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Thursday, February 5, 2026

'परीक्षा पे चर्चा' किस प्रकार जन आंदोलन बन गया

प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 at 1:54 PM by PIB Delhi

भारत की शैक्षिक यात्रा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक 

नई दिल्ली05 फरवरी 2026: (पीआईबी दिल्ली/ /एजुकेशन स्क्रीन डेस्क)::

प्रधानमंत्री ने एक लेख साझा किया जिसमें बताया गया है कि 'परीक्षा पे चर्चा' किस प्रकार जन आंदोलन बन गया है, जो भारत की शैक्षिक यात्रा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है और विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करता है। उल्लेखनीय है कि निकट भविष्य में इसके अच्छे परिणाम भी सामने आएंगे। वास्तव में परीक्षा पर  चर्चा बहुत पहले होनी चाहिए थी। प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा की है। इस चर्चा से बच्चों के मन में परीक्षा का डर कम होगा और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। 

इस के महत्व और विस्तार को बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक लेख साझा किया जिसमें बताया गया है कि कैसे 'परीक्षा पे चर्चा' एक जन आंदोलन बन गया है, जो भारत की शैक्षिक यात्रा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है और विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करता है।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा एक्स पर किए गए एक पोस्ट का जवाब देते हुए, पीएमओ इंडिया के हैंडल ने कहा:

“इस लेख में केंद्रीय मंत्री श्री @dpradhanbjp ने बताया है कि कैसे परीक्षा पे चर्चा एक जन आंदोलन बन गया है, जो भारत की शैक्षिक यात्रा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है और विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करता है।

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने दोहराया कि एनईपी 2020, अपने बाल-केंद्रित दृष्टिकोण, भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करने और मातृभाषा पर जोर देने के साथ, छात्रों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।”

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MJPS/SR//

(Release ID: 2223679) 

Saturday, September 21, 2024

तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों के लिए विशेष परामर्श जारी

Posted on: 21st September 2024 at 5:28 PM by PIB Delhi शिक्षा मंत्रालय//azadi ka amrit mahotsavg20-india-2023

जारी किया शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने

दिशा-निर्देशों और नियमावली के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों को जारी किया

नई दिल्ली: 21 सितंबर 2024: (PIB Delhi//एजुकेशन स्क्रीन डेस्क)::

तस्वीर हैल्थ एंड फैमिली से साभार 

युवाओं में तंबाकू के सेवन को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केन्‍द्रीय शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिवों ने सभी राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को संयुक्त रूप से एक परामर्श जारी किया है। मुख्य सचिवों को संबोधित इस परामर्श में शिक्षण संस्थानों में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद कानून (सीओटीपीए), 2003 के प्रावधानों के अनुरूप तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान (टीओएफईआई) नियमावली का सख्ती से क्रियान्वयन का आह्वान किया गया है।

स्कूली शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिवों द्वारा हस्ताक्षरित यह संयुक्त परामर्श, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों पर तम्बाकू सेवन के खतरनाक प्रभावों पर बल देता है। यह वैश्विक युवा तम्बाकू सर्वेक्षण (जीवाईटीएस) 2019 के निष्कर्षों की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जिसमें पता चला है कि भारत में 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत स्कूली छात्र विभिन्न रूपों में तम्बाकू का सेवन करते हैं। विशेष रूप से चिंता की बात यह है कि भारत में हर दिन 5,500 से अधिक बच्चे तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैं। इसके अलावा, आजीवन तम्बाकू का सेवन करने वाले 55 प्रतिशत लोग 20 वर्ष की आयु से पहले ही इस आदत को अपना लेते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई किशोर अन्य नशीले पदार्थों का रूख कर लेते हैं। परामर्श में युवाओं को तम्बाकू की लत के खतरों से बचाने के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसका लक्ष्य तम्बाकू के उपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाकर और शैक्षणिक संस्थानों में तम्बाकू नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देकर भावी पीढ़ियों की रक्षा करना है।

राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के हिस्से के रूप में, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नाबालिगों एवं युवाओं को तंबाकू और इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उपयोग से बचाने के लिए तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान (टीओएफईआई) दिशानिर्देश जारी किए। इसके अलावा, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने सामाजिक आर्थिक और शैक्षिक विकास सोसायटी (सीड्स) के सहयोग से विश्व तंबाकू निषेध दिवस (डब्ल्यूएनटीडी) पर टीओएफईआई कार्यान्वयन नियमावली तैयार की और उसे लॉन्च किया है। विभाग ने अनुपालन के लिए सभी राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों को 31 मई 2024 को मैनुअल जारी किया।

टीओएफईआई नियमावली शैक्षणिक संस्थानों के लिए इन तंबाकू विरोधी उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में कार्य करती है। नियमावली में निम्नलिखित उद्देश्यों की रूपरेखा दी गई है:

i. शैक्षिक संस्थानों में छात्रों, शिक्षकों, श्रमिकों एवं अधिकारियों के बीच तंबाकू के उपयोग के हानिकारक प्रभावों और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में अधिक जागरूकता;

ii. तम्बाकू छोड़ने के लिए उपलब्ध विभिन्न तरीकों के बारे में जागरूकता;

iii. शैक्षणिक संस्थानों में स्वस्थ एवं तम्बाकू मुक्त वातावरण तथा सभी शैक्षणिक संस्थान तम्बाकू मुक्त हो जाएं; तथा

iv. तम्बाकू उत्पादों की बिक्री और उपयोग के संबंध में कानूनी प्रावधानों का बेहतर कार्यान्वयन, विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक स्थानों, वैधानिक चेतावनियों और नाबालिगों से संबंधित प्रावधानों का बेहतर कार्यान्वयन। 

यह परामर्श सभी स्तरों के स्कूलों, उच्च या व्यावसायिक शिक्षा के लिए कॉलेजों और सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों सहित शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों के स्वास्थ्य और कल्याण की सुरक्षा के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका के रूप में टीओएफईआई नियमावली और दिशा-निर्देशों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से, सरकार का लक्ष्य बच्चों में तम्बाकू के उपयोग को कम करना और भावी पीढ़ियों को नशे की लत में पड़ने से रोकना है। शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन उपायों को शैक्षणिक संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

टीओएफईआई मैनुअल के कार्यान्वयन नियमावली तक पहुंचने के लिए यूआरएल: https://dsel.education.gov.in/sites/default/files/update/im_tofel.pdf

टीओएफईआई दिशा-निर्देशों को देखने के लिए यूआरएल:

https://ntcp.mohfw.gov.in/assets/document/TEFI-Guidelines.pdf

*****//एमजी/एआर/केपी/एसके//(रिलीज़ आईडी: 2057383) 

Tuesday, August 13, 2024

कहीं आपको अपनी कंपनी से मिला बारकोड घोटाला तो नहीं?

मंगलवार 13 अगस्त 2024 शाम ​​7:07 बजे

 इस बारे में बता रहे हैं जेमा डे लास हेरास जो FTC के साथ उपभोक्ता शिक्षा विशेषज्ञ हैं 


13 अगस्त, 2024

आपकी यूटिलिटी कंपनी जैसी दिखने वाली कंपनी से एक ज़रूरी कॉल आने पर आप सोच सकते हैं: क्या मैं अपना बिल चुकाना भूल गया हूँ? कॉल करने वाला कहता है कि शटऑफ़ और शुल्क से बचने का एक तरीका है: वे आपको टेक्स्ट या ईमेल के ज़रिए एक बारकोड भेजेंगे ताकि आप Walgreens, CVS या Walmart जैसे स्थानीय रिटेलर पर भुगतान कर सकें। ऐसा न करें। यह सब झूठ है। आश्चर्य है कि कैसे पता करें कि यह कोई असली यूटिलिटी कंपनी नहीं है?

घोटालेबाज अप्रत्याशित रूप से कॉल करते हैं और अत्यावश्यकता का एहसास कराते हैं। लेकिन असली यूटिलिटी कंपनियाँ ऐसा नहीं करती हैं। अगर आप पर पैसे बकाया हैं, तो भी वे आपके साथ भुगतान योजना पर काम करेंगे और आपको तुरंत भुगतान करने के लिए डराने की कोशिश नहीं करेंगे - और वे आपको बारकोड नहीं भेजेंगे और न ही आग्रह करेंगे कि आप इसे भुगतान करने के लिए स्टोर पर ले जाएँ।

यहाँ बताया गया है कि ऐसे कॉल या संदेशों से कैसे निपटें जो आपकी उपयोगिता कंपनी से आते हैं:

स्वयं उपयोगिता कंपनी से संपर्क करें। अगर आपको चिंता है कि आप अपने बिलों का भुगतान करने में पीछे रह गए हैं, तो अपने बिल या उपयोगिता कंपनी की वेबसाइट पर दिए गए नंबर का उपयोग करके कंपनी को कॉल करें -कभी भी वह नंबर न चुनें जो कॉल करने वाले ने आपको दिया है, जो आपको वापस घोटालेबाज के पास ले जाएगा।

जान लें कि केवल घोटालेबाज ही आपसे एक निश्चित तरीके से भुगतान की माँग करते हैं। घोटालेबाज आपसे ऐसे तरीके से भुगतान करने के लिए कहते हैं जिससे आपके लिए अपना पैसा वापस पाना मुश्किल हो जाता है - पैसे भेजना, उपहार कार्ड पर पैसे डालना, भुगतान ऐप का उपयोग करना, स्कैन करने योग्य बारकोड या क्यूआर कोड या क्रिप्टोकरेंसी से भुगतान करना। आपकी उपयोगिता कंपनी आपसे उस तरीके से भुगतान की माँग नहीं करेगी।

