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Friday, January 27, 2023

LIVE : परीक्षा पे चर्चा 2023: PM Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ज़ुबानी परीक्षा के गुर और मंत्र

नई दिल्ली: 27 जनवरी 2023: (पीआईबी//दूरदर्शन//एजुकेशन स्क्रीन ब्यूरो)::

परीक्षा किसी युद्ध से कम नहीं होती। इसमें भाग लेने वाले किसी योद्धा से कम नहीं होते। इन सभी तथ्यों के बावजूद बहुत से लोग परीक्षा के नाम से घबरा जाते हैं। परीक्षा में कम अंक आने पर आत्म हत्याओं की खबरें भी आम बात हो गई हैं। वास्तव में यही परीक्षाएं ज़िंदगी की परीक्षाओं में सफल होने का आधार बताती हैं। इन परीक्षाओं में सफलता के मंत्र और गुरमन्त्र बताने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी
अब बहुत ही तेज़ी से सक्रिय हैं। सक्रिय हैं। उनकी बातें गहन मनन के बाद जुबां पर आती हैं। आप भी सुनिए उनके नए विचार विचार दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम से।

Prime Minister now addressing and interacting with students as part of the Pariksha Pe Charcha at Tal Katora Stadium, New Delhi

Friday, September 5, 2014

शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री ने छात्रों से बातचीत की

05-सितम्बर-2014 20:46 IST
शिक्षा राष्ट्र के चरित्र निर्माण की ताकत बननी चाहिए 
माओवाद से लहूलुहान भूमि की लड़की का प्रश्न जागृत कर सकता है 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 05 सितम्बर, 2014 को नई दिल्ली के मानेकशॉ ऑडिटोरियम में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों बात करते हुए।(पसूका-हिंदी इकाई)
The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the children at the "Teachers' Day" function, at Manekshaw Auditorium, in New Delhi on September 05, 2014.
• छात्रों से बातचीत में प्रधानमंत्री ने कहा, बचपन का आनंद लें, अपने बालपन को मरने ना दें 
• हमें निश्चित तौर पर समाज में शिक्षकों का फिर से सम्मान करना होगा 
• क्‍या भारत अच्छे शिक्षकों को विदेश भेजने के बारे में नहीं सोच सकता? 
• बच्चे साफ-सफाई के माध्‍यम से और बिजली व पानी की बचत कर राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर सकते हैं 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 05 सितम्बर, 2014 को नई दिल्ली के मानेकशॉ
ऑडिटोरियम में शिक्षक दिवस के अवसर पर आय़ोजित कार्यक्रम को
सम्बोधित करते हुए। साथ में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री
श्रीमती स्मृति इरानी भी हैं। (पसूका-हिंदी इकाई)

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at
the "Teachers' Day" function, at Manekshaw Auditorium,
in New Delhi on September 05, 2014. The Union Minister for
Human Resource Development, Smt. Smriti Irani is also seen.
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की ताकत बनाने का आह्वान किया। 

शिक्षक दिवस पर पूरे देश के छात्रों के साथ अनूठे संवाद में प्रधानमंत्री ने कहा कि बदली हुई दुनिया में डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर शिक्षक दिवस की प्रासंगिकता की फिर से व्‍याख्‍या करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षक के महत्व को उभारने की बहुत जरूरत है और समाज में शिक्षकों के सम्मान को फिर से स्‍थापित करना होगा, तभी शिक्षक नई पीढ़ी को सांचे में ढाल सकेंगे। 
प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वभर में अच्छे शिक्षकों की बहुत मांग है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्‍होंने पूछा कि क्या भारत अच्छे शिक्षकों को विश्व भर में भेजने का सपना नहीं देख सकता? 
प्रधानमंत्री ने लड़कियों की शिक्षा की जरूरत को रेखांकित करते हुए अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण का जिक्र किया जिसमें उन्‍होंने एक साल के भीतर सभी स्‍कूलों में लड़कियों के लिए अलग से शौचालय बनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि लड़कियों के बीच में पढ़ाई छोड़ देने यानि ड्रॉप-आउट को कम करने के लिए सभी स्‍कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय बनाना जरूरी है। 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 05 सितम्बर, 2014 को नई दिल्ली के मानेकशॉ
ऑडिटोरियम में शिक्षक दिवस के अवसर पर आय़ोजित कार्यक्रम में स्कूली छात्रा
को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए। साथ में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री
श्रीमती स्मृति इरानी भी हैं।
(पसूका-हिंदी इकाई)

