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Monday, November 14, 2022

अपने अंदर के बच्चे को जिन्दा रखने की प्रेरणा है बाल दिवस

जैन स्कूल में बाल दिवस धूम-धाम से मनाया गया 


लुधियाना: 14 नवंबर 2022: (कार्तिका सिंह//एजुकेशन स्क्रीन):: बाल दिवस नेहरू जी की याद के साथ ही हर बच्चे के मन में एक नयें उत्साह का उदय करता है। ऐसा उत्साह बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी अपने अंदर के बचपने को हमेशा ज़िंदा रखने के लिए प्रेरित करता है। जहाँ एक और ज़िन्दगी की भागदौड़ में 2 पल की फुर्सत के लिए भी वक़्त चुराना पड़ता है, वहां ऐसे दिन हमारे दिल के बच्चे को थोड़ी और शरारतें करने का आग्रह करते हैं।  

कुछ ऐसा ही उत्साह  जैन स्कूल की सुबह की असेंबली में भी देखने को मिला।  जहाँ +1 क्लास के बच्चों ने एक रंगारंग कार्यकर्म पेश किया।  बच्चों में जोश और उत्साह देखने लायक था।  बच्चों ने चाचा नेहरू के जीवन पर प्रकाश डालने के साथ-साथ उनके जीवन से सम्बंधित कविताएं, भजन, क्विज़, कहानियां, राजस्थानी एवं पंजाबी डांस इत्यादि पेश किया गया।  'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' पर आधारित नाटक सबके आकर्षण का केंद्र रहा।  

स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती मीना गुप्ता जी ने सभी बच्चों को बाल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए, उनके प्रस्तुतिकरण पर उनकी सराहना की।  मैनेजिंग कमेटी के प्रधान श्री नन्द कुमार जैन जी ने बच्चों को बाल दिवस का महत्व बताते हुए, पूरी लगन और मेहनत के साथ पढाई करने का संदेश दिया। 

इस अवसर पर स्कूल मैनेजिंग कमेटी के चेयरपर्सन श्री सुखदेव राज जैन, प्रधान श्री नन्द कुमार जैन, सीनियर  उपप्रधान श्री विपन कुमार जैन, उपप्रधान श्री शांति स्वरुप जैन एवं श्री बांके बिहारी लाल जैन, सचिव श्री राजीव जैन, सह-सचिव श्री राकेश कुमार जैन, मैनेजर श्री अरविन्द कुमार जैन, केशियर श्री अशोक जैन,  स्कूल के समस्त स्टाफ मेंबर्स तथा विधार्थी उपस्थित थे। 

Sunday, May 10, 2020

Mothers Day:मैं अंश हूँ उस रूह का

मां के लिए सिर्फ एक दिन ही क्यों?
सोनिया नागपाल 
मैं अंश हूँ उस रूह का 
जिसने तकलीफ में मुझे पाला था 
जब अंदर उसके सिमटा था 
उसका रोम रोम खिल उठता था 
मेरी नब्ज़ उससे जुड़ती थी 
तब वह अकेली बैठ कर हंसती थी। 
ये पंक्तियां हैं मेरे उस रिश्ते के लिए जो इस दुनिया में आने से पहले ही मेरे साथ जुड़ गया था।  कहते है कि  हर इंसान को हर रिश्ता जन्म लेने के बाद ही मिलता है परन्तु मां का रिश्ता दुनिया में आने से पहले ही  मिल जाता है।  का यह किसी चमत्कार से कम है?
आज Mother's Day है, मेरी मां और उन सभी माओं को प्रणाम जिन्होंने ने एक बीज को इंसान रूप दिया और इस दुनिया में लेकर खड़ा कर दिया।  कहते है कि मां के लिए सिर्फ एक दिन ही क्यों? मां तो एक हस्ती है, जिसके लिए लाखों दिन भी कम है।  मां के लिए हमारी ज़िन्दगी की हर एक सांस अर्पित है।  मां खुद जलती है परन्तु हमेशा अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करती है।  मां की कुर्बानियां इतिहास से लेकर अब तक चलती आ रही है।  मां अपने बच्चो के लिए जितना सहती है, उसे शब्दों में ब्यान करना कठिन है।  
वर्तमान काल की स्थिति जहां कोरोना वायरस ने चारो तरफ हाहाकार मचा रखा है, मां की कुर्बानियां यहां भी नज़र आ रही है। हाल ही में मैंने उन लोगो को देखा जो पलायन कर रहे है, जिसमे गर्भवती महिलाये भी शामिल है।  अपने पेट में सात माह के बच्चे को लेकर अपने गांव लौट रही हैं।  इससे बढ़ी उदाहरण क्या होगी मां की ममता की?
मां का देना हम दे नहीं सकते ,
मां को शब्दों में बयाँ हम कर नहीं सकते।  
                                           --*सोनिया नागपाल 
 --सोनिया नागपाल जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल लुधियाना के इंग्लिश विभाग में शिक्षिका हैं।  