अगर आपको संदेह है कि आपने किसी घोटालेबाज को भुगतान किया है, तो तुरंत कार्रवाई करें। जिस कंपनी से आपने पैसे भेजे थे, उससे संपर्क करें और उन्हें बताएँ कि यह धोखाधड़ी थी। भुगतान वापस करने के लिए उनकी मदद मांगें। हो सकता है कि आप अपना कुछ पैसा वापस पा सकें।

यूटिलिटी कंपनी के नकली लोगों की रिपोर्ट अपनी यूटिलिटी कंपनी और FTC को ReportFraud.ftc.gov पर करें।

यह पोस्ट मिलिट्री कंज्यूमर यूएसए के सौजन्य से 

Thursday, August 8, 2024

दोआबा ग्रुप ऑफ कॉलेजिज़ का ओरिएंटेशन कार्यक्रम

 Thursday 8th August 2024 at 2:55 PM

 जो लोग लगन से मेहनत करते हैं उनकी मदद तो कायनात भी करती है-मंजीत सिंह


खरड़
: 8 अगस्त  2024: (एजुकेशन स्क्रीन ब्यूरो)::

मोहाली दोआबा ग्रुप ऑफ कॉलेजिज़ में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले नए छात्रों के लिए समूह द्वारा एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नये विद्यार्थियों को दोआबा समूह के नियमों से अवगत कराना, समूह की आंतरिक संरचना से परिचित कराना तथा नये वातावरण में ढालना था। कार्यक्रम की शुरुआत परिसर में श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ करके और उसके बाद दोआबा समूह की सफलता के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज से प्रार्थना करके की गई। इसके बाद दोआबा खालसा ट्रस्ट के अध्यक्ष एचएस बाठ, मैनेजिंग वाइस चेयरमैन एसएस संघा, मैनेजमेंट के सदस्य श्री केएस बाठ, मैडम रमनजीत कौर बाठ और ग्रुप एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन सरदार मंजीत सिंह ने शमा रोशन कर की।

बाद में दोआबा खालसा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. एच एस बाठ ने नए छात्रों का स्वागत किया और नियमित पढ़ाई के साथ-साथ लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण और उत्साह की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और धरती मां को बचाने की अपील की। इसके बाद दोआबा ग्रुप विभिन्न महाविद्यालयों के निदेशकों एवं प्राचार्यों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं पाठ्यचर्या के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर ग्रुप की ओर से  पिछले सेमेस्टर में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को सम्मानित किया । यहीं नहीं ग्रुप के प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करने वाले पूर्व छात्रों ने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए फ्रेशर्स के साथ अपने अनुभव साझा किए और कहा कि कड़ी मेहनत के बिना कुछ भी संभव नहीं है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए सरदार मंजीत सिंह ने कहा कि दोआबा ग्रुप के 25 साल के सफर में दोआबा ग्रुप ने हजारों छात्रों को जॉब प्लेसमेंट मुहैया कराया है । पूरी दुनिया से लगभग हर कंपनी ने दोआबा ग्रुप ऑफ कॉलेजेज का दौरा किया है। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग कंपनियों के नाम बताते हुए आंकड़ों के साथ क्रमश: कुल संख्या भी बताई कि किस कंपनी में कितने छात्रों को दोआबा ग्रुप ने नौकरी दी है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए आगे कहा कि जो लोग कुछ भी करते हैं एक चाहत, तो पूरी कायनात उस चाहत को पूरा करने में उसकी मदद करने लगती है, बशर्ते उस चीज को हासिल करने के लिए इंसान के अंदर कड़ी मेहनत और ईमानदारी होनी चाहिए। इस तरह विद्यार्थियों के लिए आयोजित यह कार्यक्रम यादगार बन गया।

Monday, July 8, 2024

GCG की बी. कॉम छात्रा महक बांसल किया एक और कमाल

Monday 8th July 2024 at 2:52 PM

विश्वविद्यालय में आई चौथे स्थान पर-GCG में छाई ख़ुशी की लहर 


लुधियाना
: 8 जुलाई 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//एजुकेशन स्क्रीन डेस्क)::

लुधियाना में लड़कियों का राजकीय कालेज बहुत ही पुराने कालेजों में से है। इस कालेज में दाखिला मिलना सौभाग्य की बात होती है। इसी कालेज में पढ़ कर बहुत सी लड़कियों ने जहां ज़िंदगी के संघर्ष में निजी सफलताएं हासिल की हैं वहीं परिवार और देश का नाम भी बहुत बार रौशन किया है। 

इसी तरह की उपलब्धियों के सिलसिले में एक और अच्छी खबर आई है इसी कालेज से। गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स , लुधियाना के बी.कॉम. विभाग की छात्रा ने छठे सेमेस्टर के विश्वविद्यालय परिणामों में  शानदार प्रदर्शन दिया।

गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स, लुधियाना की छात्रा ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का  प्रदर्शन पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित बी.कॉम. अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाओं  में किया। महक बंसल ने विश्वविद्यालय में चौथा स्थान प्राप्त किया। प्रिंसिपल श्रीमती सुमन लता ने छात्राओं की कड़ी मेहनत और समर्पण की सराहना की। उन्होंने  विभाग अध्यक्ष श्रीमती सरिता खुराना और विभाग के अन्य शिक्षकों को उनके अथक प्रयासों और परिश्रम के लिए बधाई दी। उन्होंने छात्राओं को भविष्य में भी इसी तरह की उपलब्धियां हासिल करने का आशीर्वाद दिया।

कालेज में इस खबर को लेकर ख़ुशी की लहर छाई हुई है। 

Sunday, December 17, 2023

PEC में त्रिदिवसीय AICTA कांफ्रेंस 18 से 20 दिसंबर 2023

17th December 2023 at 12:05 PM

आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से बदलती दुनिया और नई चुनौतियां भी 


चंडीगढ़
: 17 दिसंबर, 2023: (के के सिंह//एजुकेशन स्क्रीन डेस्क)::

कोई ज़माना था जब दिमाग तेज़ करने के लिए ड्राई फ्रूट्स और टॉनिक खाए जाते थे। धीरे धीरे दिमाग और बुद्धिमता इतने तेज़ हुए कि दुनिया दंग रह गई। फिर कम्प्यूटर बनें और रोबॉट्स भी बने। अब इसी बौद्धिक क्षमता ने कृत्रिम बुद्धिमता भी बना दी है। आने वाले निकट भविष्य में इंसानी क्षमता और कृत्रिम बुद्धिमता का आपसी संबंध कैसा रहने वाला है इसे ले कर बहुत कुछ कहा सुना भी जा रहा है। इस कृत्रिम बौद्धिक शक्ति से ईमेल से लेकर कविता, कहानी और रिपोर्ट तक बहुत कुछ लिखा जा रहा है। 

कुछ बरस पहले लिखीं  छपी और पढ़ी गई कहानियां और नावल अब सच हो कर सामने आने लगे हैं। शायद अब इस कृत्रिम बुद्धिमता को आने वाले लम्बे समय तक संभाल कर भी रखा जा सके। ऐसे बहुत से सवाल अगर आपके मन भी हैं तो आपको इस कृत्रिम बुद्धि को और नज़दीक हो कर देखना चाहिए। ऐसा मौका प्रदान कर रहा है पंजाब इंजीनियर कालेज चंडीगढ़। 

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग, द्वारा 18, 19 और 20 दिसंबर, 2023 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजीज, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डेटा एनालिटिक्स (AICTA) नामित एक बहुप्रतीक्षित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है। यह सम्मेलन इंटरनेशनल सेंटर फॉर एआई एंड साइबर सिक्योरिटी रिसर्च एंड इनोवेशन, एशिया यूनिवर्सिटी, ताइवान के साथ तकनीकी सह-प्रायोजन में आयोजित किया जा रहा है।

इस कांफ्रेंस व् सम्मेलन के आयोजन के अध्यक्ष और एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. पूनम सैनी जी ने कहा, कि एआईसीटीए 2023 का उद्देश्य कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग के विभिन्न डोमेन जैसे आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, नेटवर्किंग और डेटा एनालिटिक्स के रीसेंट रुझानों (ट्रेंड्स) और नवीन दृष्टिकोणों पर विचार-विमर्श के लिए एक प्रेरक मंच प्रदान करना है। यह सम्मेलन ज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों को साझा करने और प्रसारित करने, सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और अपनाए गए समाधानों पर चर्चा को बढ़ावा देने के लिए विविध शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और छात्रों को एक साथ लाने का प्रयास करना ही इस उद्देश्य है।

इस आयोजन के सचिव डॉ. मनीष कुमार ने कहा कि पहले दिन प्री-वर्कशॉप थीम ''वीमेन इन कंप्यूटिंग'' पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य महिला शोधकर्ताओं को  अपने लेख प्रस्तुत करने के लिए एक सामूहिक मंच प्रदान करना है, यह सेशन अल्स्टर यूनिवर्सिटी, यूके से आई डॉ. प्रियंका चौरसिया की अध्यक्षता में आयोजित एक विशेष सत्र में किया जायेगा। अगले दो दिन डेटा साइंस, आईओटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नामक तीन समानांतर ट्रैकों में पेपर प्रस्तुतियों के माध्यम से नवीन विचारों को साझा करने को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। 