The Prime Minister, Shri Narendra Modi giving the memento
to a girl child, at the "Teachers' Day" function, at Manekshaw
Auditorium, in New Delhi on September 05, 2014.
The Union Minister for Human Resource
Development, Smt. Smriti Irani is also seen.
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़, दंतेवाड़ा की एक छात्रा के उस प्रश्न पर खुशी जाहिर की जिसमें दंतेवाड़ा में लड़कियों के लिए उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों की कमी और लड़कियों की शिक्षा की पहल से जुड़े प्रयासों को लेकर प्रश्‍न किया गया था। उन्होंने कहा कि बस्‍तर जैसे उस इलाके जहां की धरती माओवाद के कारण लहूलुहान हो चुकी है वहां की एक लड़की का यह प्रश्न देश को जागृत कर सकता है। 
छात्रों से बातचीत और उनके ढेर सारे सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने अपने हाल की जापान यात्रा का हवाला दिया और बताया कि कैसे वे वहां की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि जापान में शिक्षक और छात्र मिलकर स्कूल की सफाई करते हैं-यह उनके चरित्र निर्माण का हिस्सा है। प्रधानमंत्री ने पूछा कि क्या हम इसे अपने देश के चरित्र निर्माण का हिस्सा नहीं बना सकते। प्रधानमंत्री ने जापान की शिक्षा व्यवस्था में शामिल अनुशासन, प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक रूझान पर भी जोर दिया। 
गुजरात में अपने द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम “वांचे गुजरात” (गुजरात पढ़ो) की तरह देश भर में इस तरह का कार्यक्रम शुरू किए जाने के सवाल पर प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया का हवाला दिया और कहा कि उन्हें आशा है कि सभी लोग जुड़ पाने और ज्ञान तक पहुंच पाने की अपनी जरूरत पूरी कर सकेंगे। एक अन्य प्रश्न के जवाब में प्रधानमंत्री ने कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। 

प्रधानमंत्री ने देश के प्रतिष्ठित नागरिकों को सलाह दी कि वे अपने पास के स्कूल में सप्ताह में कम से कम एक पीरियड पढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने छोटे-छोटे कामों के जरिए जैसे कि सफाई रखकर और बिजली-पानी की बचत कर राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सकते हैं। 

वि.कासोटिया/अर्चना/एसएनटी/विजय-3552

शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री का सभी शिक्षकों को ई-मेल के जरिये संदेश

04-सितम्बर-2014 20:17 IST
“विश्व गुरु” का दर्जा दोबारा हासिल करने के लिए निश्चित तौर पर फिर से शिक्षकों का उत्‍कृष्‍ट सम्मान आवश्यक 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने दी हैं ‘शिक्षक दिवस’ पर देश के शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं 
सभी शिक्षकों को ई-मेल के जरिये भेजे संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा है, ‘’शिक्षण महज एक पेशा नहीं है, बल्कि यह मार्ग दर्शन और ज्ञान प्रदान करने का अनुपम दैविक दायित्व भी है।‘’ उन्‍होंने कहा, ‘शिक्षक समुदाय का सम्‍मान कर भारत ने एक समय विश्व गुरु होने का दर्जा हासिल किया था। यही दर्जा दोबारा पाने के लिए हमें एक बार फिर शिक्षकों को वैसा ही उत्‍कृष्‍ट सम्मान देना होगा ताकि भारत समस्त विश्व में ज्ञान का प्रकाशस्तम्भ बन सके।‘
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवर्तन के चक्र ने भारत को ‘सुराज’ की ओर अग्रसर कर दिया है। उन्‍होंने कहा, ‘आपकी प्रतिबद्धता और ईमानदारी से ही देश का भविष्‍य बेहतर आकार ले पाएगा! मैं बड़ी बेसब्री से यह चाहता हूं कि वह दिन आए, जब प्रत्‍येक छात्र अपने शिक्षकों पर और प्रत्‍येक शिक्षक अपने छात्रों पर गर्व महसूस करें।’ 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’अपने विद्यार्थियों के साथ साझा किये गये आपके अनुभव विद्यार्थियों के साथ आजीवन रहेंगे। आप समाज की आधारशिला रखने के साथ-साथ उसका निर्माण भी कर रहे हैं। यह बहुत महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी है, क्‍योंकि इसी पर यह निर्भर करता है कि हमारी वर्तमान और हमारी आने वाली पीढ़ी कैसे आगे बढ़ेगी।‘’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अक्‍सर ज्ञान की तुलना सूचना एकत्र करने और व्‍यवसाय तथा नौकरी के लिए कौशल दक्षता हासिल करने से की जाती है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’बेशक, वह महत्‍वपूर्ण है लेकिन यह भी जरूरी है कि आप अपने विद्यार्थियों की सोच को व्‍यापक बनाएं। उन्‍हें उत्‍साहित करें कि वे अपने देश, समाज तथा पर्यावरण संबंधी विषयों के बारे में व्‍यापक दृष्टि से सोचें। निश्चित तौर पर हमारा लक्ष्‍य अच्‍छे नागरिक बनाना होना चाहिए, जो अतीत को संजोकर रखने तथा बेहतर भविष्‍य का निर्माण करने में सक्षम हों।‘’ 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’बाल्यावस्था से ही अच्‍छी नागरिकता की शिक्षा देने से निश्चित तौर पर बेहतर समाज के निर्माण में मदद मिलेगी। यह यातायात नियम, साफ-सफाई, महिलाओं के प्रति संवेदना, गरीबों के प्रति चिंता और बड़ों के लिए आदर सिखाने जैसी बेहद सरल बातें हैं। मुझे आशा है कि इस शिक्षक दिवस पर इस दिशा में शुरुआत के लिए मैं आप पर भरोसा कर सकता हूं। आइये, हम सब अपने आपको इस अहम जिम्मेदारी एवं कर्तव्‍य के प्रति फिर से समर्पित करें।‘’ 

वसुधा गुप्‍ता/विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/अर्चना/रंजन/गांधी/निर्मल- हिन्‍दी इकाई-3525