूजन एक उभरती हुई तकनीक है, जो सर्कुलेटरी डेथ (डीसीडी) के बाद अंगों को जीवित रखने का एक विकल्प बन रहा है। इसे तुरंत एक्शन में ला कर ज़्यादा फायदा हो सकता है।
उदाहरण के लिए डेड हार्ट के मामले में एनआरपी में खून को आईवीसी से शिरापरक सर्किट से निकाला ऑक्सीजनित किया जाता है और उदर की महाधमनी में वापस कर दिया जाता है। इसके अलावा एक कोडा बैलून कैथेटर (कुक इनकॉर्पोरेटेड, ब्लूमिंगटन, आईएन) को महाधमनी स्थल के माध्यम से डाला जाता है और वक्षीय महाधमनी में फुलाया जाता है। उदर महाधमनी को वक्षीय अंगों और मस्तिष्क में रक्त को जाने से रोकने के लिए डायाफ्राम के ठीक नीचे लगाया जाता है। वक्षीय और मस्तिष्क रक्त के पुर्नचक्रण को रोक दिया जाता है। ऐसी मशीनरी प्रत्यारोपण से पहले अंगों को ऑक्सीजन युक्त और स्वस्थ रखती है।
किन अंगों को कितने समय के अंदर करना होता है प्रत्यारोपित इसका भी विशेष तौर पर ध्यान रखा जाता है। हृदय को 4 से 6 घंटे के अंदर प्रत्यारोपित करना ज़रूरी होता है इसी तरह फेफड़े को 4 से 6 घंटे के अंदर अंदर प्रत्यारोपित करना ज़रूरी होता है। किडनी के मामले में यह अवधि कुछ अलग है। किडनी को 48 से 72 घंटे के अंदर अंदर लगा दिया जाना चाहिए। इसी तरह एक अन्य महत्वपूर्ण अंग लिवर को इस मकसद के लिए 12 से 24 घंटे का समय मिलता है। पैंक्रियाज अर्थात अग्नाशय को 12 से 18 घंटे के अंदर अंदर लगा दिया जाना चाहिए और आंत को 6 से 12 घंटे लगाना उचित होता है।
गौरतलब है कि पाचन तंत्र का प्रमुख अंग और छोटी आंत का पहला भाग होता है अग्नाशय यानी पैंक्रियाज। पेट की यह बड़ी ग्रंथि छोटी आंत के ऊपरी हिस्से के बगल में होती है। पैंक्रियाज भोजन पचाने में सहायता करने वाले हार्मोन और एन्जाइम का उत्पादन करता है। यह शरीर की शर्करा की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। इसका कैंसर गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकता है। इसकी संभाल के ले विशेष सावधान रहना आवश्यजक है खास कर खान पान के मामले में।
इस दिशा में जो विकास कार्य चल रहे हैं उन्हें देखते हुए अंग दान से जो अंग दान में मिलते हैं उन्हें अंग प्रत्योपन की तकनीक को अब और भी ज़्यादा अच्छी तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। केवल भारत में ही नहीं अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी अंग दान का अभियान अभी और तेज़ किया जाए तभी बात बन सकेगी।
इस संबंध में बात करते हुए विशेषज्ञ बहुत महत्वपूर्ण बातें बताते हैं। उल्लेखनीय है कि जिन दो अंगों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है वे हैं गुर्दे और यकृत। संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय प्रत्यारोपण प्रतीक्षा सूची में लगभग 83 प्रतिशत लोग किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं और लगभग 12 प्रतिशत लोग यकृत प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जीवित दाता इनमें से किसी भी अंग को दान करने में सक्षम हैं यदि वे प्राप्तकर्ताओं से मेल खाते हों। इस तरह बहुत से लोगों को नया जीवन मिल सकेगा।