इसके साथ ही पूरे सम्मलेन के कीनोट स्पीकर्स  तौर पर आईआईटी-बीएचयू से प्रोफेसर एस.के. सिंह; एशिया यूनिवर्सिटी, ताइवान से प्रोफेसर बृज बी. गुप्ता; IEEE, USA के प्रेजिडेंट थॉमस कफ़लिन; सिटी यूनिवर्सिटी, होन्ग कोंग से प्रोफेसर किम-फुंग त्सांग; सालेर्नो विश्वविद्यालय, इटली से प्रोफेसर फ़्रेंसेस्को पामिएरी और मैक्वेरी विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया से प्रोफेसर माइकल शेंग इस कांफ्रेंस का हिस्सा बनेंगें। इसके साथ ही, गूगल और एयरबस के विशेषज्ञ, वर्तमान टेक्नोलॉजीज और इंडस्ट्री के रुझानों से प्रतिभागियों को रु-ब-रु करवायेंगें।  

स्टूडेंट कोऑर्डिनेटर के तौर पर सीएसई के अंतिम वर्ष के छात्र, जतिन चुघ और भरत ने बताया कि पूरे भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों द्वारा सम्मेलन मंच पर प्रस्तुत किए गए 290 पत्रों में से 65 समीक्षकों द्वारा गुणवत्ता जांच में उत्तीर्ण हुए हैं और स्प्रिंगर द्वारा उनकी प्रतिष्ठित "लेक्चर नोट्स इन नेटवर्क्स एंड सिस्टम्स (एलएनएनएस)" श्रृंखला में प्रकाशन के लिए स्वीकार किए गए हैं।

इसी के साथ सीएसई के एचओडी प्रोफेसर त्रिलोक चंद ने विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों के शोधकर्ताओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए इस तरह के प्रौद्योगिकी-संचालित कार्यक्रमों की व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश भी डाला।

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक प्रोफेसर बलदेव सेतिया जी ने विभाग को बधाई दी और उल्लेख किया कि संस्थान के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग ने हमेशा सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग उम्मीदवारों को आकर्षित किया है और तकनीकी परिवर्तनों को बढ़ावा देने और अपनाने में अग्रणी रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग ने डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दो नए स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं और दोनों कार्यक्रमों को बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। अंततः उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ज्ञान साझा करने में हमारे संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ संयुक्त अनुसंधान सहयोग में आवश्यक जोर प्रदान करने के लिए एक मंच के रूप में भी काम करेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक यक्ष प्रश्न यह भी कि क्या इस के ज़ोर पकड़ने पर व्यक्ति की वास्तविक बुद्धि की स्वतंत्रता खतरे में तो नहीं जाएगी? जिस दिन यह नियंत्रण से बाहर होती नज़र आई उस दिन के लिए क्या क्या किया जा सकता है?

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Sunday, November 26, 2023

अंगदान अभियान से हो सकती पुनर्जन्म के करिश्मे की शुरुआत

महर्षि दधीचि की क़ुरबानी को आगे बढ़ाया अब पीजीआई ने 


चंडीगढ़
: 26 नवंबर 2023: (कार्तिका कल्याणी सिंह //एजुकेशन स्क्रीन)::

पीजीआई ने हाल ही में एक विशेष आयोजन के ज़रिए कुछ ख़ास मानवीय जिम्मेदारियों की तरफ ध्यान दिलाया है। इस आयोजन को देख सुन कर कुछ चिंताएं भी मन में उठती हैं और कभी कभी आत्मग्लानि सी भी महसूस होती है।  यही भावना खुद पर भी और समाज के एक बहुत बड़े वर्ग तक भी जो इस तरफ से अभी तक उदासीन है। हम मृत्यु के बाद देह को व्यर्थ में नष्ट कर डालते हैं जबकि वह बहुत से जीवन बचाने के काम भी आ सकती है। इसी अभियान की सफलता से एक दिन मानव को मृत्यु पर विजय दिलाने का मिशन भी सफल हो सकता है। अंगदान अब बेहद ज़रूरी हो गया  है और यह सब बेहद  आसान भी है। 

विकास और शिक्षा के नाम पर हम जो भी कहते रहें लेकिन हकीकत यही है कि हम आज भी ज़िंदगी और जीवित लोगों की वह कदर नहीं करते जो की जानी चाहिए। बहुत से लोग सड़क हादसों जा विभिन्न बीमारियों की वजह से अस्पताल पहुंचते हैं। उनके इलाज के लिए बहुत बार बहुत से अंगों की ज़रूरत पड़ती है। देश में इस मकसद के लिए जितनी मांग है उसके हिसाब से केवल दस फीसदी की ही पूर्ति हो पाती है। 

यदि अंगदान की इस दर को बढ़ाया जा सके तो बहुत से लोगों को स्वस्थ जीवन प्रदान करना काफी हद तक सहज हो सकेगा। पीजीआई में हुए एक विशेष आयोजन ने इस तरफ विशेष ध्यान आकर्षित किया है। इसमें इस दिशा में हुए विकास का विस्तृत विवरण भी मिला। इन्हें में से एक है जिसे एनआरपी तकनीक कहा जाता। 

इस तकनीक के अंतर्गत मर चुके अंगों को पुर्नजीवित किया जाता है। यदि यह तकनीक और सफल होती है तो शायद किसी दिन मौत पर भी विजय पाई जा सके। इस तकनीक के चलते खून और ऑक्सीजन देकर मृत अंगों को पुनर्जीवित किया जाता है और फिर उन्हें ज़रूरतमंद मरीज़ों के शरीर में सफलता के साथ प्रत्यारोपित भी किया जा रहा है। इस सफलता की दर यदि बढ़ जाए तो मौत भी विज्ञान के वश में हो जाएगी। उसे बहुत से मामलों में रोका जा सकेगा। बहुत से लोगों का जीवन अनंत तक लम्बा हो सकेगा हालाँकि स्वास्थ्य की समस्याएं और स्वास्थ्य की संभाल फिर भी लगातार धयान का विषय बनी ही रहेगी। 

उल्लेखनीय है कि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में लगातार जो नई तकनीक ईजाद हो रही है उसके जो परिणाम सामने आएँगे उनका फायदा बहुत अद्वित्तीय होगा। डाक्टर भगवान का रूप ही नहीं बल्कि सचमुच भगवान बन जाएंगे।  उन तकनीक और तरीकों में से ही  एक है नॉर्मोथर्मिक रीजनल परफ्यूजन यानी एनआरपी तकनीक। इसकी मदद से अब मृत अंगों को ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति से पुनर्जीवित कर मरीजों में प्रत्यारोपित किया जा रहा है। 

लेकिन इसकी भी अपनी सीमाएं हैं और वक़्त की  मजबूरियां भी। इस तकनीक के अंतर्गत एक ध्यान  रखनाआवश्यक है कि वक़्त को तेज़ी से संभाला जाए। तय समय पर प्राप्त अंग को निश्चित समय के अंदर अंदर प्रत्यारोपित न करने पर वह बेकार हो जाता है। इस तरह सारी कोशिश भी विफल होने का अंदेशा बना रहता है। अनुमान लगाएं जब महाऋषि दधीचि ने वज्र बनाने के लिए अपनी हड्डियां दान कीं होंगी तो उस समय भी कितनी बातों का ध्यान  रखा गया होगा।  कहानी सुनने में बहुत रुचिकर और सहज लगती है लेकिन वास्तव में कितनी कठिन रही होगी। 

गौरतलब है कि यह चमत्कारी तकनीक अभी चंद देशों में ही उपयोग की जा रही है, जिनमें से अमेरिका एक है। लेकिन जहां भी हो रही है, वहां अंग प्रत्यारोपण की दर तेजी से बढ़ रही है। यह कहना है यूनिवर्सिटी ऑफ राेचेस्टर के किडनी और पैनक्रियाज के सर्जिकल डायरेक्टर डॉ. रणदीप कश्यप का। वह पीजीआई के किडनी और अग्नाशय प्रत्यारोपण पर सेक्टर- 17 स्थित एक होटल में आयोजित स्वर्ण वर्षगांठ शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को बतौर वक्ता मौजूद थे। 

डॉ. रणदीप ने बताया कि खराब होने वाले 60 प्रतिशत अंगों को इस तकनीक की मदद से पुनर्जीवित कर उसका प्रत्यारोपण किया जा रहा है। इससे प्रत्यारोपण की दर में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। डॉ. रणदीप का कहना है कि समय पर मैचिंग डोनर न मिलने से काफी ज्यादा अंग बेकार हो जाते हैं। ऐसे में इस तकनीक से उन अंगों को मैचिंग डोनर मिलने तक जीवित रखा जा सकता है। इस तकनीक के जरिए मृत अंगों में पुन: ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति शुरू की जाती है। इसकी सफलता दर भी 60 से 65 प्रतिशत है। उम्मीद भी की जनि चाहिए और प्रार्थना भी कि इस दर को बढ़ाया जा सके।  

कौन कौन से महत्वपूर्ण अंग किए जा रहे हैं सुरक्षित यह जान लेना भी ज़रूरी है। एनआरपी तकनीक का उपयोग कर के किडनी, लिवर, फेफड़ा, हृदय और पैंक्रियाज जैसे अंगों को बंद होने के बाद दोबारा जीवित किया जा रहा है। 

डॉ. रणदीप ने बताया कि इस तकनीक का प्रयोग कर अमेरिका में सबसे ज्यादा खराब किडनी प्रत्यारोपण हो रही है। सड़क दुर्घटना या ऐसे ही अन्य मामलों में मौत के बाद अंगों में खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति घंटों बंद होने से वे शरीर के अंदर ही बेकार हो जाते हैं। उस स्थिति में उन अंगों को बाहर निकालकर एक विशेष मशीन की मदद से तब तक सक्रिय रखा जा सकता है, जब तक जरूरी हो।

