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Sunday, September 4, 2022

GSTU ने फिर किया नई शिक्षा नीति का विरोध

 4 सितंबर 2022 दोपहर 02:36 बजे

जनविरोधी नई शिक्षा नीति 2020 को तत्काल रद्द करने पर दिया जोर


लुधियाना: 4 सितंबर 2022: (एमएस भाटिया//एजुकेशन स्क्रीन):: 

बज़ुर्ग अध्यापक नेता चरण सिंह सराभा फिर मैदान में हैं। नई शिक्षा नीति के खिलाफ उनका अभियान मंद नहीं पड़ा। उनका कहना है कि वह इस नई नीति को लागू नहीं होने देंगें क्य्नुकी यह सारे सिस्टम का ही सत्यानाश कर देगी। इस पर बात करते हुए उन्होंने सरकारी साज़िशों का भी भंडा फोड़ किया कि किस तरह सरकार अध्यापकों के सम्मानीय पद को खोखला करने पर तुली है। उनसे अध्यापक का सम्मान भी साज़िशी तरीके से छीना जा रहा है। 

गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स यूनियन पंजाब ने राज्य के वरिष्ठ उपाध्यक्ष परवीन कुमार लुधियाना की अध्यक्षता में स्थानीय शहीद करनैल सिंह इसरू भवन में शिक्षकों की स्थिति बहाल करने और जनविरोधी नई शिक्षा नीति 2020 में गुणात्मक शिक्षा के अवसर पैदा करने के विषय पर शिक्षक दिवस समर्पित किया। विचारों पर चर्चा की गई।

इस अवसर पर बोलते हुए संगठन के राज्य संरक्षक चरण सिंह सराभा, सलाहकार बलकार वल्टोहा, प्रेम चावला, करज सिंह कैरों, परमिंदर पाल सिंह कालिया, प्रेस सचिव तहल सिंह सराभा ने कहा कि 1990-91 से भारत में आई नवउदारवादी आर्थिक नीतियां अध्यापन व्यवसाय को प्रभावित किया है। , शिक्षक की स्थिति और शिक्षकों की सेवा शर्तों को बुरी तरह प्रभावित किया है।

इन्हीं उदार नीतियों के कारण शिक्षकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर होने लगी है और पिछले कई वर्षों से शिक्षक वर्ग के बुद्धिजीवी अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं। इन शिक्षकों को कई गुना कम वेतन दिया जा रहा है। इसके अलावा शिक्षा प्रदाता, शिक्षा स्वयंसेवक जैसे नए नाम देकर शिक्षक के सम्मान को भी ठेस पहुंची है और शिक्षक का दर्जा भी छीना गया है.

यह सब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति सरकारों की गैर-गंभीरता को भी उजागर करता है। इस समय संगठन के नेता जिंदर कुमार पायलट, मेघैदार सिंह बराड़, जगमेल सिंह पखोवाल ने पंजाब सरकार से मांग की कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में अनुबंध के आधार पर काम करने वाले सभी अयोग्य शिक्षकों को शिक्षा विभाग में बिना शर्त नियमित किया जाए. कंप्यूटर शिक्षकों का शिक्षा विभाग में विलय किया जाए।एन एस शिक्षा विभाग में क्यूएफ शिक्षकों को शामिल किया जाए।

नई शिक्षा नीति 2020 को रद्द कर 1968 की शिक्षा नीति और अन्य महत्वपूर्ण जोड़ ऐसी नीति बनाई जाए, जिससे शिक्षा का निजीकरण और व्यावसायीकरण सभी स्तरों पर समाप्त हो सके। इसके अलावा, शिक्षा नीति तैयार करते समय शिक्षकों और शिक्षक संगठनों से परामर्श किया जाना चाहिए, जैसा कि कोठारी शिक्षा आयोग और 1966 पेरिस अंतर-देश सम्मेलन की सिफारिशों में सुझाया गया है।

इसके अलावा प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में कक्षा के अनुसार पांच नियमित शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं, माध्यमिक स्तर पर विषय के अनुसार शिक्षकों के पद दिए जाएं और नियमित भर्ती के माध्यम से भरे जाएं, सभी गैर शैक्षणिक कार्य और बीएलओ की ड्यूटी ली जाए. शिक्षकों को बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए कटौती की जाए, जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के समूह के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए। प्राथमिक एवं माध्यमिक विभागों के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों की उचित पदोन्नति के आदेश अविलम्ब जारी किये जाये।

5 सितंबर को पंजाब टीचर्स यूनियन ज्वाइंट फ्रंट स्कूल स्तर पर काला बिल्ला फहराएगा और पंजाब सरकार का झंडा फहराएगा और 10 सितंबर को संगरूर में हो रही विरोध रैली में पंजाब और यूटी ज्वाइंट फ्रंट पूरी तरह से हिस्सा लेंगे।

