Monday, March 25, 2013

रूस में शिक्षा: विदेशी अभ्यार्थियों के लिए जानकारी


रूस में उच्च शिक्षा पाने में बहुत से लाभ
        © Collage: «The Voice of Russia»
विदेशी छात्रों के लिए रूस में उच्च शिक्षा पाने में बहुत से लाभ हैं| सबसे पहला लाभ तो यह है कि भावी छात्रों को प्रवेश परीक्षा के मानसिक तनाव भरे कठिन दौर से नहीं गुज़रना पड़ता| उन्हें बस माध्यमिक अथवा विशेष माध्यमिक शिक्षा का अपना प्रमाण-पत्र और अंक-सूची भेजनी होती है|
बहुत सी रूसी यूनिवर्सिटियों में निश्शुल्क शिक्षा पाई जा सकती है| लेकिन अगर फ़ीस भरनी भी पड़े तो वह यूरोपीय देशों या अमरीका से कहीं कम है| रूसी शिक्षा मंत्रालय की साइट: http://en.russia.edu.ru/ पर रूस में शिक्षा पाने के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध है| इसके अलावा http://www.edurussia.in/ पर भी बहुत सी जानकारी मिल सकती है|
रूस में अनेक लब्धप्रतिष्ठ विश्वविद्यालय हैं| भावी छात्र अपनी पसंद के मुताबिक़ शिक्षा प्रतिष्ठान चुन सकें इसके लिए हम यहां कुछ सबसे मशहूर शिक्षा केन्द्रों के बारे में बता रहे हैं|
· रूसी जन-मैत्री विश्वविद्यालय (मास्को)
इस शैक्षिक-वैज्ञानिक समुच्चय में दस प्रमुख फैकल्टियां हैं: कृषि, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान, मेडिकल, इंजीनियरिंग, रूसी भाषा एवं सामान्य विषय, भौतिकी-गणित तथा नैसर्गिक विज्ञान, भाषाविज्ञान, पर्यावरण-विज्ञान, अर्थशास्त्र और कानून| इसके अलावा स्नातकोत्तर शिक्षा पा चुके लोगों के लिए अर्थव्यवस्था की तीन शाखाओं से जुड़ी तीन उच्चतर प्रशिक्षण संकाय हैं, तीन इंटर-फैकल्टी डिपार्टमेंट हैं, सात संस्थान तथा 33 वैज्ञानिक-शिक्षा केन्द्र, 150 से अधिक प्रयोगशालाएं और शिक्षा एवं शोध केन्द्र हैं| इस विश्विद्यालय में वे सभी फैकल्टियां हैं जो एक आधुनिक विश्वविद्यालय में होनी चाहिए| अतः यहां उच्च कोटि की आधुनिक शिक्षा पाई जा सकती है जो संसार के हर कोने में रोज़गार के अच्छे अवसर प्रदान कराती है| जन-मैत्री विश्वविद्यालय में स्नातक (बैचलर) और स्नातकोत्तर (मास्टर) डिग्रियां पाई जा सकती हैं| यूनिवर्सिटी में “तैयारी संकाय” (प्रेपरेटरी फैकल्टी) भी है, जहाँ विदेशी छात्र एक साल रूसी भाषा सिखाते हैं और अपनी भावी विशेषज्ञता के विषयों के आरंभिक पाठ रूसी में पाते हैं|
रूस के सोची, याकूत्स्क, येस्सेनतुकी, बेल्गोरोद, स्ताव्रोपोल और पेर्म शहरों में इस विश्विद्यालय की शाखाएं हैं|
यहां फैकल्टी के अनुसार फ़ीस तीन से सात हज़ार डालर प्रति वर्ष तक है| इसके बारे में अधिक सही सूचना यूनिवर्सिटी की साइट पर मिल सकती है:http://www.rudn.ru/en/
· मास्को लोमोनोसोव राजकीय विश्वविद्यालय
यह रूस की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी है| इसके अंतर्गत 15 वैज्ञानिक- –अनुसंधान संस्थान, 40 फैकल्टियां, 300 से अधिक विभाग हैं| इसकी अपनी 6 शाखाएं भी हैं, जिनमें से पांच सी.आई.एस. देशों में हैं|