आज के युग में करिश्मे दिखाने वाली तकनीक एनआरपी नाज़ा इतिहास रच रही है। मेडिकाल क्षेत्र इस करिश्मे को लेकर बहुत उम्मीदें हैं। इसके चमत्कार की चर्चा बहुत तेज़ी से हो रही है।  नॉर्मोथर्मिक रीजनल परफ्यूजन एक उभरती हुई तकनीक है, जो सर्कुलेटरी डेथ (डीसीडी) के बाद अंगों को जीवित रखने का एक विकल्प बन रहा है। इसे तुरंत एक्शन में ला कर ज़्यादा फायदा हो सकता है। 

उदाहरण के लिए डेड हार्ट के मामले में एनआरपी में खून को आईवीसी से शिरापरक सर्किट से निकाला ऑक्सीजनित किया जाता है और उदर की महाधमनी में वापस कर दिया जाता है। इसके अलावा एक कोडा बैलून कैथेटर (कुक इनकॉर्पोरेटेड, ब्लूमिंगटन, आईएन) को महाधमनी स्थल के माध्यम से डाला जाता है और वक्षीय महाधमनी में फुलाया जाता है। उदर महाधमनी को वक्षीय अंगों और मस्तिष्क में रक्त को जाने से रोकने के लिए डायाफ्राम के ठीक नीचे लगाया जाता है। वक्षीय और मस्तिष्क रक्त के पुर्नचक्रण को रोक दिया जाता है। ऐसी मशीनरी प्रत्यारोपण से पहले अंगों को ऑक्सीजन युक्त और स्वस्थ रखती है।

किन अंगों को कितने समय के अंदर करना होता है प्रत्यारोपित इसका भी विशेष तौर पर ध्यान रखा जाता है।  हृदय  को  4 से 6 घंटे के अंदर प्रत्यारोपित करना ज़रूरी होता है इसी तरह फेफड़े  को 4 से 6 घंटे के अंदर अंदर  प्रत्यारोपित करना ज़रूरी होता है। किडनी के मामले में यह अवधि कुछ अलग है। किडनी को 48 से 72 घंटे के अंदर अंदर लगा दिया जाना चाहिए। इसी तरह एक अन्य महत्वपूर्ण अंग लिवर को इस मकसद के लिए 12 से 24 घंटे का समय मिलता है। पैंक्रियाज  अर्थात अग्नाशय को 12 से 18 घंटे के अंदर अंदर लगा दिया जाना चाहिए और आंत को 6 से 12 घंटे  लगाना उचित होता है। 

गौरतलब है कि पाचन तंत्र का प्रमुख अंग और छोटी आंत का पहला भाग होता है अग्नाशय यानी पैंक्रियाज। पेट की यह बड़ी ग्रंथि छोटी आंत के ऊपरी हिस्से के बगल में होती है। पैंक्रियाज भोजन पचाने में सहायता करने वाले हार्मोन और एन्जाइम का उत्पादन करता है। यह शरीर की शर्करा की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। इसका कैंसर गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकता है। इसकी संभाल के ले विशेष सावधान रहना आवश्यजक है खास कर खान पान के मामले में। 

इस दिशा में जो विकास कार्य चल रहे हैं उन्हें देखते हुए अंग दान से जो अंग दान में मिलते हैं उन्हें अंग प्रत्योपन की तकनीक को अब और भी ज़्यादा अच्छी तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। केवल भारत में ही नहीं अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी अंग दान का अभियान अभी और तेज़ किया जाए तभी बात बन सकेगी। 

इस संबंध में बात करते हुए विशेषज्ञ बहुत महत्वपूर्ण बातें बताते हैं। उल्लेखनीय है कि जिन दो अंगों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है वे हैं गुर्दे और यकृत। संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय प्रत्यारोपण प्रतीक्षा सूची में लगभग 83 प्रतिशत लोग किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं और लगभग 12 प्रतिशत लोग यकृत प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जीवित दाता इनमें से किसी भी अंग को दान करने में सक्षम हैं यदि वे प्राप्तकर्ताओं से मेल खाते हों। इस तरह बहुत से लोगों को नया जीवन मिल सकेगा। 

लगभग 2,600 लोग या प्रत्यारोपण सूची के लगभग तीन प्रतिशत लोग हृदय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फेफड़े, अग्न्याशय और आंतों सहित अन्य अंग प्रतीक्षा सूची के बाकी हिस्से बनाते हैं। हालाँकि सभी उम्र के लोग सूची में हैं, लेकिन आंत प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करने वालों में से अधिकांश शिशु और बच्चे हैं।

यदि हम महर्षि दधीचि को सचमुच में श्रद्धासुमन अर्पित करना चाहते हैं तो उनकी उस महान क़ुरबानी को हमेशां याद रखें।    स्मरण रहे कि भारतीय इतिहास’ में कई दानी हुए हैं, किंतु मानव कल्याण के लिए अपनी अस्थियों का दान करने वाले मात्र महर्षि दधीचि ही थे। महर्षि दधीचि ने उनका अहित चाहने वाले इंद्र को ही अपनी अस्थियां दान कर दीं।  वृत्रासुर नामक राक्षस ने देवलोक पर कब्जा कर लिया और इन्द्र सहित सभी देवताओं को देवलोक से बाहर निकाल दिया। महर्षि ने योग विद्या से अपना शरीर त्याग दिया। महर्षि के शरीर की त्वचा, मांस और मज्जा उनके शरीर से अलग हो गए। मानव देह के स्थान पर सिर्फ़ उनकी अस्थियां ही शेष रह गईं। इन्द्र ने उन अस्थियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया और उन्हें ले जाकर ‘तेजवान’ नामक व्रज बनाया। आइए अतीत से प्रेरणा लें। महाऋषि दधीचि से प्रेरणा लें। 

क्या हम मृत्यु के बाद भी अपने शरीर और अंगों  करने से हिचकिचाते रहेंगे? उठिए जागिए और इस अभिजन का सक्रिय हिस्सा बनिए  

Monday, November 14, 2022

अपने अंदर के बच्चे को जिन्दा रखने की प्रेरणा है बाल दिवस

जैन स्कूल में बाल दिवस धूम-धाम से मनाया गया 


लुधियाना: 14 नवंबर 2022: (कार्तिका सिंह//एजुकेशन स्क्रीन):: बाल दिवस नेहरू जी की याद के साथ ही हर बच्चे के मन में एक नयें उत्साह का उदय करता है। ऐसा उत्साह बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी अपने अंदर के बचपने को हमेशा ज़िंदा रखने के लिए प्रेरित करता है। जहाँ एक और ज़िन्दगी की भागदौड़ में 2 पल की फुर्सत के लिए भी वक़्त चुराना पड़ता है, वहां ऐसे दिन हमारे दिल के बच्चे को थोड़ी और शरारतें करने का आग्रह करते हैं।  

कुछ ऐसा ही उत्साह  जैन स्कूल की सुबह की असेंबली में भी देखने को मिला।  जहाँ +1 क्लास के बच्चों ने एक रंगारंग कार्यकर्म पेश किया।  बच्चों में जोश और उत्साह देखने लायक था।  बच्चों ने चाचा नेहरू के जीवन पर प्रकाश डालने के साथ-साथ उनके जीवन से सम्बंधित कविताएं, भजन, क्विज़, कहानियां, राजस्थानी एवं पंजाबी डांस इत्यादि पेश किया गया।  'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' पर आधारित नाटक सबके आकर्षण का केंद्र रहा।  

स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती मीना गुप्ता जी ने सभी बच्चों को बाल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए, उनके प्रस्तुतिकरण पर उनकी सराहना की।  मैनेजिंग कमेटी के प्रधान श्री नन्द कुमार जैन जी ने बच्चों को बाल दिवस का महत्व बताते हुए, पूरी लगन और मेहनत के साथ पढाई करने का संदेश दिया। 

इस अवसर पर स्कूल मैनेजिंग कमेटी के चेयरपर्सन श्री सुखदेव राज जैन, प्रधान श्री नन्द कुमार जैन, सीनियर  उपप्रधान श्री विपन कुमार जैन, उपप्रधान श्री शांति स्वरुप जैन एवं श्री बांके बिहारी लाल जैन, सचिव श्री राजीव जैन, सह-सचिव श्री राकेश कुमार जैन, मैनेजर श्री अरविन्द कुमार जैन, केशियर श्री अशोक जैन,  स्कूल के समस्त स्टाफ मेंबर्स तथा विधार्थी उपस्थित थे। 

Saturday, July 16, 2022

सीजीसी लांडरा में श्री अखंड पाठ साहिब के साथ नया शुभारंभ

Saturday 16th July 2022 at 3:43 PM

 22वें शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ पर लिया गुरु का आशीर्वाद 


लांडरां
: (मोहाली): 16 जुलाई 2022: (गुरजीत बिल्ला//एजुकेशन स्क्रीन)::

हर साल की तरह इस बार भी चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज (सीजीसी) लांडरा में 22वें शैक्षणिक सत्र की शुरुआत कैंपस में तीन दिवसीय अखंड पाठ के साथ की। सीजीसी  परिवार जिसमें मैनेजमेंट, फैक्लटी और छात्र इस पवित्र समारोह में उपस्थित हुए और उन्होंने 2022 के नए सत्र के लिए परमात्मा से आशर्वाद पाने के लिए प्रार्थना की। आज श्री अखंड पाठ साहिब जी का भोग डाला गया और उसके उपरांत कीर्तन तथा गुरु के लंगर का आयोजन किया गया।