इस समय शिक्षक नेताओं के अलावा अन्य बलजीत टॉम तरन तारन, बलवीर सिंह कांग, बिक्रमजीत सिंह थारिके, मनीष शर्मा, हरिदेव, संजीव शर्मा, जोरा सिंह बासियां, संजीव यादव, जुगल शर्मा, रविंदरजीत सिंह रवि, जसपाल सिंह फरीदकोट, चरण सिंह ताजपुरी, बलजिंदर सिंह वडाली, कुलदीप कुमार, कंवलजीत सिंह झमका, दविंदर सिंह पीएयू, अमृतपाल सिंह तरनतारन, चरणजीत सिंह धारीवाल, शिव प्रभाकर आदि नेता मौजूद थे।

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Friday, September 5, 2014

शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री का सभी शिक्षकों को ई-मेल के जरिये संदेश

04-सितम्बर-2014 20:17 IST
“विश्व गुरु” का दर्जा दोबारा हासिल करने के लिए निश्चित तौर पर फिर से शिक्षकों का उत्‍कृष्‍ट सम्मान आवश्यक 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने दी हैं ‘शिक्षक दिवस’ पर देश के शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं 
सभी शिक्षकों को ई-मेल के जरिये भेजे संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा है, ‘’शिक्षण महज एक पेशा नहीं है, बल्कि यह मार्ग दर्शन और ज्ञान प्रदान करने का अनुपम दैविक दायित्व भी है।‘’ उन्‍होंने कहा, ‘शिक्षक समुदाय का सम्‍मान कर भारत ने एक समय विश्व गुरु होने का दर्जा हासिल किया था। यही दर्जा दोबारा पाने के लिए हमें एक बार फिर शिक्षकों को वैसा ही उत्‍कृष्‍ट सम्मान देना होगा ताकि भारत समस्त विश्व में ज्ञान का प्रकाशस्तम्भ बन सके।‘
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवर्तन के चक्र ने भारत को ‘सुराज’ की ओर अग्रसर कर दिया है। उन्‍होंने कहा, ‘आपकी प्रतिबद्धता और ईमानदारी से ही देश का भविष्‍य बेहतर आकार ले पाएगा! मैं बड़ी बेसब्री से यह चाहता हूं कि वह दिन आए, जब प्रत्‍येक छात्र अपने शिक्षकों पर और प्रत्‍येक शिक्षक अपने छात्रों पर गर्व महसूस करें।’ 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’अपने विद्यार्थियों के साथ साझा किये गये आपके अनुभव विद्यार्थियों के साथ आजीवन रहेंगे। आप समाज की आधारशिला रखने के साथ-साथ उसका निर्माण भी कर रहे हैं। यह बहुत महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी है, क्‍योंकि इसी पर यह निर्भर करता है कि हमारी वर्तमान और हमारी आने वाली पीढ़ी कैसे आगे बढ़ेगी।‘’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अक्‍सर ज्ञान की तुलना सूचना एकत्र करने और व्‍यवसाय तथा नौकरी के लिए कौशल दक्षता हासिल करने से की जाती है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’बेशक, वह महत्‍वपूर्ण है लेकिन यह भी जरूरी है कि आप अपने विद्यार्थियों की सोच को व्‍यापक बनाएं। उन्‍हें उत्‍साहित करें कि वे अपने देश, समाज तथा पर्यावरण संबंधी विषयों के बारे में व्‍यापक दृष्टि से सोचें। निश्चित तौर पर हमारा लक्ष्‍य अच्‍छे नागरिक बनाना होना चाहिए, जो अतीत को संजोकर रखने तथा बेहतर भविष्‍य का निर्माण करने में सक्षम हों।‘’ 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’बाल्यावस्था से ही अच्‍छी नागरिकता की शिक्षा देने से निश्चित तौर पर बेहतर समाज के निर्माण में मदद मिलेगी। यह यातायात नियम, साफ-सफाई, महिलाओं के प्रति संवेदना, गरीबों के प्रति चिंता और बड़ों के लिए आदर सिखाने जैसी बेहद सरल बातें हैं। मुझे आशा है कि इस शिक्षक दिवस पर इस दिशा में शुरुआत के लिए मैं आप पर भरोसा कर सकता हूं। आइये, हम सब अपने आपको इस अहम जिम्मेदारी एवं कर्तव्‍य के प्रति फिर से समर्पित करें।‘’ 

वसुधा गुप्‍ता/विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/अर्चना/रंजन/गांधी/निर्मल- हिन्‍दी इकाई-3525