Tuesday, December 17, 2019

MTSM कालेज की छात्राओं ने चमकाया जूडो में भी नाम

Tuesday : Dec 17, 2019: 3:37 PM
माता गंगा खालसा कालेज मंजी साहिब कोटां में हुई थी प्रतियोगिता 
लुधियाना: 17 दिसंबर 2019: (शिक्षा स्क्रीन ब्यूरो)::
   लुधियाना के पुराने और जानेमाने कालेजों में से एक है मास्टर  कालेज। शिक्षा के साथ साथ संगीत, साहित्य  और खेलों में भी  छात्राएं अग्रणी रहती हैं। इस बार इस कालेज की छात्राओं ने नाम कमाया है वेट लिफ्टिंग और जूडो की प्रतियोगिताओं में। यह प्रतियोगिताएं हुईं थीं माता गंगा खालसा कालेज, मंजी साहिब, कोटां में।  
    इन प्रतियोगिताओं में राखी और मोनिका ने जहां 63 किलोग्राम और 69 किलोग्राम के वर्ग में गोल्ड मैडल जीते वहीँ सोनिया ने 90 किलोग्राम के वर्ग में चांदी का मैडल जीता। इसी तरह रमनप्रीत कौर ने 75 किलोग्राम के वर्ग में कांसे का मैडल जीत कर कालेज और अपने परिवार का नाम कमाया। गंगा और सिमरन ने रनरअप ट्राफी जीती और 48 किलोग्राम और 53 किलोग्राम के वर्ग में चौथा स्थान प्राप्त किया। 
    पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की तरफ से आयोजित जूडो मुकाबलों में राजन ने कांसे का तमगा जीत कर कालेज का नाम रौशन किया। 
    कालेज की प्रिंसिपल डाक्टर किरणदीप कौर, अध्यक्ष सरदार स्वर्ण सिंह और सचिव कंवलजीत सिंह ने फिज़िकल विभाग की मुख्य कवलजीत कौर कोच मिस रजनी (पंजाबी विभाग) के साथ साथ सभी विजेता छात्राओं को इन उपलब्धियों के लिए हार्दिक बधाई दी। 
यही खबर अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें    
MTSM girls won mant prizes in inter college competition   

Thursday, February 7, 2019

शिक्षा के अधिकार पे डाका; नहीं सहेंगे-नहीं सहेंगे

शिक्षा के बाजारीकरण पर विशेष सेमिनार 10 फरवरी को लुधियाना में 
Courtesy Image
लुधियाना: 7 फरवरी 2019: (कार्तिका सिंह//शिक्षा स्क्रीन):: आयोजन कर्ता: AISF
Courtesy Image
देश में सबसे बड़ी डकैती छात्र वर्ग के अधिकारों पर डाली जा रही है। सबसे बड़ी जालसाज़ी युवा वर्ग के साथ हो रही है। सबसे बड़ा धोखा देश के भविष्य के साथ किया जा रहा है। युवाओं और छात्र-छात्राओं से शिक्षा का अधिकार पूरी तरह से छीना जा रहा है। धीरे धीरे और बहुत ही ख़ामोशी के साथ देश का आधार ही खोखला किया जा रहा है। शिक्षा को चंद अमीरों की जागीर बनाया जा रहा है तांकि गरीब तो क्या मध्यम वर्ग का कोई बच्चा भी कल को देश के भविष्य निर्माण में सहभागी न बन सके। विकास के खोखले दावों के बीच युवा वर्ग को थमाया जा रहा है हर रोज़ बड़े से बड़े इंटरनेट पैक का लॉलीपॉप तांकि वे मोबाइल पर उलझे रहें और इसी नशे में वास्तविक शिक्षा से दूर हो जाएं।  
यह सूक्ष्म और साज़िशी चालें आज हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौतियाँ हैं। अगर शिक्षा का अधिकार ही छिन  गया तो बाकी कुछ छीनने के लिए किसी भी देश दुश्मन को कोई बड़ा प्रयास नहीं करना पड़ेगा। इस लिए इन साज़िशों को समझना आवश्यक है तांकि इन चुनौतियों का सामना सफलता से किया जा सके। 
अंधविश्वास से पंगु हो रहा समाज:Courtesy Pic
लगातार महंगी हो रही शिक्षा किसी डकैती से कम नहीं। सिलेबस में इतिहास को तोड़ मरोड़ कर दिखाया जाना किसी जालसाज़ी से काम नहीं। गुरुओं, पीरों, पैगंबरों और शहीद भगत सिंह जैसे वीरों के विचारों से दूर करना ही मुख्य मकसद है आज के इंटरनेट पैक्स का। किताबें महंगी हो रही हैं, फीसें महंगी हो रही हैं, स्कूल कालेज तक पहुंचने के किराये महंगे हो रहे हैं, खाने पीने का भोजन तक भी महंगा हो रहा  है लेकिन इंटरनेट सस्ता हो रहा है। इस सब कुछ को गहरायी से समझना आवश्यक है। 
अध्यापकों को मिड डे मील जैसे गैर शिक्षा के कामों में उलझाना और वेतन मांगने पर लाठी-गोली दिखाना भी इसी साज़िश का हिस्सा है। अगर हम नहीं समझे तो पूरा समाज खतरे में है। 
अगर आप को खुद से प्रेम है, अपने भविष्य से प्रेम है, अपने परिवार, समाज और देश से प्रेम है तो मौजूदा खतरों पर चर्चा करके कोई ठोस कदम उठाना ही होगा। इस का सुअवसर आपको मिल रहा है 10 फरवरी रविवार को। इन सभी आवश्यक बातों पर सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है अगस्त 1936  में बने छात्र संगठन आल इण्डिया स्टूडेंटस फेडरेशन अर्थात ए आई एस एफ की तरफ से। शिक्षा के इस सेमिनार का स्थान है लुधियाना के नए बस अडडे के नज़दीक बस्ती अब्दुल्ला/ इंद्रा नगर में स्थित शहीद करनैल सिंह ईसड़ू भवन में। 
अध्यापकों पर सख्ती भी इसी साजिश का हिस्सा है: देखिये बठिंडा में पुलिस एक्शन की तस्वीर:साभार: अमर उजाला  
आयोजनकर्ताओं में ए आई एस एफ के दीपक कुमार, सौरव यादव, राजीव और ललित कुमार भी शामिल हैं। बोलने का मौका आप सभी को मिलेगा। वक्ताओं में कुछ लोग अन्य स्थानों से भी सम्भव हैं। 
सेमिनार में उठने वाले मुद्दों में प्रमुख मुद्दा होगा शिक्षा के बाज़ारीकरण को बंद करने की मांग। सरकारी शिक्षा संस्थानों में आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करने की मांग। शिक्षा का सुअवसर हर किसी तक पहुँचाने  की मांग। शिक्षा में से अंध विश्वास की रोकथाम करके उसे शुद्ध वैज्ञानिक बनाने की मांग। शिक्षा की फीसें और किताबों की कीमतों को आम इंसान की पहुँच में लाने की मांग। 
अगर आप अध्यापक हैं तो भी आपका इस सेमिनार में स्वागत होगा और अगर आप छात्र हैं तो भी आपको अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। चुनाव नज़दीक है। सभी दलों को अपने इस मौलिक अधिकार की बात से खुल कर अवगत करवाओ। जिन जिन लोगों ने भी शिक्षा के इस अधिकार पर बुरी नज़र डाली है उनका लिहाज़ मत करो।  उन्हें बेनकाब करने में कोई कसर मत छोडो। यह अपने भविष्य को बचाने  की जंग है इसे लड़े बिना अब कोई गुज़ारा भी नहीं।  कभी जानेमाने शायर दुष्यंत कुमार ने अपनी एक काव्य रचना में व्यंग्य करते हुए कहा था:
भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ 
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुदद्आ।  
आज भी शिक्षा के अधिकारों की बात करने पर कुछ इसी तरह लटकनबाज़ी लगाई जाती है लेकिन हमें खुद दिल्ली चलने को तैयार रहना होगा। शिक्षा का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार है हम इसे नहीं छीनने नहीं देंगें। 