इस पवित्र समारोह के संपन्न होने के बाद, सीजीसी लांडरां के चेयरमैन सतनाम सिंह संधू तथा प्रेसिडेंट राशपाल सिंह धालीवाल, ने छात्रों और फैकल्टी को संबोधित करते हुए  उनके प्रयासों और मेहनत के लिए बधाई दी और उनकी सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने सीजीसी लांडरा को अपने इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए एनबीए मान्यता प्राप्त करने तथा एनआईआरएफ रैंकिंग 2022 में शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में 139 वां अखिल भारतीय स्थान प्राप्त करने, जो पिछले साल की एनआईआरएफ रैंकिंग से आठ अंकों का सुधार है, के लिए भी शुभकामनाएं दी।  उन्होंने उन्हें सीजीसी लांडरां की 21 साल की शानदार विरासत को मजबूत करने के लिए अपना योगदान बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जिसमें अगले साल देश के शीर्ष सौ शिक्षा संस्थानों की लीग में सीजीसी को शामिल करने की दिशा में काम करना सबसे शीर्ष लक्ष्य हो।

मनिपुर, आसाम, आन्ध्राप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान, उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश, छत्तिसगढ़, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश ओर अन्य 15 से अधिक भारतीय राज्यों के छात्रों ने चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज (सीजीसी) लांडरा से पढ़ाई करने के लिए नए शैक्षणिक सत्र 2022 में  दाखिला लिया है। उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा संस्थान के रुप में सीजीसी लांडरा की विश्वासनीयता को मज़बूत करते हुए देशभर से आए छात्रों के नए बैच इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, बायोटैक्नोलोजी, होटल मैनेजमेंट एवं अन्य कई कोर्सेज में पढ़ाई कर रहे हैं।

Wednesday, February 23, 2022

अगलासेम टैलेंट सर्च एग्ज़ाम में लुधियाना की छात्रा रही अव्वल

23rd February 2022 at 6:23 PM

 2021-2022 में पहला राष्ट्रीय रैंक हासिल किया 

लुधियाना: 23 फरवरी 2022: (कार्तिका सिंह//एजुकेशन स्क्रीन)::

छात्राएं तेज़ी से आगे बढ़ती जा रही हैं। हर दिन उनके विकास की रफ्तार तेज़ हो रही है। अब एक और अच्छी खबर आई है लुधियाना से जहां धनुषठा छाबड़ा ने कमल किया है। 

सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल, सराभा नगर, लुधियाना की छात्रा धनुष्ठा छाबड़ा ने एग्लासेम एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा आयोजित की गई अगलासेम टैलेंट सर्च एग्ज़ाम (एटीएसई) 2021-2022 में पहला राष्ट्रीय रैंक हासिल किया है। इसके लिए उन्हें प्रमाण पत्र, स्वर्ण पदक और 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। 
अगलासेम टैलेंट सर्च एग्ज़ाम (एटीएसई) कक्षा 5 से 12 तक के छात्रों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा खोज-सह-छात्रवृत्ति परीक्षा है जिसमें छात्रों का उनके विज्ञान और गणित ज्ञान के आधार पर टैस्ट लिया जाता है। 

यह परीक्षा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपने साथियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और छात्रवृत्ति प्राप्त करने का अवसर देती है जो उन्हें अपने शिक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। प्रत्येक कक्षा के शीर्ष 100 छात्रों को कुल 12.16 लाख रुपये की कुल 800 स्कॉलशिप प्रदान की गई।

Wednesday, December 8, 2021

हिमाचल के छात्रों की स्किल मैपिंग होगी-गोविन्द सिंह ठाकुर

8th December 2021 at 9:17 AM

चयनित छात्रों के लिए प्रेक्टिकल कार्य शुरू 


शिमला
: 06 दिसम्बर, 2021: (देवभूमि स्क्रीन//एजुकेशन स्क्रीन)::

शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने आज यहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रदेश में क्रियान्वयन संबंधित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्नवयन में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है।  

उन्होंने कहा कि प्रदेश के चयनित विद्यालयों में छठीं, सातवीं और आठवीं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए प्री-वोकेशनल शिक्षा आरम्भ की गई है और इसके अन्तर्गत विद्यालयों को बजट आवंटित किया गया है। प्रदेश के विद्यार्थियों को विस्तृत रूप से प्री-वोकेशनल टेªनिंग प्रदान करने के लिए विद्यार्थियों की स्किल मैपिंग की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को उच्चतर कक्षाओं मेें विषय विशेष का चयन करने में सहायता मिलेगी। विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने में प्रदेश से संबंधित आवश्यकताओं और संबंधित जिलों पर आधारित विषयों को ध्यान में रखकर वोकेशनल ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि वोकेशनल विषयों को पाठ्यक्रम आधारित न रखकर गतिविधियों आधारित रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के 140 महाविद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अन्तर्गत प्रदेश के महाविद्यालयों को बहुविषयक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्नवयन सुनिश्चित करने के लिए टास्क फोर्स के सदस्यों को बढ़ाकर 21 किया जाएगा। एनईपी के अन्तर्गत प्रदेश से सम्बन्धित विषयों का प्रारूप तैयार करने के लिए प्राथमिक और उच्चतर शिक्षा से सम्बन्धित विशेषज्ञों की स्टेरिंग कमेटी गठित की गई है। उन्होंने अधिकारियों को राज्य से सम्बन्धित पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को विषय विशेष से सम्बन्धित विशेषज्ञों का एक डाटा बैंक तैयार करने के निर्देश दिए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश एनईपी के सफल क्रियान्वयन की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि स्टार परियोजना के अन्तर्गत राज्य के आठ जिलों में परामर्श कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं और शीघ्र ही अन्य जिलों में भी इन कार्यशालाओं का आयोजन करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों को एनईपी से सम्बन्धित जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए जिलों के साथ-साथ खण्ड स्तर पर भी यह कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी. रामकृष्ण राव, निदेशक उच्चतर शिक्षा डाॅ. अमरजीत शर्मा, समग्र शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक वीरेन्द्र शर्मा सहित शिक्षा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और विद्याभारती के पदाधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

Saturday, September 4, 2021

हिमाचल प्रदेश: विभागीय परीक्षा 13 से 20 सितम्बर तक होंगी

4th September 2021 at  6:28 PM

 कोविड नेगेटिव रिपोर्ट साथ लाना आवश्यक होगा 

शिमला: 04 सितम्बर 2021: (एजुकेशन स्क्रीन//देवभूमि स्क्रीन)::

हिमाचल प्रदेश विभागीय परीक्षा बोर्ड के एक प्रवक्ता ने आज यहां जानकारी दी कि सभी श्रेणीयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विभागीय परीक्षाएं 13 से 20 सितंबर, 2021 तक काॅलेज ऑफ एक्सीलेंस संजौली, शिमला में आयोजित की जाएंगी।

प्रवक्ता ने बताया कि 13 सितंबर, 2021 को पेपर-1 अर्थात् वित्तीय प्रशासन के आयोजन की व्यवस्था राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक (बालिका) विद्यालय मण्डी में भी की गयी है।

हिमाचल प्रदेश विभागीय परीक्षा बोर्ड द्वारा सभी पात्र उम्मीदवारों के रोल नंबर जारी कर दिए गए हैं। सभी उम्मीदवारों से अनुरोध है कि रोल नंबर डाउनलोड और प्रिंट करने के लिए वे अपने पीएमआईएस खातों की जांच करें। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड और हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड से सम्बंधित उम्मीदवारों के रोल नंबर डाक द्वारा भेजे गए हैं और वे अपने रोल नंबर हिपा (एचआईपीए) की वेबसाइट पर भी देख सकते हैं।

उम्मीदवारों को केवल संदर्भ पुस्तकों, अधिनियम और विभागीय मैनुअल व पाठ पुस्तकों की अनुमति है और टेक्स्ट बुक, हेल्प बुक और गाइड की अनुमति नहीं होगी। परीक्षा भवन के अंदर मोबाइल फोन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी और निर्देशों की अवहेलना को अनुचित साधनों का उपयोग माना जाएगा।

उम्मीदवारों को कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र या परीक्षा से 72 घंटे के भीतर जारी आरटी पीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट साथ लाना आवश्यक है।

Tuesday, July 20, 2021

डी. डी. जैन कॉलेज ने कराई साईबर क्राईम पर चर्चा

 20th July 2021 at 01:58 PM

 विशेषज्ञों ने भी बतायीं इससे बचने को ख़ास ख़ास बातें 


लुधियाना: 20 जुलाई 2021: (एजुकेशन स्क्रीन ब्यूरो):: 

साईबर क्राईम की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा  रही है। हालांकि पुलिस में भी इससे निपटने के लिए अलग विभाग और सेल बन चुके हैं फिर भी समस्या विकराल होती जा रही है। उसे ले कर एक चर्चा का आयोजन  किया लुधियाना के पुराने संस्थानों में से एक जैन शिक्षण संस्थान डी डी जैन कालेज ऑफ एजुकेशन ने। 

पंजाबी में भी देखिए इससे
मिलती जुलती स्टोरी
 
डी. डी. जैन कॉलेज ऑफ एजुकेशन ने कोविद जैसे कठिन समय में भी 20 जुलाई, 2021 को दोपहर के सत्र में छात्रों और शिक्षकों के लिए वर्चुअल मोड के माध्यम से "साइबर अपराध" पर व्याख्यान का आयोजन किया। इस अवसर पर श्री पवन कुमार, प्रभारी साइबर यूनिट-1, लुधियाना मुख्य अतिथि थे। एस. जुझार सिंह और सुश्री हरकिरण कौर विशिष्ट अतिथि थीं। इन ख़ास मेहमानों ने बहुत ही अच्छी जानकारी प्रदान की। 

डॉ. विजय लक्ष्मी ने अध्यक्ष श्री नंद कुमार जैन और प्रबंध समिति के अन्य सभी सदस्यों की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। 