लगभग 2,600 लोग या प्रत्यारोपण सूची के लगभग तीन प्रतिशत लोग हृदय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फेफड़े, अग्न्याशय और आंतों सहित अन्य अंग प्रतीक्षा सूची के बाकी हिस्से बनाते हैं। हालाँकि सभी उम्र के लोग सूची में हैं, लेकिन आंत प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करने वालों में से अधिकांश शिशु और बच्चे हैं।
यदि हम महर्षि दधीचि को सचमुच में श्रद्धासुमन अर्पित करना चाहते हैं तो उनकी उस महान क़ुरबानी को हमेशां याद रखें। स्मरण रहे कि भारतीय इतिहास’ में कई दानी हुए हैं, किंतु मानव कल्याण के लिए अपनी अस्थियों का दान करने वाले मात्र महर्षि दधीचि ही थे। महर्षि दधीचि ने उनका अहित चाहने वाले इंद्र को ही अपनी अस्थियां दान कर दीं। वृत्रासुर नामक राक्षस ने देवलोक पर कब्जा कर लिया और इन्द्र सहित सभी देवताओं को देवलोक से बाहर निकाल दिया। महर्षि ने योग विद्या से अपना शरीर त्याग दिया। महर्षि के शरीर की त्वचा, मांस और मज्जा उनके शरीर से अलग हो गए। मानव देह के स्थान पर सिर्फ़ उनकी अस्थियां ही शेष रह गईं। इन्द्र ने उन अस्थियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया और उन्हें ले जाकर ‘तेजवान’ नामक व्रज बनाया। आइए अतीत से प्रेरणा लें। महाऋषि दधीचि से प्रेरणा लें।
क्या हम मृत्यु के बाद भी अपने शरीर और अंगों करने से हिचकिचाते रहेंगे? उठिए जागिए और इस अभिजन का सक्रिय हिस्सा बनिए
Saturday, July 16, 2022
सीजीसी लांडरा में श्री अखंड पाठ साहिब के साथ नया शुभारंभ
Saturday 16th July 2022 at 3:43 PM
22वें शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ पर लिया गुरु का आशीर्वाद
लांडरां: (मोहाली): 16 जुलाई 2022: (गुरजीत बिल्ला//एजुकेशन स्क्रीन)::
हर साल की तरह इस बार भी चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज (सीजीसी) लांडरा में 22वें शैक्षणिक सत्र की शुरुआत कैंपस में तीन दिवसीय अखंड पाठ के साथ की। सीजीसी परिवार जिसमें मैनेजमेंट, फैक्लटी और छात्र इस पवित्र समारोह में उपस्थित हुए और उन्होंने 2022 के नए सत्र के लिए परमात्मा से आशर्वाद पाने के लिए प्रार्थना की। आज श्री अखंड पाठ साहिब जी का भोग डाला गया और उसके उपरांत कीर्तन तथा गुरु के लंगर का आयोजन किया गया।
इस पवित्र समारोह के संपन्न होने के बाद, सीजीसी लांडरां के चेयरमैन सतनाम सिंह संधू तथा प्रेसिडेंट राशपाल सिंह धालीवाल, ने छात्रों और फैकल्टी को संबोधित करते हुए उनके प्रयासों और मेहनत के लिए बधाई दी और उनकी सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने सीजीसी लांडरा को अपने इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए एनबीए मान्यता प्राप्त करने तथा एनआईआरएफ रैंकिंग 2022 में शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में 139 वां अखिल भारतीय स्थान प्राप्त करने, जो पिछले साल की एनआईआरएफ रैंकिंग से आठ अंकों का सुधार है, के लिए भी शुभकामनाएं दी। उन्होंने उन्हें सीजीसी लांडरां की 21 साल की शानदार विरासत को मजबूत करने के लिए अपना योगदान बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जिसमें अगले साल देश के शीर्ष सौ शिक्षा संस्थानों की लीग में सीजीसी को शामिल करने की दिशा में काम करना सबसे शीर्ष लक्ष्य हो।