Monday, August 29, 2016

विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार


29-अगस्त-2016 10:26 IST
विशेष लेख                                                                             *डॉक्टर सुभाष सी खूंटिया
21वीं शताब्दी की वैश्विक अर्थव्यवस्था ऐसे वातावरण में उन्नति कर सकती है जो  रचनात्मकता एवं काल्पनिकता, विवेचनात्मक  सोच और समस्या के समाधान से संबंधित कौशल पर आधारित हो। अनुभवमूलक विश्लेषण शिक्षा और आर्थिक उन्नति के मध्य सुदृढ़ सकारात्मक संबंध होते है। भारत में स्कूल जाने वालो की आयु 6-18 वर्ष के मध्य की 30.5 करोड़ की (2011 की जनगणना के अनुसार) की विशाल जनसंख्या है, जो कुल जनसंख्या का 25% से अधिक है। यदि बच्चों को वास्तविक दुनिया का आत्मविश्वास से सामना करने की शिक्षा दी जाए तो भारत में इस जनसांख्यिकीय हिस्से की संपूर्ण सामर्थ्य का अपने लिये उपयोग करने की क्षमता है।
संधारणीय विकास लक्ष्य 2030 को अंगीकार करने के बाद ध्यान माध्यमिक शिक्षा के स्तर तक 'गुणवत्ता के साथ निष्पक्षता' पर स्थानांतरित हो गया है।
कुछ महीनों पहले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात  में अपने एक उद्बोधन में गुणवत्ता के महत्व पर इन शब्दों में ज़ोर दिया थाः "अब तक सरकार का ध्यान देश भर में शिक्षा के प्रसार पर था किंतु अब वक़्त आ गया है कि ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता पर दिया जाए। अब सरकार को स्कूलिंग की बजाय ज्ञान पर अधिक ध्यान देना चाहिए।"

मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी घोषणा की थी कि "देश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार सर्वोच्च प्राथमिकता होगा।" स्कूलिंग की बजाय ज्ञानार्जन पर ध्यान स्थानांतरित करने का अर्थ इनपुट से नतीजों पर ध्यान देना होगा।
राज्य सरकारों की साझेदारी के साथ केंद्र द्वारा प्रायोजित एवं भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) ने आरम्भिक शिक्षा को सर्वव्यापी बनाने में यथेष्ट सफलता पाई है। आज देश के 14.5 लाख प्राथमिक विद्यालयों में 19.67 करोड़ बच्चे दाखिल हैं। स्कूली शिक्षा को बीच में छोड़ कर जाने की दर में यथेष्ट कमी आई है, किंतु यह अब भी प्राथमिक स्तर पर 16% एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर 32% बनी हुई है, जिसमें उल्लेखनीय कमी करना आवश्यक है। एक सर्वेक्षण के अनुसार विद्यालयों से बाहर बच्चों की संख्या वर्ष 2005 में 135 लाख से घटकर वर्ष 2014 में 61 लाख हो गई, अंतिम बच्चे की भी विद्यालय में वापसी सुनिश्चित करने हेतु संपूर्ण प्रयास किये जाने चाहिए। 
जैसा कि स्पष्ट है कि भारत ने स्कूलिंग में निष्पक्षता एवं अभिगम्यता सुनिश्चित करने के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि एक औसत छात्र में ज्ञान का स्तर चिंता का विषय है। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (एनएएस) की पांचवी कक्षा के छात्रों की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक पढ़ पाने की समझ से जुड़े प्रश्नों के आधे से अधिक प्रश्नों के सही जवाब दे पाने वाले छात्रों का प्रतिशत केवल 36% था एवं इस संबंध में गणित एवं पर्यावरण अध्ययन का आंकड़ा क्रमशः 37% एवं 46% है।

विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर को सुधारने के लिये केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें नवीन व्यापक दृष्टिकोणों एवं रणनीतियों को बना रहे हैं।  कुछ विशेष कार्यक्षेत्रों की बात करें तो अध्यापकों, कक्षा कक्ष में अपनाई जाने वाली कार्यविधियों, छात्रों में ज्ञान के मूल्यांकन एवं निर्धारण, विद्यालयी अवसंरचना, विद्यालयी प्रभावशीलता एवं सामाजिक सहभागिता से संबंधित मुद्दों पर कार्य  किया जाना है।

क.     अध्यापक
जहां बच्चे विद्यालयी शिक्षा का केंद्र होते हैं, बच्चों में ज्ञानार्जन सुनिश्चित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एक अध्यापक की होती है। सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत के साथ ही आरम्भिक कक्षाओं में अध्यापकों के 19.48 लाख पदों का सृजन किया गया हैं; इन पदों के लिये अध्यापकों की नियुक्ति से छात्र-शिक्षक अनुपात में 42:1 से 24:1 का सुधार हुआ है। यद्पि अब भी ऐसे विद्यालय हैं जिनमें अध्यापक केवल एक  हो या उनकी संख्या अपर्याप्त हो। इसके लिये राज्य सरकारों को अध्यापकों के एक समान वितरण  के लिये नियोजन करने की आवश्यकता है एवं सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापकों के स्थान पर दक्ष अध्यापकों की नियुक्ति के लिये एक वार्षिक कार्यक्रम रखा जाना चाहिये।

वर्तमान में सरकारी विद्यालयों में नियमित अध्यापकों में से 85% व्यावसायिक रूप से योग्यता संपन्न हैं। 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सभी अध्यापकों के पास अपेक्षित योग्यता है। सरकार आगामी 2-3 वर्षो तक शेष 16 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के सभी अध्यापकों का पूर्णतया दक्ष होना सुनिश्चित करने के लिये तमाम कदम उठा रही है।

मंत्रालय द्वारा वर्ष 2013 में करवाए गए एक अध्ययन के परिणामों के अनुसार, अध्यापकों की औसत उपस्थिति लगभग 83% थी। इसको बढ़ोतरी कर 100% तक लाने की आवश्यकता है।

सर्व शिक्षा अभियान एवं राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान योजनाओं, दोनों में अध्यापकों के ज़रूरत आधारित व्यावसायिक विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन प्रयासों को पूरा करने के लिये ऑनलाइन कार्यक्रमों की योजना भी है। 

ज़रूरत है कि विद्यालयी तंत्र प्रतिभाशाली युवाओं को अध्यापन के क्षेत्र में लाए, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद ने चार वर्षीय समेकित बीए-बीएड एवं बीएससी-बीएड कार्यक्रमों की शुरुआत की है एवं श्रेष्ठ विद्यालयी तंत्र के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में ईमानदारी से रूचि रखने वालों का ध्यान आकर्षित करने के लिये इन कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है। 

ख.  कक्षा कक्ष में अपनाई जाने वाली कार्यविधियां
बच्चों में ज्ञान की समझ विकसित करने, कक्षा कक्ष प्रबंधन, प्रभावी छात्र शिक्षक संवाद, एवं निर्देशों की उत्तमता; संरचित अध्यापन एवं सीखने पर ज़ोर देने वाली गतिविधियों के दृष्टिकोण से इन कार्यविधियों का सर्वाधिक महत्व है। इसके लिये छात्रों एवं अध्यापकों की कक्षा कक्ष में नियमित उपस्थिति पूर्वप्रतिबंध है। आईसीटी समर्थित शिक्षण और अधिगम के संदर्भ में  सीखने की प्रक्रिया के परिणामों में स्पष्ट रूप से प्रत्येक कक्षा और प्रत्येक विषय के लिए संभावित शिक्षण परिणामों पर विशेष रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है ताकि यह शिक्षकों, विद्यालय प्रमुखों के द्वारा आसानी से समझा जा सके और इसे माता-पिता और समुदाय के बीच व्यापक रूप से प्रचारित किया जा सके।

समझ के साथ पठन के लिए अध्ययन के महत्व पर बल देने के एक प्रारूप के साथ वर्ष  2014 में सरकार के द्वारा शुभारंभ किए गए पढ़े भारत बढ़े भारत हेतु मजबूत बुनियाद की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। गणित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अध्ययन को रोचक और लोकप्रिय बनाने के क्रम में सरकार ने 2015 में राष्ट्रीय अविष्कार अभियान का शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से विद्यालयों के पास आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों से  परामर्शदाता के तौर पर अनुभव प्राप्त करने के अवसर होते हैं। हाल ही में प्रारंभ किए गये अटल अभिनव अभियान और अटल टिंकरिंग लैब से छात्रों के बीच महत्वपूर्ण विश्लेषण, सृजनात्मकता और समस्या को सुलझाने जैसी गतिविधियों को बल मिलेगा।