मास्को विश्विद्यालय में ऐसे कोर्स हैं जिनमें अभ्यार्थियों को प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयारी करवाई जाती है| इनमें निश्शुल्क और सशुल्क – दोनों तरह की शिक्षा का प्रावधान है| कोर्स की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि भावी छात्र किन विषयों की शिक्षा पाना चाहता है| इन कोर्सों की पढ़ाई पूरी हो जाने पर परीक्षाएं होती हैं जिनके परिणामों को प्रवेश परीक्षा के परिणाम ही माना जाता है|
इस विश्वविद्यालय में फ़ीस हर साल तय की जाती है| यूनिवर्सिटी की साईट पर सविस्तार जानकारी पाई जा सकती है : http://www.msu.ru/en/
· राजकीय वैज्ञानिक अनुसंधान विश्वविद्यालय – उच्चतर आर्थिक विद्यालय (मास्को)
जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, इस यूनिवर्सिटी में सामाजिक-आर्थिक और मानविकी विषयों का तथा गणित और सूचना विज्ञान का अध्ययन एवं अनुसंधान होता है| इसके अंतर्गत बीस से अधिक संकाय एवं विभाग हैं| मास्को, सेंट पीटर्सबर्ग, नीझ्नी नोवगोरोद तथा पेर्म नगरों में इस यूनिवर्सिटी के कैम्पस हैं|
इसके छात्र अपनी यूनिवर्सिटी के साथ-साथ श्रेष्ठ यूरोपीय विश्वविद्यालयों की डिग्री भी पा सकते हैं| इसने 130 से अधिक विदेशी शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्रों तथा अंतर्राष्ट्रीय बिज़नस-संगठनों के साथ “पार्टनर संबंध” बना रखे हैं|
इसकी कुछ फैकल्टियां अंग्रेजी भाषा में शिक्षा देती हैं| अधिक विस्तृत जानकारी यूनिवर्सिटी की साइट पर पाई जा सकती है: http://www.hse.ru/en/
· मास्को भौतिकी-तकनीकी संस्थान (राजकीय विश्वविद्यालय)
तकनीकी दिशा का यह विश्विद्यालय रूस के 29 राष्ट्रीय अनुसंधानात्मक विश्विद्यालयों में से एक है| यहां व्यावहारिक और सैद्धांतिक भौतिकी तथा आप्रयुक्त गणित की नवीनतम दिशाओं में काम कर सकने वाले वैज्ञानिक और इंजीनियर प्रशिक्षित किए जाते हैं| यहां की कुछ खास स्पेशलिटी हैं: “सिस्टम ऐनालिसिस एंड मैनेजमेंट”, “इन्फोर्मेशन साइंस एंड कंप्यूटर टेकनीक” “कंप्यूटर सिक्योरिटी” “एप्लाइड मैथ एंड इन्फोर्मेशन साइंस” |
यहाँ शिक्षा पाने वालों ने नोबल पुरस्कार जीते हैं, कुछ रूसी विज्ञान अकादमी के उपाध्यक्ष बने हैं, 100 से अधिक अकादमीशियन और अकादमी के सह-सदस्य हैं, अंतरिक्ष नाविक हैं और रूस के मंत्री भी|
इस इंस्टीट्यूट की साइट है: http://phystech.edu/
· मास्को राजकीय अंतर्राष्ट्रीय संबंध संस्थान (यूनिवर्सिटी)
यह भी रूस के एक पुराना शिक्षा प्रतिष्ठान है| यहां 12 शैक्षिक पाठ्यक्रमों के अंतर्गत छात्रों को शिक्षित किया जाता है| इनमें से कुछ हैं: अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, क्षेत्रविद्या, अंतर्राष्ट्रीय विधि (कानून), राजनीतिशास्त्र, राज्य-संचालन, पत्रकारिता तथा जन-संपर्क| कानून की पढ़ाई के मामले में यह देश के पहले तीन शिक्षा संस्थानों में गिना जाता है| इस विश्वविद्यालय में छह इंस्टीट्यूट और आठ फैकल्टियां शामिल हैं| इसका संस्थापक रूस का विदेश मंत्रालय है| इसकी साईट है: http://www.mgimo.ru/eng/