श्री पवन ने साइबर अपराधों में नवीनतम रुझानों और उन्हें रोकने के लिए अपनाए जाने वाले विभिन्न निवारक उपायों के बारे में सभी को अवगत कराया। उन्होंने महिलाओं के बीच विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों की बढ़ती दर पर जोर दिया। उन्होंने नुकसान को कम करने के लिए उठाए जाने वाले विभिन्न तात्कालिक कदमों को बहुत खूबसूरती से समझाया।

एस. जुझार सिंह ने विभिन्न सोशल मीडिया पर हो रहे अपराधों के बारे में सभी को अवगत कराया और उन सभी को रोकने के वैकल्पिक तरीके प्रदान किए। इसके अलावा, सुश्री हरकिरन छात्रों को किसी को , यहां तक ​​कि निकटतम समूह में भी कोई व्यक्तिगत तस्वीर साझा नहीं करने का सुझाव दिया।

अंत में, छात्रों और शिक्षकों के विभिन्न प्रश्नों को विशेषज्ञ कर्मियों द्वारा संतुष्ट किया गया और औपचारिक धन्यवाद प्रस्तुत किया गया।

Saturday, April 24, 2021

प्रताप कॉलेज द्वारा अंतराष्ट्रीय वैबिनार आयोजित

Saturday: 24th April, 2021 At 1:54 PM 

'पैडागोजिकल टैक्नोलॉजीस इन टीचिंग' रहा मुख्य विषय 

लुधियाना: 24 अप्रैल, 2021: (कार्तिका सिंह //पंजाब स्क्रीन) ::

डॉ मनप्रीत कौर 
प्रताप कालेज आफ एजुकेशन, लुधियाना तथा कज़ान फैडरल यूनिवर्सिटी(K.F.U),रशिया के इंस्टीट्यूट आफ फिलालोजी एंड इंटरकल्चरल कम्युनिकेशन के संयुक्त तत्वावधान में ,"अन्तर्राष्ट्रीय वैबीनार"आयोजित किया गया।इन दोनों संस्थाओं के मध्य मजबूत सांझ विकसित करने के लिए किए गये इस अंतरराष्ट्रीय वैबीनार का मुख्य विषय,' पैडागोजिकल टैक्नोलॉजीस इन टीचिंग एक्टीविटीज 'था।इस वैबीनार मे इंडिया, स्पेन, रशिया, इटली, सउदी अरब और पुर्तगाल से    60 से अधिक शिक्षकों व शोधार्थियों ने भाग लिया।

 प्रताप कालेज आफ ऐजुकेशन के डायरेक्टर डा.बलवंत सिंह के स्वागती सम्बोधन से वैबीनार की शुरुआत हुई।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में टैक्नोलॉजी  का प्रयोग शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य है परन्तु इसमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।प्रोफेसर रेडिफ आर.जमालेतदिनोव, डायरेक्टर, इंस्टीट्यूट ऑफ फिलालोजी एंड इंटरकल्चरल कम्युनिकेशन, के.एफ.यू.,रशिया ने भी नये तकनीकी माध्यमों द्वारा शिक्षण करवाने संम्बन्धित जानकारी सांझा की।  

सर्वप्रथम लारा सारा अगरती,(एसोसिएट प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ बरगिमो, इटली) ने 'ट्रेनिंग आफ टीचर्स इन टैक्नोलॉजी ऐस नेवर एंडिंग स्टोरी' विषय पर विचार व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि आनलाइन टीचिंग में अध्यापक को खुद सक्रिय भूमिका निभाते हुए शिक्षण करवाना चाहिए।आनलाइन उपलब्ध टूल्स  के लगातार प्रयोग से विद्यार्थियों में बढ़ रहे तनाव को दूर किया जाना अति आवश्यक है।एक शिक्षक की इस तनाव को दूर करने में विद्यार्थियों की मदद करना अति महत्वपूर्ण भूमिका है।इसके लिए अध्यापक को भी सक्रिय रहते हुए नये माध्यम सीखने की आवश्यकता है।    


 भारत से डा.मनप्रीत कौर (प्रिंसिपल, प्रताप कालेज आफ ऐजुकेशन)ने "ट्रेडिशन्स एंड इनोवेशन इन यूजिंग पैडागोजिकल टैक्नोलॉजिस इन इंडियन ऐजुकेशन" विषय संम्बन्धित प्रभावशाली वक्तव्य दिया।.उनके अनुसार भारतीय पारम्परिक शिक्षा प्रणाली के ढंग आज भी शिक्षण संस्थानों में अपनाने चाहिए।उन्होंने समृद्ध भारतीय शैक्षणिक व्यवस्था का वर्णन तक्षशिला, नालंदा आदि अति प्राचीन यूनिवर्सिटियों का हवाला देकर किया।उन्होंने कहा कि भले ही कोरोना काल में टैक्नोलॉजी का प्रयोग शिक्षण के लिए किया जा रहा है, परन्तु व्यक्तिगत तौर पर वह पारम्परिक शिक्षा व्यवस्था के हक में है।उन्होंने आशा प्रकट करते हुए कहा कि शीघ्र ही परिस्थितियों के सामान्य हो जाने पर छात्रों के विद्यालयों में आना शुरू होने पर वास्तविक क्लास रूम शिक्षण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जा सकेगा।उनके अनुसार भारत जैसे विकासशील देश में लगभग आधी आबादी के पास नये टैक्नोलॉजी आधारित मोबाइल फोन या लैपटॉप आदि उपकरण उपलब्ध नहीं है, अतः उन्हें शिक्षित करना असंभव है।इसके अलावा नेटवर्क की समस्या के कारण भी शिक्षण सही तरीके से नहीं करवाया जा सकता।इसलिए कक्षाओं में अध्यापकों व विद्यार्थियों की उपस्थिति से ही सभी को सही तरीके से ज्ञान प्रदान किया जा सकता है।

 उन्होंने कहा कि असल में नवाचार से अभिप्राय नये-नये टूल विकसित करना नहीं होता, अपितु टूल चाहे नया हो या पुराना, उसे कुछ नया सीखने के लिए प्रयोग किया जाना ही नवाचार कहलाता है।उन्होंने सांइस आफ लर्निंग संम्बंधित कुछ टूल्स की जानकारी सांझा की। तदुपरान्त चिली देश की एबेल सी.ने तथा कज़ान फैडरल यूनिवर्सिटी की एलिना डी. ने अपने विचार पेश किए। सउदी अरब की ज़जान यूनिवर्सिटी से एसोसिएट प्रोफेसर मुनाज़ाह शेख तथा पुर्तगाल से पोलिटैक्निक आफ पोर्टो के प्रोफेसर मैनूल कार्लोस एफ. नेअपने अपने देशों में अपनाई जा रही टीचिंग एक्टीविटीज की जानकारी सांझा की।

  भारत से प्रताप कालेज आफ ऐजुकेशन की असिस्टेंट प्रोफेसर बलविंदर कौर ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में वर्तमान समय में अपनाए जा रहे शिक्षा माध्यमों के बारे बताया। इस सारे कार्यक्रम का संचालन कज़ान फैडरल यूनिवर्सिटी से स्वेतलाना वी.कारकिना(कैंडीडेट आफ पैडागाजी ,एसोसिएट प्रोफेसर आफ डिपार्टमेंट ऑफ टाटरिस्टिक्स एंड कल्चरल स्टडीज) ने अत्यंत सफलतापूर्वक किया। अंत में भारत से डा.मनप्रीत कौर ने वैबीनार के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर सभी को धन्यवाद दिया।

Wednesday, December 23, 2020

SCD: याचना शर्मा ने 85.87% के साथ पहला स्थान पाया

 एस. सी. डी. कॉलेज के छात्रों के नाम स्वर्ण और रजत पदक 

लुधियाना: 23 दिसंबर 2020: (कार्तिका सिंह// एजुकेशन स्क्रीन )::
स्नातकोत्तर हिंदी विभाग एवं शोध-केन्द्र,
सतीश चंद्र धवन राजकीय महाविद्यालय के एम.ए हिंदी चौथे समैस्टर के विद्यार्थियों ने पंजाब विश्वविद्यालय की मेधा सूची में अपना स्थान बनाते हुए कॉलेज का नाम चमकाया किया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी टाॅपर लिस्ट में कॉलेज की मेधावी छात्रा याचना शर्मा ने 85.87 प्रतिशत अंक प्रात करते हुए यूनिवर्सिटी मे पहला स्थान पाया और अपने लिए स्वर्ण पदक पक्का किया। 
रिंकू कुमारी 
इसी तरह
रिंकू कुमारी (84.18%) ने दूसरा स्थान हासिल करते हुए रजत पदक की दावेदारी पक्की की।  रजत सेठी (82.31%) ने सातवां स्थान हासिल किया। हिंदी विभाग के इस परिणाम से समूचे कॉलेज में खुशी की लहर देखने को मिली। प्रिंसिपल डॉ. धर्म सिंह संधू ने इस शानदार परिणाम हेतु हिंदी विभाग को बधाई दी और कहा कि हिन्दी विभाग के विद्यार्थी हर सेमेस्टर में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय में अपना स्थान बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इन विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के100 वर्ष के ऐतिहासिक यात्रा में सफलता का एक पन्ना और जोड़ दिया है। विद्यार्थियों ने इस सेमेस्टर में भी केवल हिंदी विभाग का ही नहीं अपितु संपूर्ण कॉलेज का नाम रोशन किया है।  विभागाध्यक्ष  प्रो.(डां.)अश्वनी भल्ला ने विद्यार्थियों की सफलता का सारा श्रेय उनकी मेहनत और साधना को दिया।  डॉ. मुकेश अरोड़ा (सीनेट सदस्य, पंजाब विश्वविद्यालय, चंड़ीगढ़) ने विशेष तौर पर शिरकत करते हुए विद्यार्थियों को बधाई दी तथा कहा कि विद्यार्थियों की लगन और अध्ययनशीलता के परिणाम स्वरूप ही ऐसे परिणाम सामने आते हैं। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि विभाग के विद्यार्थियों ने इस परिणाम के माध्यम से सिद्ध कर दिया कि चाहे कोरोना का आतंक अभी भी छाया है परंतु मानसिक रूप से  विद्यार्थी इससे उबरने लगे हैं। डॉ. सौरभ कुमार ने कहा कोरोना काल मे भी  विभाग के विद्यार्थियों ने टॉपर बनने की अपनी परंपरा को कायम करने में सफलता पाई है, जो आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। इस अवसर पर  टॉपर याचना शर्मा, रिंकू  और रजत सेठी तीनों का कहना है कि "हम भी साहित्य की लहर को आगे बढ़ाते हुए भाषा-साहित्य का प्रोफेसर बनकर आपने अध्यापकों का नाम रोशन करना चाहते है।" विद्यार्थियों ने कहा कि महाविद्यालय और विशेषकर हिन्दी विभाग में  विद्यार्थियों को मिलने वाला सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उनके लिए हमेशा लाभदायक रहा।  विभाग के अन्य प्रध्यापक डॉ. मोनिका जैन, डॉ. सौरभ कुमार, प्रो. सोनदीप, प्रो. इंद्रजीत पासवान ने भी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों पर विभाग को गर्व है। 