देश के सभी सरकारी माध्यमिक विद्यालयों को आईसीटी से लैस किया जा रहा है ताकि बच्चों को पढ़ाने में आईसीटी का लाभ लिया जा सके और उनमें सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी साक्षरता में भी सुधार किया जा सके। द नेशनल रिपोजिटरी ऑफ ओपन एजुकेशनल रिसोर्सिस (एनआरओईआर) और हाल ही में प्रारंभ किया गया ई-पाठशाला विद्यालय शिक्षा और शिक्षक शिक्षा के सभी स्तरों पर सभी डिजिटल और डिजिटल योग्य संसाधनों को एक साथ एक मंच पर ला रहा है।

ग.  मूल्यांकन और आकलन
एक छात्र की अध्ययन प्रगति का आकलन करना शिक्षक की प्राथमिक भूमिकाओं में से एक है। कक्षा में छात्रों के नियमित और निरंतर मूल्यांकन से अभिप्राय बच्चों और माता-पिता को प्रतिक्रिया देना, शिक्षक को प्रतिक्रिया और बच्चों के बीच अध्ययन समस्याओं के समाधान के लिए हल निकालना है। अध्ययन मूल्यांकन तंत्र पर आधारित एक शैक्षिक वातावरण वाली कक्षा में ये सुनिश्चित किया जा सकता है कि शिक्षक और छात्र दोनों ही सीखने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
हमें क्या मूल्यांकन करना है इसमें सुधार किया जा सकता है। छात्र अपने अध्ययन में कितनी प्रगति कर रहे हैं और इसके साथ-साथ शिक्षा के संपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के मामले में व्यवस्था का निष्पादन कैसा है इसके लिए मूल्यांकन पर आधारित कक्षा के साथ व्यापक स्तर पर उपलब्धि सर्वेक्षण को जानने की भी आवश्यकता होती है। सरकार ने एक प्रक्रिया की पहल की है जिसके अंतर्गत प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के माध्यम से बच्चों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें सरकारी विद्यालयों, सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालय और निजी विद्यालय शामिल होंगे। इस सर्वेक्षण का प्राथमिक प्रायोजन निर्धारित अध्ययन लक्ष्यों की तुलना में छात्रों के प्रदर्शन को समझने के लिए विद्यालयों को एक अवसर प्रदान करना है। परिणामों के आधार पर विद्यालय सीखने के स्तर में सुधार करने के लिए एक विद्यालय स्तर की योजना तैयार करेंगे। इस तरह के सर्वेक्षण से शिक्षण परिणामों को सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक परिवेश तैयार होगा। शिक्षकों और छात्रों की प्रतिक्रियाएं शीघ्रता से मिलेगी ताकि वे शिक्षण अंतरालों के समाधान के लिए समय से कार्रवाई कर सके, एक समयावधि के भीतर छात्रों के प्रदर्शन को समझ सकें और शैक्षिक व्यवस्था की स्थिति के बारे में पाठ्यक्रम निर्माताओं, शीषक प्रशिक्षण संस्थानों शैक्षिक प्रशासकों को एक व्यवस्थित प्रतिक्रिया प्रदान कर सकें। यह शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक है।  

घ.  विद्यालय प्रभावशीलता
विद्यालयों के प्रभावी ढंग से प्रदर्शन के लिए विद्यालय प्रमुख का सशक्तिकरण महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने राज्य सरकारों को प्रधानाचार्यों के लिए एक पृथक कैडर बनाने के लिए कदम उठाने की सलाह दी है। एक पूर्णकालिक प्रधानाचार्य के क्षमता निर्माण से इस व्यवस्था को एक लक्षित तरीके से किया जा सकता है। भविष्य के विद्यालयों में प्रमुखों को प्रशिक्षण देने के लिए एनयूईपीए पर राष्ट्रीय विद्यालय नेतृत्व केंद्र ने एक प्रशिक्षण पैकेज तैयार किया है, जिसे पूरे देश में वर्तमान में कार्यान्वित किया जा रहा है। राज्यों में भी नेतृत्व अकादमियों के गठन की योजना है जिससे उनके राज्यों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।
विद्यालयों का विभिन्न आयामों में निरंतर मूल्यांकन किये जाने की आवश्यकता है ताकि सुधार की आवश्यकता का समावेशन किया जा सके। गुजरात में गुणोत्सव, मध्यप्रदेश में प्रतिभा पर्व, राजस्थान में सम्बलन और ओडिशा में समीक्षा जैसी पहलें बेहतर उदाहरण है। एनयूईपीए द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर शाला सिद्दी नामक एक व्यापक विद्यालय मूल्यांकन प्रारूप को तैयार किया गया है और नवंबर 2016 में इसका शुभारंभ कर दिया गया है। यह आत्म-मूल्यांकन और तीसरे पक्ष के मूल्यांकन का एक घटक है। अपनी सुधार योजनाओँ को कार्यान्वित करने और उन्हें बनाने के लिए विद्यालयों के द्वारा आत्म-मूल्यांकन का उपयोग किया जाएगा।
छात्रों और शिक्षकों का समक्ष आधार डाटा बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इससे बच्चों के एक कक्षा से अगली कक्षा में जाने की प्रक्रिया पर निगरानी रखी जाएगी और इस प्रकार से स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान के लिए प्रणाली को सक्षम बनाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी पात्र बच्चे मध्याह्न भोजन, पाठ्य पुस्तकें और छात्रवृत्तियों को प्राप्त करने के साथ-साथ छात्र और शिक्षक की उपस्थिति की निगरानी भी की जाएगी।