मनिपुर, आसाम, आन्ध्राप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान, उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश, छत्तिसगढ़, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश ओर अन्य 15 से अधिक भारतीय राज्यों के छात्रों ने चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज (सीजीसी) लांडरा से पढ़ाई करने के लिए नए शैक्षणिक सत्र 2022 में दाखिला लिया है। उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा संस्थान के रुप में सीजीसी लांडरा की विश्वासनीयता को मज़बूत करते हुए देशभर से आए छात्रों के नए बैच इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, बायोटैक्नोलोजी, होटल मैनेजमेंट एवं अन्य कई कोर्सेज में पढ़ाई कर रहे हैं।
Wednesday, December 1, 2021
ऑनलाइन कहानी सुनाने का अनोखा आयोजन
1st December 2021 at 05:25 PM WhatsApp
डीएवी स्कूल के किंडरगार्टनर्स ने की "टी एंड टॉक एक्टिविटी
चंडीगढ़: 1 दिसंबर 2021: (गुरजीत बिल्ला//एजुकेशन स्क्रीन)::
कहानी हमेशां से ही बच्चों की मानसिकता को अपने साथ बांधे रखती आई है। हर युग और हर दौर में बच्चों ने कहानी के असर को बहुत ही गहरे मन से स्वीकार किया है। कहानिया ही उनकी शख्सियत को बनाती आई हैं। आज के तकनीकी युग में इसे फिर से अपनाया है डीएवी पब्लिक स्कूल ने। डीएवी पब्लिक स्कूल, सेक्टर 39, चंडीगढ़ के किंडरगार्टनर्स ने बच्चों के लिए ऑनलाइन कहानी सुनाने का सत्र आयोजित किया।
किंडरगार्टन टीचर श्रीमती उषा मेहता ने बच्चों के लिए एक बहुत ही अनोखी तरह की "टी एंड टॉक एक्टिविटी " का आयोजन किया, जिसमें बच्चों ने ठंड के मौसम में चाय की चुस्की का आनंद लिया और "दा टाइगर हु केम टू टी" कहानी सुनी। सभी बच्चे अपने चाय के मग और नाश्ते के साथ तैयार थे और उनके पास अपने शिक्षक की बात सुनने का वास्तव में अच्छा समय था। ये कहानी सत्र बच्चों को व्यस्त रखने के लिए हैं। दूसरा कारण उन्हें सीखने और उनकी शब्दावली, सुनने के कौशल को बढ़ाना है।
Saturday, October 2, 2021
शहीद भगत सिंह ओपन ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2021
2nd October 2021 at 06:50 PM
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी खरड़, मोहाली में हुआ विधिवत शुभआरंभ
खरड़//मोहाली: 2nd अक्टूबर 2021: (एजुकेशन स्क्रीन ब्यूरो)::
महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह जी की पुण्य याद में शहीद भगत सिंह ओपन ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2021 का आगाज् , चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी खरड़, मोहाली में , पंजाब ताइक्वांडो एसोसिएशन (पंजीकृत) जालंधर के तत्वाधान में हुआ।
उक्त प्रतियोगिता में 10 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 500 ताइक्वांडो के नवप्रशिक्षुओ के साथ साथ उत्कृष्ट ऐविमं श्रेष्ठ खिलाड़ियों ने बड़ चढ कर भाग लिया।
भाग लेने वाले खिलाडी मुख्यता पंजाब, राजस्थान , हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, नई दिल्ली उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश , चंडीगढ़ तथा पंजाब पुलिस से संबंधित थे।
प्रतियोगिता का विधीवत शुभआरंभ विश्वविद्यालय के प्रोचांसलर प्रोफेसर डॉ आर.एस. बावा ज़ी ने किया।