Tuesday, March 19, 2013

अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन

19-मार्च-2013 17:57 IST
उद्घाटन करेंगे 21 मार्च को राष्‍ट्रपति 
भारत में विश्‍वविद्यालयों के भविष्‍य पर चर्चा की जाएगी
राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी आगामी 21 मार्च को ‘भारत में विश्‍वविद्यालयों के भविष्‍य : ज्ञान आधारित समाज के लिए उच्‍च शिक्षा क्षेत्र में सुधार के तुलनात्‍मक दृष्टिकोण’ पर अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन ओपी जिंदल ग्‍लोवल यूनिवर्सिटी सोनीपत में करेंगे।

तीन दिन के इस सम्‍मेलन में देश तथा विदेशों के प्रमुख विश्‍वविद्यालयों के कुलपति, प्रमुख और डीन भाग लेंगे। सम्‍मेलन का मुख्‍य उद्देश्‍य दुनियाभर के विश्‍वविद्यालयों की रैंकिंग के संदर्भ में भारतीय विश्‍वविद्यालयों की स्थिति पर व्‍यापक विचार-विमर्श करना है। सम्‍मेलन में विश्‍वविद्यालयों की जिम्‍मेदारियों, प्रबंधन, सार्वजनिक नीति, नीतिगत प्रभाव के लिए ज्ञान का आदान-प्रदान, उच्‍च शिक्षा में उत्‍कृष्‍टता को बढ़ावा देने और विश्‍वविद्यालयों में नेतृत्‍व जैसे अहम मसलों पर भी चर्चा की जाएगी।

वि. कासोटिया/गांधी/दयाशंकर – 1466

दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय को बधाई दी

19-मार्च-2013 20:14 IST
राष्‍ट्रपति ने दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के 90वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया, 
देश को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने के लिए उच्‍च शिक्षा स्‍तर के लिए अनवरत प्रयास आवश्‍यक बताया
राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज (19 मार्च 2013 को) दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के 90वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में भाग लिया और मेधावी छात्रों को मेडल प्रदान किए। इस अवसर पर
राष्‍ट्रपति ने कहा अगर देश को उच्‍च विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है तो इसके लिए शिक्षा के उच्‍च स्‍तर हासिल करने के अनवरत प्रयास जरूरी हैं। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा को और अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए हमारा प्रयास अधिक जनसंख्‍या तक पहुंचना खास तौर पर इसे देश के दूरदराज तक पहुंचाना अनिवार्य है। राष्‍ट्रपति महोदय ने कहा कि अब समय आ गया है कि बेहतर तरीके से ज्ञान हासिल कराने की दिशा में विशिष्‍ट प्रौद्योगिकी और उन्‍नत शैली लागू की जाए। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि अगर हमें शिक्षण संस्‍थानों द्वारा दी जा रही शिक्षा के तरीके को पुनर्भाषित करने को कहा जाए तो वास्‍तव में अभी ही इसका समय है। हमें अपने विश्‍वविद्यालयों को वैश्विक नेतृत्‍व प्रदान करने वाला बनाना होगा और इसके लिए अन्‍य देशों में प्रचलित प्रथाओं का सावधानी से अध्‍ययन कर अपनी स्थितियों के अनुकूल उनमें आवश्‍यक परिवर्तन के साथ अपनाना होगा। 

राष्‍ट्रपति ने लाभप्रद गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में एक और वर्ष की सफलता के लिए दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय को बधाई दी। 
***
वि.कासोटिया/अजित/मनोज-1471

Thursday, February 14, 2013

गुलाम नबी आजाद थे इस समारोह के मुख्‍य अतिथि

14-फरवरी-2013 18:20 IST
राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और न्‍यूरो विज्ञान संस्‍थान बेंगलुरू का 17वां दीक्षांत समारोह 
पहल से सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मदद मिली
राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और न्‍यूरो विज्ञान संस्‍थान का 17 वां दीक्षांत समारोह आज बेंगलुरू में हुआ। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद इस समारोह के मुख्‍य अतिथि थे। 

श्री आजाद ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और न्‍यूरो विज्ञान संस्‍थान, सम विश्‍वविद्यालय, को संसद के अधिनियम के तहत राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍थान के रूप में स्‍थापित किया गया है। 14 फरवरी, 1974 को अस्तित्‍व में आने के बाद निमहान्‍स भारत में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और न्‍यूरो विज्ञान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। निमहान्‍स ने पिछले वर्षों में अनेक पहल की हैं जिनका स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर बहुत अच्‍छा प्रभाव पड़ा। 

उन्‍होंने कहा कि शुरूआती दौर में ही मधुमेह, उच्‍च रक्‍तचाप और कैंसर का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर जांच और मंत्रालय द्वारा मां और नवजात शिशु के लिए की गई पहल से सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मदद मिली है। भारत अब बीमारियों के फैलने और महामारियों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है। चिकित्‍सा शिक्षा में विभिन्‍न स्‍तरों मानव संसाधनों की वृद्धि के लिए सुधारों की श्रृंखला शुरू की गई है। एमबीबीएस सीटों की संख्‍या 33,567 से बढ़कर 45,629 हो गई है। पीजी सीटों की संख्‍या 13,838 से बढ़कर 22,850 हो गर्इ है। छह नए एम्‍स सहित 72 नए मेडिकल कालेजो की स्‍थापना की गई है जिससे इनकी संख्‍या 290 से 362 हो गई है। नए एम्‍स के मेडिकल कॉलजों में सितंबर 2012 में 50-50 छात्रों ने प्रवेश लिया है। भारत सरकार ने प्रधानमंत्री स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा योजना के तहत 19 राज्‍य सरकारों के मेडिकल कालेजों को उन्‍नयन के लिए ले लिया है। इससे बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं लोगों को मिलेंगी। 