च.  विद्यालय बुनियादी ढांचा
सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से विद्यालय बुनियादी ढांचे के प्रावधानों के तहत उल्लेखनीय प्रगति की गयी है। एसएसए के प्रारंभ होने के बाद से 2.23 लाख प्राथमिक और करीब 4 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए विद्यालय भवन तैयार किए गए हैं। प्रत्येक विद्यालय में छात्राओं और छात्रों के लिए एक पृथक कार्यात्मक शौचालय होने के प्रधानमंत्री के आह्वान पर राज्यों, संघशासित प्रदेशों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों और निजी संस्थानों ने सकारात्मक प्रक्रिया व्यक्त की है। स्वच्छ विद्यालय पहल के अंतर्गत 4.17 लाख शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। शौचालयों को स्वच्छ, कार्यात्मक और बेहतर बनाए रखने को सुनिश्चित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
आज हम विद्यालयों को मात्र इमारतों और कक्षाओं के रूप में ही नहीं देखते हैं, एक स्कूल में मूल शिक्षण स्थितियों के साथ-साथ इसमें बिजली की व्यवस्था, कार्यात्मक प्रयोगशाला और पाठन स्थल, विज्ञान प्रयोगशालाएं, कम्पयूटर प्रयोगशालाएं, शौचालय और मध्याह्न भोजन को पकाने के लिए एलपीजी कनेक्शन भी अवश्य होना चाहिए। सभी राज्यों और संघशासित प्रदेशों को सलाह दी जा चुकी है कि वह वर्तमान वर्ष में सभी माध्यमिक विद्यालयों में बिजली की व्यवस्था की सुनिश्चित करें जबकि शेष विद्यालयों को एक लघु अवधि की सीमा के भीतर शामिल किया जा सकता है।

छ.  सामुदायिक भागीदारी
एक  व्यापक और विविधता से भरे देश में निर्णय लेना और जवाबदेही का विकेन्द्रीकरण ही सफलता की कुंजी है। विद्यालय शिक्षा के मामले में समुदाय विद्यालय प्रबंधन समितियों के माध्यम से विद्यालय प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। अब तक इन समितियों को विद्यालय भवन के निर्माण जैसी गतिविधियों के प्रावधानों में शामिल किया जा चुका है। इससे आगे बढ़ते हुए विद्यालय समितियों को मजबूत किये जाने की आवश्यकता होगी ताकि वे बच्चों के शिक्षण के लिए विद्यालय की जवाबदेही पर भी अपना नियंत्रण कर सके। माता-पिताओं और एसएमसी सदस्यों को कक्षावार शिक्षण लक्ष्यों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता होगी। एसएमसी बैठक, सामाजिक अंकेक्षण अथवा विद्यालय शिक्षा पर ग्रामसभा बैठकों जैसे प्रयासों को भी विद्यार्थी के अध्ययन में जोड़ने और उनका मूल्यांकन करने की आवश्यकता होगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि माता-पिता और समुदाय के सदस्य आगे कदम बढ़ाते हुए अपने बच्चों के शिक्षण के लिए विद्यालयों की जवाबदेही पर नियंत्रण बना सकते हैं इसके लिए भाषा को आसानी से समझने के लिए शिक्षण लक्ष्यों को कक्षावार तैयार करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और विद्यालयों के साथ-साथ इसके व्यापक प्रचार-प्रसार को प्रदर्शित करने की भी योजना है।
राष्ट्र के लिए आजादी के 70वें वर्ष की पूर्ण संध्या पर इस संदेश के माध्यम से कि यह संकल्प लेना चाहिए कि हमें विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के सकारात्मक अभियान में स्वयं को प्रतिबद्ध करना चाहिए। इस अभियान में सरकार, नागरिक समाज संगठन, विशेषज्ञों, माता-पिता, समुदायिक सदस्यों और बच्चों सभी के प्रयासों की आवश्यकता होगी। यही समय है जब विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के इस मुद्दे पर एक टीम इंडिया का गठन किया गया है ताकि 21वीं सदी का आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए अगली पीढ़ी को सक्षम बनाने हेतु एक ठोस बुनियाद का निर्माण किया जा सके। (PIB)
*******
*लेखक भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली में सचिव (विद्यालय शिक्षा और साक्षरता) हैं।
एसएस/डीए – 45
पूरी सूची- 29.08.2016

Monday, October 6, 2014

मनुवादियों की मेरिट का इतिहास


October 1 at 8:24pm · 
आरक्षण के इतिहास की हकीकत 
आरक्षण को मेरिट के नाम पर चुनौती देने वाले ज़रा शिक्षा के इतिहास को पलट कर देख लें, पता चलेगा की भारत में उन्ही केलिए “थर्ड डिविज़न ” की शुरआत करनी पड़ी थी। श्री चन्द्रभान प्रसाद जी ने अपनी पुस्तक ‘ मेरिट, मंडल और आरक्षण’ में लिखते हैं की जब सन 1854 ब्रिटिश शासन ने भारत में मोर्डेन एडुकेशन की शुरआत की, तो फर्स्टऔर सेकेंड दो डिविज़न होती थी। न्यूनतम अंक 40% होते थे।  
जब 1857 में मद्रास में पहला डिग्री कालेज खुला तो उसमें पढ़ने के लिए पर्याप्त स्टूडेंट ही नहीं मिल रहे थे। जब कि पढाने के लिए ब्रिटेन से प्रोफेसर बुला लिए गये थे तब मद्रास के ब्राह्मणों ने ब्रिटश सरकार से गुहार लगाईं की इंटरमीडिएट पास करने के लिए “थर्ड डिविज़न ” शुरू कर दी जाए और पासिंग मार्क्स घटा कर 33% कर दिए जाएँ. ब्राह्मणों की बातमान ली गई और तब से ये सिस्टम चला आ रहा है। आरक्षण के विरुद्ध मेरिट के नाम पर बवाल मचाने वाले ब्राह्मणों के मेरिट का 75 साल पूर्व यह हॉल था। इसके उलट दलितों ने कभी ना तो फोर्थ डिविज़न जोड़ने की मांग की और ना ही पासिंग मार्क्स घटा कर33 से 27 प्रतिशत करने की अर्ज़ी दी।"
UnlikeUnlike ·  · 