Monday, November 2, 2020

एनआईटी सिलचर के 18वें दीक्षांत समारोह में विशेष सम्बोधन

 Monday:02nd November 2020 17:26 IST 

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए संबोधित किया 

 नयी शिक्षा नीति से उत्कृष्टता मिलेगी-श्री रमेशखरियाल  पो'निशंक' 

नई दिल्ली02-नवंबर-2020: (पीआईबी//एजुकेशन स्क्रीन)::

केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल 'निशंक'ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) सिलचर के 18वें दीक्षांत समारोह कोवर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए संबोधित किया। वे मुख्य आतिथि के तौर पर समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल विशिष्ट अतिथि थे। एआईसीटीई के प्रमुख प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धेविशिष्ट अतिथि थे। एनआईटी सिलचर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रमुख श्री गौतम एन मेहराऔर गणमान्य पूर्व छात्र एवं डीआरडीओ के एसोसिएट डायरेक्टर (साइंटिस्ट जी) श्री संजय चौधरी भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर श्री पोखरियाल ने उत्तीर्ण छात्रों को बधाई दी और कहा कि यह पल उन लोगों के जीवन के यादगार पलों में से एक है। उन्होंने एनआईआरएफ-2020 में 46वां रैंक हासिल करने के लिए एनआईटी सिलचर को बधाई दी और उल्लेख किया कि संस्थान एनआईआरएफ-2019 से इस बार पांच पायदान ऊपर चढ़ा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हो रही है कि एनआईटी सिल्चर ने वैश्विक रैंकिंग प्लेटफॉर्म जैसे द रैंकिंग और यूएस न्यूज रैंकिंग में प्रमुख स्थान हासिल किए हैं। उन्होंने एनआईटी सिलचर को इस तरह की पहचान हासिल करने के लिए बधाई दी और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर राष्ट्रीय शिक्षा के उत्थान के लिए सभी आयामों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए कहा।

मंत्री ने प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली की उत्कृष्टता उल्लेख किया है जब दुनिया भर के विद्वान नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला आदि विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए हमारे देश आते थे। उन्होंने बताया कि हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली पर गर्व करते हुए और विद्वता से भरे शिक्षकों एवं छात्रों के साथ भविष्य की तैयारी करते हुए गुणवत्ता आधारित शित्रा प्रणाली के साथ भारत खुद को विश्व गुरु के तौर पर स्थापित करेगा। श्री पोखरियाल ने नई शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला जो पथ प्रवर्तक साबित होंगे और लाखों छात्रों की जीवन के सभी क्षेत्रों में बढ़ने और उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति के तहत सरकार न केवल अपने संस्थानों की स्थापना के लिए विश्व के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों/संस्थानों के साथ सहयोग कर रही है, बल्कि विभिन्न आयामों में भी सहयोग कर रही है। मंत्री ने पेटेंट को बढ़ाने के लिए टैलेंट को पेटेंट से जोड़ने का उल्लेख किया जो न केवल संस्थान को आगे बढ़ाएगा बल्कि देश के आर्थिक विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा।

श्री पोखरियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार के नेतृत्व में राष्ट्रीय अनुसंधान कोष और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी मंच की शुरूआत की गई है और यह देश के अनुसंधान एवं विकास परिदृश्य को एक बेहतर, समावेशी और उत्कृष्ट वातावरण में बदल देगा। उन्होंने उल्लेख किया कि एनईपी-2020के तीन स्तंभ-सुधार, परिवर्तन और प्रदर्शन, राष्ट्र की शिक्षा प्रणाली में क्रांति लाएंगे और इनमें हमारी शिक्षा प्रणाली को एक वैश्विक मंच पर स्थापित करने की क्षमता है। श्री पोखरियाल ने यह भी कहा कि संस्थान के लिए एक सतत भविष्य के निर्माण की खातिर पूर्व छात्रों को अपने संस्थान के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने समावेशी तरीके से संस्थान की बेहतरी के लिए एक एलुमनी टास्क फोर्स बनाने का विचार व्यक्त किया।

श्री पोखरियाल ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान, जय किसान की घोषणा ने देश को कृषि क्षेत्र में आत्म-निर्भर राष्ट्र में बदल दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस नारे में‘जय विज्ञान’को जोड़ा जिससे देश के वैज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण बदलाव आया और हमें वैश्विक रूप से दूसरी परमाणु महाशक्तियों के साथ अग्रिम पंक्ति में खड़े होने में मदद मिली। उसी नारे में हमारे वर्तमान प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘जय अनुसंधान’को जोड़ा जो राष्ट्र के अनुसंधान और विकास की प्रगति को और ऊंचाई पर लेकर जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के सपने और एनईपी-2020 के कार्यान्वयन के साथ हम शिक्षा और अनुसंधान में अपनातेजस्वी गौरव दोबारा हासिल कर लेंगे। मंत्री ने युक्ति 2.0 पोर्टल की पहल का भी उल्लेख किया जहां देश के सभी प्रतिष्ठित संस्थान अपने अभिनव विचार साझा करते हैं और समाज की बेहतरी के लिए तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। अंत में उन्होंने भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया का उल्लेख किया और कहा कि ये नए भारत के निर्माण के लिए राष्ट्र के युवा प्रतिभाशाली संसाधन को पर्याप्त समर्थन और सहयोग प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य एक नये भारत का निर्माण करना है जो आत्मनिर्भर हो और बुद्धिमता एवं ज्ञान से सशक्त हो।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने दीक्षांत संबोधन में युवा स्नातक छात्रों को बधाई दी। उन्होंने संस्थान की हालिया उपलब्धियों पर खुशी जतायी। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखें और उन्हें हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करें। उन्होंने सफलता हासिल करने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य को सभी शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने सफल जीवन के लिए मन और स्वास्थ्य का सही संतुलन बनाए रखने के लिए जीवन में स्वामी विवेकानंद का अनुसरण करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे छात्रों के सामूहिक प्रयास से नये भारत के प्रधानमंत्री के सपने को साकार किया जा सकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि स्नातक छात्रों जैसे युवा ही राष्ट्र को आगे बढ़ाने और सपनों के भारत का निर्माण करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र की अपार क्षमता और संभावनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि इसमें प्रगतिशील भारत के निर्माण की दिशा में बड़ा प्रभाव डालने की क्षमता है।

एनआईटी सिलचर के निदेशक प्रो. शिवाजी बंद्योपाध्याय ने इस साल उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के पूरे शैक्षणिक सत्र में हुई सभी गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए संस्थान की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने सभी स्नातक छात्रों को बधाई दी और कहा कि 2020 के बैच को उसकी संभावनाओं और क्षमताओं के लिए इतिहास में याद किया। उन्होंने समारोह में शामिल होने के लिए शिक्षा मंत्री का आभार जताया और कहा कि शिक्षा मंत्रालय की मदद और समर्थन के साथ, एनआईटी सिलचर अपने संसाधनों की मदद से सरकार के सपने को पूरा करने के लिए हमेशा प्रयास करता रहेगा।

संस्थान के 18वें दीक्षांत समारोह में विभिन्न पदक विजेताओं के नाम की घोषणा की गयी। इस वर्ष पूरे संस्थान में सर्वाधिक सीपीआई हासिल करने के लिए संस्थान स्नातक वर्ग में स्वर्ण पदक श्री क्षितिज मेहरोत्रा को दिया गया। वे मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं। सर्वश्रेष्ठ स्नातक छात्र के लिए स्वर्ण पदक श्री प्रक्ष झा को दिया गया जो कि कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग के छात्र हैं। स्नातकोत्तर वर्ग में स्वर्ण पदक मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र श्री सुजीत टी को दिया गया। इस वर्ष, कालीकृष्णा मृणालिनी स्मारक स्वर्ण पदक, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा सुश्री ह्लादिनी अग्निवेश को जबकि सास्वत पुरकायस्थ स्मारक स्वर्ण पदक, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र श्री आशीष रंजन को दिया गया। रसायनशास्त्र विभाग की पीएचडी छात्रा सुश्री कल्याणी राजकुमारी को सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरेट की डिग्री दी गयी। रजत पदक विजेताओं की भी घोषणा की गयी। असाधारण शिक्षक का पुरस्कार प्रोफेसर सौरभ चौधरी को दिया गया। यह घोषणा करते हुए खुशी महसूस की गयी कि संस्थान के 18वें दीक्षांत समारोह में कुल 881 छात्रों को डिग्री प्रदान की गयी जिनमें इंजीनियरिंग के अलग-अलग विषयों के 572 बी.टेक छात्र, 188 एम.टेक छात्र, 30 एम.एससी छात्र, 43 एमबीए छात्र और 48 पीएचडी छात्र हैं।

