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Friday, September 5, 2014

शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री का सभी शिक्षकों को ई-मेल के जरिये संदेश

04-सितम्बर-2014 20:17 IST
“विश्व गुरु” का दर्जा दोबारा हासिल करने के लिए निश्चित तौर पर फिर से शिक्षकों का उत्‍कृष्‍ट सम्मान आवश्यक 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने दी हैं ‘शिक्षक दिवस’ पर देश के शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं 
सभी शिक्षकों को ई-मेल के जरिये भेजे संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा है, ‘’शिक्षण महज एक पेशा नहीं है, बल्कि यह मार्ग दर्शन और ज्ञान प्रदान करने का अनुपम दैविक दायित्व भी है।‘’ उन्‍होंने कहा, ‘शिक्षक समुदाय का सम्‍मान कर भारत ने एक समय विश्व गुरु होने का दर्जा हासिल किया था। यही दर्जा दोबारा पाने के लिए हमें एक बार फिर शिक्षकों को वैसा ही उत्‍कृष्‍ट सम्मान देना होगा ताकि भारत समस्त विश्व में ज्ञान का प्रकाशस्तम्भ बन सके।‘
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवर्तन के चक्र ने भारत को ‘सुराज’ की ओर अग्रसर कर दिया है। उन्‍होंने कहा, ‘आपकी प्रतिबद्धता और ईमानदारी से ही देश का भविष्‍य बेहतर आकार ले पाएगा! मैं बड़ी बेसब्री से यह चाहता हूं कि वह दिन आए, जब प्रत्‍येक छात्र अपने शिक्षकों पर और प्रत्‍येक शिक्षक अपने छात्रों पर गर्व महसूस करें।’ 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’अपने विद्यार्थियों के साथ साझा किये गये आपके अनुभव विद्यार्थियों के साथ आजीवन रहेंगे। आप समाज की आधारशिला रखने के साथ-साथ उसका निर्माण भी कर रहे हैं। यह बहुत महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी है, क्‍योंकि इसी पर यह निर्भर करता है कि हमारी वर्तमान और हमारी आने वाली पीढ़ी कैसे आगे बढ़ेगी।‘’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अक्‍सर ज्ञान की तुलना सूचना एकत्र करने और व्‍यवसाय तथा नौकरी के लिए कौशल दक्षता हासिल करने से की जाती है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’बेशक, वह महत्‍वपूर्ण है लेकिन यह भी जरूरी है कि आप अपने विद्यार्थियों की सोच को व्‍यापक बनाएं। उन्‍हें उत्‍साहित करें कि वे अपने देश, समाज तथा पर्यावरण संबंधी विषयों के बारे में व्‍यापक दृष्टि से सोचें। निश्चित तौर पर हमारा लक्ष्‍य अच्‍छे नागरिक बनाना होना चाहिए, जो अतीत को संजोकर रखने तथा बेहतर भविष्‍य का निर्माण करने में सक्षम हों।‘’ 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’बाल्यावस्था से ही अच्‍छी नागरिकता की शिक्षा देने से निश्चित तौर पर बेहतर समाज के निर्माण में मदद मिलेगी। यह यातायात नियम, साफ-सफाई, महिलाओं के प्रति संवेदना, गरीबों के प्रति चिंता और बड़ों के लिए आदर सिखाने जैसी बेहद सरल बातें हैं। मुझे आशा है कि इस शिक्षक दिवस पर इस दिशा में शुरुआत के लिए मैं आप पर भरोसा कर सकता हूं। आइये, हम सब अपने आपको इस अहम जिम्मेदारी एवं कर्तव्‍य के प्रति फिर से समर्पित करें।‘’ 

वसुधा गुप्‍ता/विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/अर्चना/रंजन/गांधी/निर्मल- हिन्‍दी इकाई-3525

Tuesday, November 19, 2013

सेंट बावरा स्कूल में भी मनाया गया बाल दिवस

बच्चों ने विस्तार से जाना पंडित नेहरू का जीवन   Thu, Nov 14, 2013 at 5:31 PM
लुधियाना: 14 नवंबर 2013: (शिक्षा स्क्रीन ब्यूरो): यहाँ के सेंट  बावरा स्कूल में भी बाल दिवस हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर बच्चे भी रंग बिरंगे परिधानों में सजे हुए थे और स्कूल भी सजाया गया था। रंग बीरनगर गुबारों से एक अलग सी छटा पैदा हो गयी थी। बच्चों ने अपने स्कूल में सीखी बहुत सी आइटमें प्रस्तुत कीं जिनमें गीत भी थे और लघु नाटिकाएं भी। खेलों से भी बच्चों ने खूब मनोरंजन किया। बच्चों को इस दिन के इतिहास की जानकारी भी दी गयी और इसका महत्व भी बताया गया। बच्चों को टाफियां और मिथयिां भी वितरित कीं गयीं। देश के प्रथम प्रधानमंत्री और बच्चों के चाचा नेहरू की ज़िंदगी और कामों पर एक संक्षिप्त सा प्रतियोगिता आयोजन भी हुआ। स्कूल की प्रिंसीपल चन्द्र प्रभा ने बच्चों के रौशन भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सभी बच्चे अच्छे नागरिक बन कर देश और समाज का नाम रौशन करें। 


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