Friday, September 5, 2014

शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री ने छात्रों से बातचीत की

05-सितम्बर-2014 20:46 IST
शिक्षा राष्ट्र के चरित्र निर्माण की ताकत बननी चाहिए 
माओवाद से लहूलुहान भूमि की लड़की का प्रश्न जागृत कर सकता है 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 05 सितम्बर, 2014 को नई दिल्ली के मानेकशॉ ऑडिटोरियम में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों बात करते हुए।(पसूका-हिंदी इकाई)
The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the children at the "Teachers' Day" function, at Manekshaw Auditorium, in New Delhi on September 05, 2014.
• छात्रों से बातचीत में प्रधानमंत्री ने कहा, बचपन का आनंद लें, अपने बालपन को मरने ना दें 
• हमें निश्चित तौर पर समाज में शिक्षकों का फिर से सम्मान करना होगा 
• क्‍या भारत अच्छे शिक्षकों को विदेश भेजने के बारे में नहीं सोच सकता? 
• बच्चे साफ-सफाई के माध्‍यम से और बिजली व पानी की बचत कर राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर सकते हैं 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 05 सितम्बर, 2014 को नई दिल्ली के मानेकशॉ
ऑडिटोरियम में शिक्षक दिवस के अवसर पर आय़ोजित कार्यक्रम को
सम्बोधित करते हुए। साथ में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री
श्रीमती स्मृति इरानी भी हैं। (पसूका-हिंदी इकाई)

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at
the "Teachers' Day" function, at Manekshaw Auditorium,
in New Delhi on September 05, 2014. The Union Minister for
Human Resource Development, Smt. Smriti Irani is also seen.
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की ताकत बनाने का आह्वान किया। 

शिक्षक दिवस पर पूरे देश के छात्रों के साथ अनूठे संवाद में प्रधानमंत्री ने कहा कि बदली हुई दुनिया में डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर शिक्षक दिवस की प्रासंगिकता की फिर से व्‍याख्‍या करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षक के महत्व को उभारने की बहुत जरूरत है और समाज में शिक्षकों के सम्मान को फिर से स्‍थापित करना होगा, तभी शिक्षक नई पीढ़ी को सांचे में ढाल सकेंगे। 
प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वभर में अच्छे शिक्षकों की बहुत मांग है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्‍होंने पूछा कि क्या भारत अच्छे शिक्षकों को विश्व भर में भेजने का सपना नहीं देख सकता? 
प्रधानमंत्री ने लड़कियों की शिक्षा की जरूरत को रेखांकित करते हुए अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण का जिक्र किया जिसमें उन्‍होंने एक साल के भीतर सभी स्‍कूलों में लड़कियों के लिए अलग से शौचालय बनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि लड़कियों के बीच में पढ़ाई छोड़ देने यानि ड्रॉप-आउट को कम करने के लिए सभी स्‍कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय बनाना जरूरी है। 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 05 सितम्बर, 2014 को नई दिल्ली के मानेकशॉ
ऑडिटोरियम में शिक्षक दिवस के अवसर पर आय़ोजित कार्यक्रम में स्कूली छात्रा
को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए। साथ में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री
श्रीमती स्मृति इरानी भी हैं।
(पसूका-हिंदी इकाई)

The Prime Minister, Shri Narendra Modi giving the memento
to a girl child, at the "Teachers' Day" function, at Manekshaw
Auditorium, in New Delhi on September 05, 2014.
The Union Minister for Human Resource
Development, Smt. Smriti Irani is also seen.
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़, दंतेवाड़ा की एक छात्रा के उस प्रश्न पर खुशी जाहिर की जिसमें दंतेवाड़ा में लड़कियों के लिए उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों की कमी और लड़कियों की शिक्षा की पहल से जुड़े प्रयासों को लेकर प्रश्‍न किया गया था। उन्होंने कहा कि बस्‍तर जैसे उस इलाके जहां की धरती माओवाद के कारण लहूलुहान हो चुकी है वहां की एक लड़की का यह प्रश्न देश को जागृत कर सकता है। 
छात्रों से बातचीत और उनके ढेर सारे सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने अपने हाल की जापान यात्रा का हवाला दिया और बताया कि कैसे वे वहां की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि जापान में शिक्षक और छात्र मिलकर स्कूल की सफाई करते हैं-यह उनके चरित्र निर्माण का हिस्सा है। प्रधानमंत्री ने पूछा कि क्या हम इसे अपने देश के चरित्र निर्माण का हिस्सा नहीं बना सकते। प्रधानमंत्री ने जापान की शिक्षा व्यवस्था में शामिल अनुशासन, प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक रूझान पर भी जोर दिया। 
गुजरात में अपने द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम “वांचे गुजरात” (गुजरात पढ़ो) की तरह देश भर में इस तरह का कार्यक्रम शुरू किए जाने के सवाल पर प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया का हवाला दिया और कहा कि उन्हें आशा है कि सभी लोग जुड़ पाने और ज्ञान तक पहुंच पाने की अपनी जरूरत पूरी कर सकेंगे। एक अन्य प्रश्न के जवाब में प्रधानमंत्री ने कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। 