श्री आजाद ने कहा कि 6 फरवरी, 2013 को बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य की जांच के लिए महाराष्‍ट्र के ठाणे जिले में राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्‍होंने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा गई 2011 को गठित मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य समूह ने देश के लिए मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य नीति तैयार करने की दिशा में काफी प्रगति की है। राष्‍ट्रीय और क्षेत्रीय स्‍तर पर सलाह मशविरे के बाद इसे संसद में पेश करने के लिए तैयार किया जा रहा है। (PIB)
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वि.कासोटिया/राजेंद्र/पवन-584

Monday, February 11, 2013

जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा

11-फरवरी-2013 13:19 IST
कक्षा 6 में दाख़िले के लिए में 16 लाख छात्रों ने भाग लिया 
कक्षा 6 में दाख़िले के‍ लिए जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा 10 फरवरी, 2013 को आयोजित की गई। नवोदय विद्यालय समिति ने राज्‍य सरकारों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर इस परीक्षा को ठीक और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने के लिए सभी आवश्‍यक प्रबंध किये थे। विभिन्‍न जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 6 में दाख़िले के लिए आवेदन करने वाले सभी छात्रों को प्रवेश पत्र जारी किये गए थे तथा कार्यक्रम के अनुसार उन्‍हें संबंधित परीक्षा केन्‍द्रों पर परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया था। पूरे देश में बनाए गए 4000 परीक्षा केन्‍द्रों में लगभग 16 लाख छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया। (PIB)***
मीणा/इन्‍द्रपाल/शौकत-518

Wednesday, February 6, 2013

केंद्रीय विद्यालय संगठन:स्वर्ण जयंती समारोह का शुभारंभ

06-फरवरी-2013 16:36 IST
प्रधानमन्त्री डा मनमोहन सिंह ने किया उद्धघाटन सत्र  को सम्बोधित 
केंद्रीय विद्यालय संगठन का स्वर्ण जयंती समारोह प्रधानमंत्री का अभिभाषण 
इस शुभ अवसर पर केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा एम एम पलामू राजू ने प्रधानमन्त्री को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। इस यादगारी मौके पर इसी मन्त्रालय के राज्य मंत्री जीतीं प्रसाद और डा  थरूर भी मौजूद थे। (फोटो:पीआईबी)
डा. मनमोहन सिंह ने केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन सत्र में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संगठन के शिक्षकों और छात्रों को शुभकामनाएं और बधाई दीं। 

केंद्रीय विद्यालय संगठन की 1963 में अपनी स्थापना के समय 20 रेजीमेंटल विद्यालयों के साथ व्याख्यात इस समय यह देश भर में फैले लगभग 1100 केंद्रीय विद्यालयों का प्रशासन संभालता है। यह लगभग 11 लाख बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है और इसके शिक्षकों सहित 46,000 से अधिक कर्मचारी हैं। यह संगठन केंद्र सरकार के स्थानांतरणीय केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के अपने दायित्व को विशिष्टता से साथ निभा रहा है। 50 वर्ष की इसकी यात्रा वास्तव में अत्याधिक सफल रही है। मैं उन सभी को बधाई देता हूं जिन्होंने केंद्रीय विद्यालय संगठन को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रियाओं में इतना अधिक योगदान करने में सक्षम बनाया है। 

केंद्रीय विद्यालय संगठन में जुड़े सभी लोगों के यह बहुत ही प्रसन्नता की बात है कि देश के विभिन्न भागों में अतिरिक्त केंद्रीय विद्यालयों को खोलने की जोरदार मांग है और मौजूदा विद्यालयों में दाखिला की प्रक्रिया में भी अत्यधिक प्रतिस्पर्धा है। यह केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा स्थापित शिक्षा के उच्च मानक का भी संकेत है। मैं समझता हूं कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों ने लगातार बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है। यही नहीं, इन विद्यालयों ने अपने छात्रों की पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भाग लेने पर जोर देकर उनके व्यक्तित्व विकास की आवश्यकता के प्रति की सजगता दिखाई है। 