जिनके साथ श्री अभय गुप्ता ज्वाइंट डायरेक्टर (इंटेलिजेंस) नॉर्थ चंडीगढ़,, टूर्नामेंट ऑर्गेनाइजिंग सचिव श्री शिव प्रकाश शुक्ला जी ,,डॉ त्रिलोक सिंह (ड़ीन ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ स्टूडेंट्स चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी),, डॉ महेश जेटली (खेल विभाग प्रमुख चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी) प्रतियोगिता के तकनीकी सचिव श्री शिवकुमार( कोच एवं प्लेयर पंजाब पुलिस ) पुण्यात्मादेव कोहली तथा ऑफिस सेक्रेटरी हरमीत सिंह विशेष तौर पर उपस्थित रहे।
आए हुए सभी खिलाड़ियों,कोच,ऑफिशल्स तथा अभीवाहको का उत्साहवर्धन करते हुए मुख्य अतिथि डॉ बावा ने कहा कि जिस प्रकार नन्हे नन्हे नवप्रशिक्षु इस खेल के साथ जुड़े हैं,वह समय दूर नहीं है जब यह सब खिलाड़ी बड़े होकर भारत का परचम संपूर्ण विश्व में लहराएंगे और अपनी प्रतिभा का लोहा विश्व पटल पर मानवायेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में ताइक्वांडो एसोसिएशन( पंजीकृत) जालंधर जो प्रयास खेल क्षेत्र में कर रहे हैं वह बहुत ही सराहनीय एवं अविस्मरणीय है उन्होंने पी.टी.ए जालंधर के माननीय प्रधान एडीजीपी श्री अर्पित शुक्ला जी (आई.पी.एस) तथा पंजाब ताइक्वांडो एसोसिएशन के महासचिव सतिन्द्र सिंह जी (आई.पी.एस) एस.एस.पी, मोहाली जी को बधाई दी जिन के सानिध्य में इस चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है।
प्रतियोगिता के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री एवं पीटीऐ जालंधर के कोषाध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय ताइक्वांडो रेफरी श्री शिव प्रकाश शुक्ला जी ने आए हुए सभी गणमान्यों, सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं विभिन्न राज्यों से आए हुए टीम मैनेजर्स के बारे में संक्षेप परिचय दिया।
पंजाब ताइक्वांडो एसोसिएशन जालंधर के प्रेस सचिव श्री निखिल हंस ने चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपती ,, प्रोफेसर कंग तथा विशेष तौर पर खेल विभाग के प्रमुख डॉक्टर महेश जेटली का पंजाब ताइक्वांडो एसोसिएशन जालंधर की तरफ से धन्यवाद किया जिनके सहयोग से विश्वविद्यालय प्रांगण में यह चैंपियनशिप करवाई जा रही है साथ ही साथ उन्होंने सभी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा की करोना वायरस के संकट पूर्ण समय के बाद करवाई जा रही यह चैंपियनशिप सभी खिलाड़ियों के लिए एक अमिट एवं अविस्मरणीय याद बनेगी।
इस मौके पर अंतर्राष्ट्रीय ताइक्वांडो कोच मास्टर केहर , सिंह मोगा से, राजकुमार वर्मा तथा सतविंदर सिंह स्टेट आवार्दी ताइक्वांडो कोच पटियाला से, एशियन गेम्स प्लेयर मोबीन खान उत्तर प्रदेश से, डॉ अश्विनी जालंधर से, अंतर्राष्ट्रीय ताइक्वांडो रेफरी सुभाष ठाकुर जी हिमाचल से, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ,काशीपुर के ताइक्वांडो के मुख्य प्रशिक्षक नीरज शर्मा जी, पारस कुमार चंडीगढ़ से,देवांश चौहान तथा पुलोक सेन राजस्थान से, रवि कदयान हरियाणा से मौजूद रहे।
Thursday, July 15, 2021
सरकारी स्कूलों में और सहूलतें मुहैया करवाने के लिए और फंड
Thursday 15th July 2021 at 10:38 PM
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| शिक्षा मंत्री विजय सिंगला |