प्रधानमंत्री ने देश के प्रतिष्ठित नागरिकों को सलाह दी कि वे अपने पास के स्कूल में सप्ताह में कम से कम एक पीरियड पढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने छोटे-छोटे कामों के जरिए जैसे कि सफाई रखकर और बिजली-पानी की बचत कर राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सकते हैं। 

वि.कासोटिया/अर्चना/एसएनटी/विजय-3552

शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री का सभी शिक्षकों को ई-मेल के जरिये संदेश

04-सितम्बर-2014 20:17 IST
“विश्व गुरु” का दर्जा दोबारा हासिल करने के लिए निश्चित तौर पर फिर से शिक्षकों का उत्‍कृष्‍ट सम्मान आवश्यक 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने दी हैं ‘शिक्षक दिवस’ पर देश के शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं 
सभी शिक्षकों को ई-मेल के जरिये भेजे संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा है, ‘’शिक्षण महज एक पेशा नहीं है, बल्कि यह मार्ग दर्शन और ज्ञान प्रदान करने का अनुपम दैविक दायित्व भी है।‘’ उन्‍होंने कहा, ‘शिक्षक समुदाय का सम्‍मान कर भारत ने एक समय विश्व गुरु होने का दर्जा हासिल किया था। यही दर्जा दोबारा पाने के लिए हमें एक बार फिर शिक्षकों को वैसा ही उत्‍कृष्‍ट सम्मान देना होगा ताकि भारत समस्त विश्व में ज्ञान का प्रकाशस्तम्भ बन सके।‘
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवर्तन के चक्र ने भारत को ‘सुराज’ की ओर अग्रसर कर दिया है। उन्‍होंने कहा, ‘आपकी प्रतिबद्धता और ईमानदारी से ही देश का भविष्‍य बेहतर आकार ले पाएगा! मैं बड़ी बेसब्री से यह चाहता हूं कि वह दिन आए, जब प्रत्‍येक छात्र अपने शिक्षकों पर और प्रत्‍येक शिक्षक अपने छात्रों पर गर्व महसूस करें।’ 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’अपने विद्यार्थियों के साथ साझा किये गये आपके अनुभव विद्यार्थियों के साथ आजीवन रहेंगे। आप समाज की आधारशिला रखने के साथ-साथ उसका निर्माण भी कर रहे हैं। यह बहुत महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी है, क्‍योंकि इसी पर यह निर्भर करता है कि हमारी वर्तमान और हमारी आने वाली पीढ़ी कैसे आगे बढ़ेगी।‘’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अक्‍सर ज्ञान की तुलना सूचना एकत्र करने और व्‍यवसाय तथा नौकरी के लिए कौशल दक्षता हासिल करने से की जाती है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’बेशक, वह महत्‍वपूर्ण है लेकिन यह भी जरूरी है कि आप अपने विद्यार्थियों की सोच को व्‍यापक बनाएं। उन्‍हें उत्‍साहित करें कि वे अपने देश, समाज तथा पर्यावरण संबंधी विषयों के बारे में व्‍यापक दृष्टि से सोचें। निश्चित तौर पर हमारा लक्ष्‍य अच्‍छे नागरिक बनाना होना चाहिए, जो अतीत को संजोकर रखने तथा बेहतर भविष्‍य का निर्माण करने में सक्षम हों।‘’ 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’बाल्यावस्था से ही अच्‍छी नागरिकता की शिक्षा देने से निश्चित तौर पर बेहतर समाज के निर्माण में मदद मिलेगी। यह यातायात नियम, साफ-सफाई, महिलाओं के प्रति संवेदना, गरीबों के प्रति चिंता और बड़ों के लिए आदर सिखाने जैसी बेहद सरल बातें हैं। मुझे आशा है कि इस शिक्षक दिवस पर इस दिशा में शुरुआत के लिए मैं आप पर भरोसा कर सकता हूं। आइये, हम सब अपने आपको इस अहम जिम्मेदारी एवं कर्तव्‍य के प्रति फिर से समर्पित करें।‘’ 

वसुधा गुप्‍ता/विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/अर्चना/रंजन/गांधी/निर्मल- हिन्‍दी इकाई-3525

Tuesday, September 2, 2014

उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने की 89वें आधार पाठ्यक्रम की शुरूआत