मुझे इस बात की खास खुशी है कि केंद्रीय विद्यालयों में छात्राओं का अनुपात 43 प्रतिशत है और संगठन के शिक्षकों में महिलाओं का बहुमत है। 

केंद्रीय विद्यालयों की एक बड़ी संख्या इस समय रक्षा और अर्ध-सैनिक संस्थानों के परिसरों में स्थित है। इससे रक्षा और अर्ध-सैनिक बलों के कर्मचारियों, जिनकी जोखिम भरी ड्यूटियां उन्हें अपने परिवारों के साथ अक्सर कम समय बिकाने का मौका देती हैं, केन्द्रीय विद्यालय बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता प्राप्त करते है। 

हमारी सरकार ने सदा इस बात को स्वीकारा है कि भारत एक आधुनिक, प्रगतिशील और समृद्ध देश के रूप में तभी उभर सकता है जब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक हमारे नागरिकों की आसान पहुंच होगी। हम जानते हैं कि हमारा देश एक युवा देश है और एक शिक्षित एवं कुशल कार्यबल के होने पर ही हम जनांकिक लाभांश प्राप्त कर सकते हैं जो हमारी अर्थव्यवस्था को विस्तार करने और अधिक उत्पादक बनने में सहायक होगी। 

हमारी सरकार के 2004 में सत्ता में आने के समय से ही हमने शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। हमने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण स्तर पर निवेश बढ़ाया है। हमने शिक्षा के प्रति पहुंच का तेजी से विस्तार किया है। हमने शिक्षण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए भी काम किया है ताकि शिक्षा के बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सके। हमने यह सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया है कि हमारे समाज के कमजोर वर्गों और देश के कम विकसित क्षेत्रों के छात्रों को भी शिक्षा संबंधी पर्याप्त अवसर प्राप्त हों। 

आज हमारे देश में प्राथमिक शिक्षा की पहुंच लगभग सार्वभौमिक है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम सुनिश्चित करता है कि हमारे देश के प्रत्येक बच्चे को प्राथमिक शिक्षा के 8 वर्ष का अधिकार प्राप्त हो। मध्याह्न भोजन की योजना, जो हर रोज 11 करोड़ बच्चों को स्कूलों में गर्म भोजन उपलब्ध कराती है, ने बच्चों के स्कूलों में बने रहने में उल्लेखनीय सहायता की है। लेकिन शिक्षकों और शिक्षण का मानक उचित स्तर का नहीं है जिसके कारण परिणाम हमारी अपेक्षा से बहुत नीचे है। स्कूलों में प्राथमिक स्तर के बाद बच्चों का बीच में पढ़ाई छोड़ जाने वालों की संख्या अधिक बनी हुई है। निष्पक्षता से संबंधी कुछ बड़ी समस्याएं भी हल करना अभी शेष है। 

12वीं पंचवर्षीय योजना में इन चुनौतियों का समाधान करने में केन्द्रीय विद्यालय अन्य स्कूलों के लिए मानक और बेंचमार्क तय करने में बड़े पैमाने पर सहायक हो सकते हैं। यह केन्द्रीय विद्यालों के लिए 12वीं योजना में निर्धारित लक्ष्यों में से एक है। उन्हें अपने पड़ोस के विद्यालयों के साथ सर्वोत्तम युक्तियों को बांटने में रोल-मॉडल के रूप में कार्य करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन से आग्रह किया कि वह इन अपेक्षाओं को कारगर रूप में पूरा करने के उपायों का पता लगाए। 

मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन ने हमारे आसपास तेजी से बदलती हुई यर्थात स्थिति के साथ गति बनाये रखने के लिए कई नये कदम उठाये हैं इन में शिक्षा प्रदान करने, शिक्षकों और छात्रों के लिए विदेशों के साथ आदान-प्रदान कार्यक्रम चलाने और विदेशी भाषाओं के शिक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग शामिल हैं। यह सभी सराहनीय कदम हैं जिनसे केन्द्रीय विद्यालयों को अपना स्तर सुधारने में सहायता मिलेगी। लेकिन केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त करने में अभी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। मैं आशा करता हूं कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन, खासकर आधुनिक तकनीकों और प्रौद्योगिकी के प्रयोग में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन करेगा। 

अंत में मैं केन्द्रीय विद्यालय संगठन परिवार के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। मुझे विश्वास है कि आप अपने विशिष्ट रिकार्ड को इस स्वर्ण जंयती समारोह के माध्यम से और बेहतर बनाने पर विचार करेंगे। (PIB)
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वि.कासोटिया/क्वात्रा/अर्जुन/मीना–455