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एमजी/एएम/पीके/एसएस


खादी का कारगिल-लेह में विशेष करिश्मा

 02-नवंबर-2020 15:51 IST

   रोज़गार का सृजन करके चेहरों पर मुस्कान ला रही है खादी 


नई दिल्ली
02-नवंबर-2020: (पीआईबी//एजुकेशन स्क्रीन)::

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा सृजित स्व-रोजगार के परिणामस्वरूप कारगिल और लेह के शांत हिमालयी क्षेत्रों में उत्पादन गतिविधियां फलफूल रही हैं।

2017-18 से केवीआईसी ने कारगिल और लेह में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना के तहत लगभग 1000 विभिन्न छोटी और मध्यम विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं। इनसे केवल साढ़े तीन साल की अवधि में ही स्थानीय युवाओं के लिए 8200 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। इन इकाइयों ने 2017-18 से 32.35 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी जारी की है।

सीमेंट ब्लॉकों के विनिर्माण से लेकर लोहे और स्टील की वस्तुओं के विनिर्माण, ऑटोमोबाइल मरम्मत वर्कशॉप, टेलरिंग इकाइयां, लकड़ी की फर्नीचर निर्माण इकाइयां, लकड़ी पर नक्काशी की इकाइयां, साइबर कैफे, ब्यूटी पार्लर और सोने के आभूषणों के निर्माण आदि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें केवीआईसी ने सहायता प्रदान की है। इससे स्थानीय लोगों को सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने में मदद मिली है। यहां तक कि 2020-21 के पहले 6 महीनों के दौरान, कोविड-19 लॉकडाउन के बावजूद केवीआईसी ने विभिन्न क्षेत्रों में कारगिल में 26 और लेह में 24 नई परियोजनाएं स्थापित करने में मदद की, जिससे इन दोनों क्षेत्रों में 350 नौकरियों का सृजन हुआ।

उल्लेखनीय है कि केवीआईसी पीएमईजीपी योजना के लिए एक नोडल कार्यान्वयन एजेंसी है। 2017-18 से 2020-21 (30 सितंबर तक), केवीआईसी ने कारगिल में 802 परियोजनाएं और लेह में 191 परियोजनाएं स्थापित की हैं। जिसमें कारगिल में 6,781 और लेह में 1421 रोजगारों का सृजन हुआ। केवीआईसी ने कारगिल में इन परियोजनाओं के लिए मार्जिन मनी के रूप में 26.67 करोड़ रुपये का वितरण किया, जबकि इसी अवधि के दौरान लेह क्षेत्र में 5.68 करोड़ रुपये का वितरण किया गया।

केवीआईसी के चेयरमैन श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि कारगिल और लेह में रोजगार में हुई वृद्धि में पर्यावरण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण लेह-लद्दाख क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधानमंत्री के नजरिए का योगदान है। इस क्षेत्र में साल में केवल छह महीने तक ही संपर्क स्थापित हो पाता है। कारगिल और लेह ने विभिन्न विनिर्माण गतिविधियों को बनाए रखने की अपार क्षमता दिखाई है। लेह और कारगिल देश के बाकी हिस्सों से लगभग छह महीने तक कटा रहता है। हालांकि, ये इकाइयां इन क्षेत्रों में पूरे वर्ष सामानों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करेंगी।

कारगिल और लेह के लाभार्थियों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अपनी उत्पादन इकाइयां शुरू करने के बाद नौकरियों की तलाश में दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। इन इकाइयों ने न केवल उनके लिए स्व-रोजगार सृजित किए हैं बल्कि इस क्षेत्र के कई अन्य बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।

कारगिल के गांव मिंजी के निवासी मोहम्मद बाकिर ने 10 लाख रुपये के शुरुआती ऋण के साथ सीमेंट ब्लॉक ईंटों की उत्पादन इकाई शुरू की थी। अब उसका 52 लाख रुपये का सालाना कारोबार है। उसने अपनी विनिर्माण इकाई में 8 व्यक्तियों को रोजगार दिया है। इसी तरह  लोहे और इस्पात की वस्तुओं के उत्पादन से जुड़े इस्माइल नसीरी ने कारगिल के ग्राम पोयेन में 25 लाख रुपये की लागत से अपनी इकाई शुरू की और 10 लोगों को रोजगार दिया है तथा उसकी इकाई 76 लाख रुपये का कारोबार कर रही है।

रोजगार की होड़ ने स्थानीय महिलाओं को भी स्व-रोजगार के लिए प्रेरित किया है जो घर  बाहर जाने और स्वतंत्र रूप से काम करने की इच्छुक नहीं थी। केवीआईसी की सहायता से अनेक महिला उद्यमी इन जिलों में कटिंग, सिलाई इकाइयां और ब्यूटी पार्लर सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं।

कारगिल के बारू में एक महिला उद्यमी हमीदा बानो ने सिलाई की गतिविधि में भाग लिया और अपनी यूनिट में 3 अन्य महिलाओं को रोजगार दिया। हमीदा का सालाना कारोबार भी 12 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

यह उल्लेख करना उचित है कि लेह-लद्दाख क्षेत्र का विकास केंद्र सरकार का प्रमुख उद्देश्य रहा है। 2019 में जम्मू और कश्मीर के विभाजन के बाद से इस क्षेत्र में स्थानीय रोजगार के सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

कारगिल और लेह में 2017-18 से 2020-21 तक (30 सितंबर तक) परियोजनाओं और रोजगार की संख्या

क्र.सं.

वर्ष

परियोजनाओं की संख्या

वितरित की गई मार्जिन मनी (रुपये लाख में)

रोजगार सृजन

01

2017-18

172

417.12

1099

02

2018-19

462

1491.63

4252

03

2019-20

309

1122.94

2501

04

2020-20

(30.09.2020 तक)

50

204.00

350

05

योग

993

3235.69

8202

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एमजी/एएम/आईपीएस/सीएल/एसके

Monday, September 7, 2020

अधिसूचित रिक्तियों के लिए ‘कंप्यूटर आधारित टेस्ट’

प्रविष्टि तिथि: 05 SEP 2020 6:59PM by PIB Delhi
भारतीय रेलवे 15 दिसंबर 2020 से करेगी शुरुआत  
नई दिल्ली: 5 सितंबर 2020: (पीआईबी//एजुकेशन स्क्रीन)::
भारतीय रेलवे 15 दिसंबर 2020 से अधिसूचित रिक्तियों के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्‍ट लेना शुरू कर देगी।
भारतीय रेलवे ने 3 प्रकार की रिक्तियां अधिसूचित की थीं। इनमें एनटीपीसी के लिए 35208 रिक्तियां (गैर तकनीकी प्रचलित श्रेणियां जैसे कि गार्ड, कार्यालय क्लर्क, वाणिज्यिक क्लर्क इत्‍यादि), 1663 रिक्तियां पृथक एवं मंत्रिस्तरीय श्रेणियों (स्टेनो इत्‍यादि) के लिए और 103769 लेवल 1 रिक्तियां (ट्रैक मेंटेनर्स, प्‍वाइंट्समैन इत्‍यादि) थीं। सभी आरआरबी ने एनटीपीसी श्रेणियों, लेवल-1 पदों और पृथक एवं विविध श्रेणियों के लिए कुल मिलाकर 1.40 लाख रिक्तियों को अधिसूचित किया था। उपरोक्त रिक्तियों के लिए आरआरबी को 2.40 करोड़ से भी अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। उपर्युक्त रिक्तियों के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) को कोविड-19 महामारी और इस वजह से पूरे देश में लागू किए गए लॉकडाउन के कारण स्थगित करना पड़ गया था।
आवेदनों की जांच (स्‍क्रूटनी) पूरी हो गई थी, लेकिन कोविड के मद्देनजर लगाई गई पाबंदियों के कारण परीक्षा से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में देरी हो गई थी।
रेलवे के आरआरबी सभी अधिसूचित रिक्तियों हेतु ‘सीबीटी’ आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और वे महामारी से जुड़ी जमीनी स्थिति का सक्रिय रूप से आकलन करते रहे हैं। अब चूंकि आईआईटी के लिए जेईई और नीट आयोजित करने का अनुभव है, इसलिए ऐसे में यह महसूस किया गया कि रेलवे भी परीक्षा प्रक्रिया शुरू कर सकती है, जिसे कोविड महामारी के कारण रोकना पड़ा था।
इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजित करने के लिए मानक परिचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार की जा रही हैं। विभिन्न केंद्रीय और राज्य प्राधिकरणों द्वारा निर्दिष्‍ट किए गए सामाजिक दूरी मानकों और अन्य प्रोटोकॉल का पालन अवश्‍य किया जाना चाहिए, जो अभ्‍यर्थियों के हित में आवश्यक हैं।
रेलवे ने अब 15 दिसंबर, 2020 से प्रथम चरण के कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन टेस्‍ट शुरू करने का प्रस्ताव किया है और इस संबंध में आवश्यक उपाय शुरू कर दिए गए हैं।  
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