02-सितम्बर-2014 17:53 IST
शुरूआत मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री भारतीय प्रशासनिक अकादमी में   
उपराष्‍ट्रपति श्री मोहम्‍मद हामिद अंसारी को 02 सितंबर, 2014 को उत्‍तराखंड के मसूरी स्थित लालबहादुर शास्‍त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्‍ट्रेशन के 89वें फाउंडेशन कोर्स के मौके पर स्‍मृति चिन्‍ह भेंट किया गया। (फोटो आईडी:56309, पसूका-हिंदी इकाई)
The Vice President, Shri Mohd. Hamid Ansari being presented a memento at the 89th Foundation Course at the Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration, in Mussoori, Uttarakhand on September 02, 2014. The Governor of Uttarakhand, Dr. Aziz Qureshi is also seen.
उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने आज मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री भारतीय प्रशासनिक अकादमी के 89वे आधार पाठ्यक्रम की शुरूआत की । इस अवसर पर उन्होंने जून 1961 के उस पहले दिन को याद किया जब वो पहली बार उत्सुकता, उम्मीद और नए विचारों के साथ यहां आए थे। उन्होंनें अकादमी में बिताए समय के साथ साथ अपने उन साथियों को भी याद किया जो अब उनके साथ नहीं हैं। सिविल सेवा में करियर शुरू कर रहे युवाओं से मिलकर उपराष्ट्रपति खासे उत्साहित थे। उन्होंने कहा "वो बदलाव के इस रोमांचक दौर में ये कर रहे हैं, जब दुनिया बदल रही है, भारत बदल रहा है और काम और चुनौतियां भी बदल रही हैं। उनके पास भविष्य को आकार देने का मौका है।"
उपराष्‍ट्रपति श्री मोहम्‍मद हामिद अंसारी 02 सितंबर, 2014 को उत्‍तराखंड के मसूरी स्थित लालबहादुर शास्‍त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्‍ट्रेशन के 89वें फाउंडेशन कोर्स के मौके पर उद्घाटन भाषण देते हुए। (पसूका-हिंदी इकाई)
The Vice President, Shri Mohd. Hamid Ansari delivering inaugural address at the 89th Foundation Course at the Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration, in Mussoori, Uttarakhand on September 02, 2014.
उन्होंने पाठ्यक्रम में शामिल होने जा रहे प्रशिक्षुओं का उत्साहवर्धन किया। उपराष्ट्रपति ने कहा "आपका सफर अभी शुरू ही हुआ है और एक लंबा सफर तय करना है। केवल निष्पक्ष सेवा के प्रति आपकी कड़ी मेहनत, ईमानदारी और उत्कृष्टता की अंतहीन तलाश से ही आपको कामयाबी हासिल हो सकती है।"
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्र निर्माण सामाजिक बदलाव में भागीदर बनने के लिए सिविल सेवा को सबसे बेहतर करियर विकल्प बताया। उन्होंने प्रशिक्षुओं को उनके अधिकारों के साथ-साथ उनकी जिम्मेदारियों का भी अहसास कराया ।
उन्होंने सरकार को जनहित का प्रबंधक बताते हुए कहा कि यह जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर अपनी प्रथमिकताओं का निर्धारण करती है और उनके आधार पर अपनी नीतियां और योजनाएं बनाती है, जिससे कि लोगों के जीवन स्तर में लगातार सुधार होता रहे। सरकार और सिविल सेवा प्रथमिक्ताओं और कार्यक्रमों को लोगों की जरूरतों और अपेक्षाओं के अनुरूप बदलाव करती है। उन्होंने सिविल सेवा को लोगों को सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति का प्रधान वाहक करार दिया ।
उन्होंने कहा कि "जनसेवकों से ये उम्मीद की जाती है कि वो निर्वाचित सरकार के निर्देशों का निष्ठापूर्वक पालन करें। साथ ही, उन्हें ये भी सुनिश्चित करना होता है कि राजनीतिक कार्यप्रणाली से हमारे लोकतंत्र के मूल कानून का उल्लंघन नहीं हो।"

उपराष्ट्रपति श्री अंसारी ने कहा कि आजादी के बाद के दशकों में जो विकास हुआ उसका लाभ आम लोगों तक समान रुप से नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि भुखमरी, कुपोषण, गरीबी और बेरोजगारी आज भी हकीकत हैं। उन्होंने इसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति, स्वच्छता, परिवहन और संचार के साधनों की कमी को जिम्मेदार बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लिंगभेद और उससे जुड़ी कुरीतियां आज भी हमारे समाज में प्रचलित हैं।

उन्होंने कहा कि आज भी भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि गरीबी मिटाने के लिए जनसेवकों और सरकारों ने कुछ नहीं किया है। योजनाओं के अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होने के लिए उन्होंने भ्रष्टाचार को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि जनता आज प्रभावी, पारदर्शी, ईमानदार और जिम्मेदार प्रशासन के लिए आतुर है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सरकारों और उसके अधिकारियों की आलोचना काफी बढ़ गई है। सार्वजनिक जीवन जीने वालों को इसका सामना ईमानदारी और दृढ़ता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजना की कामयाबी इसी में है कि उसे किस तरह से लागू किया जाता है। कार्यक्रम में मौजूद प्रशिक्षुओं को उपराष्ट्रपति ने योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के गुर सीखने पर ध्यान देने की नसीहत दी।

उपराष्ट्रपति ने कहा "जनसेवक के रुप में आप महान कार्य को करने के लिए मूलभूत उपकरण हैं।" उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षुओं को किसी एक खास समूह के हितों की पूर्ति का साधन बनने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कभी किसी दबाव में नहीं आएं।

उपराष्ट्रपति ने गांधीजी की नसीहत को दोहराते हुए कहा कि "अपनी तलाश का सबसे अच्छा तरीका खुद को दूसरों की सेवा में समर्पित करना है।"

उपराष्ट्रपति ने कहा दुनिया में भारत की भूमिका लगातार अहम हो रही है। विश्व स्तर पर हमारा राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही हमारे जोखिम और चुनौतियों में भी इजाफा हो रहा है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अपने ज्ञान और कुशलताओं को लगातार समृद्ध करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने प्रशिक्षुओं को नसीहत दी कि वो अपने कामकाज में नई तकनीक के प्रयोग के साथ-साथ आम भारतीयों के हितों के प्रति संवेदनशीलता को भी बरकरार रखें।

इस अवसर पर उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल श्री अजीज कुरैशी, माननीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, कोर्स कोऑर्डीनेटर श्री सौरभ जैन और 89वें फाउंडेशन कोर्स के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।


विजयलक्ष्मी कासोटिया/एएम/एनए-3468