Mothers Day: कुछ भी नहीं मां बिन यह दुनिया

मां ने ही हर राह दिखाया--पग पग मेरा साथ निभाया 
पार्थ गुप्ता अपनी मां मोनिका गुप्ता के साथ 
जब जब खुद को अकेला पाया 
दूर तक कोई नज़र न आया,
तब तूने मेरा हाथ थामकर
इस अकेलेपन को मिटाया। 

जब जब मैं इन राहों में,
भटक गया था मंज़िल में,
तब तूने उजाला बन कर 
मुझे खोये रस्ते पर लौटाया। 

जब कोई न मेरी खुशियों में 
शामिल होने आया था,
मां  तुम ही तो थी वो 
जिसने हर पल मेरा होंसला बढ़ाया। 

सब समझते थे मुझको 
जुगनू हूं मैं आवारा सा,
तुम्ही से तो मैंने मां
सितारे का दर्ज़ा पाया। 

झाँक लिया हर कोने में
हर लम्हे को देख लिया,
समझ गया कुछ भी नहीं
बिन तेरे ये दुनिया।

मेरे जीवन के हर लम्हे में,
तेरी मज़ूदगी बनी रहे,
जब भी मैं खुद को अकेला पाऊं 
माँ तू हाथ थामने खड़ी रहे।
                   -पार्थ गुप्ता 
पुत्र श्रीमती मोनिका गुप्ता 
शिक्षिका - इंग्लिश विभाग 
जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लुधियाना। 

मां का मुकाबला किसी के साथ हो ही नहीं सकता

 मां और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़ कर है 
लुधियाना: 10 मई 2020: (*वीणा शर्मा)::
किसी ने रोज़ा रखा, किसी ने व्रत रखा,
क़बूल उसका हुआ, जिसने मां बाप को करीब रखा।  
लेखिका वीना शर्मा 
मां शब्द का मुकाबला किसी के साथ नहीं किया जा सकता। मां शब्द पूरी सृष्टि के साथ जुड़ा हुआ है। अगर हम अपने आस पास झांक कर देखें तो हमे पता लगता है, धरती मां की विशालता के बारे में। किस तरह धरती मां ने हमे संभाल कर रखा हुआ है,  ये सचमुच एक वरदान ही है।  मां के ममतामयी आंचल को देखना हो तो गंगा माता की उदहारण ली जा सकती है।  लाखों करोड़ो लोग इस पवित्र गंगा में स्नान करके खुद को सभी तरह के पापों से मुक्त समझते हैं। मां की उदारता को देखने के लिए गऊ माता की पूजनीयता को देख सकते है।  जन्म दात्री मां किस तरह एक कलाकार की तरह अपने बच्चे को विद्या और अच्छे संस्कारो से संवारती और सजाती है।  वो अपने बच्चे को कदम से कदम मिला कर समाज में आगे बढ़ने, उसका विवाह होने और उसकी संतान की कामयाबी के लिए भी चिंतित रहती है।  मां हमेशा अपने बच्चों का इंतज़ार करती है लेकिन उसके बच्चे कभी उसे समय ही नहीं दे पाते।  आज के बच्चे अपने मां बाप को वृद्ध आश्रम में भेजना चाहते हैं।  हमे ये समझना चाहिए कि जन्म दात्री मां और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़ कर है जिसकी रक्षा के लिए हमे हर दम तैयार रहना चाहिए। 
जैसे स्वर्गो को जाने के कोई दूसरा रास्ता नहीं होता,
लाखो रिश्तों में भी मां जैसा कोई नाम नहीं होता।   
किसी बच्चे की सफलता पीछे उसकी मां की ही तस्वीर होती है,
 मां की दुआओं से  वाले कल की तक़दीर बनती है। 
दुनिया के सभी रिश्ते मुंह मोड़ लेते है, लेकिन माँ का रिश्ता स्वार्थ रहित, उदारता सहित, ममतामयी और विशालता भरपूर है कि वो ज़िन्दगी के हर मोड़ पर हमारा साथ निभाती है। --*वीना शर्मा
 *वीना शर्मा जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लुधियाना के पंजाबी विभाग में शिक्षिका हैं। 

मां का ऋण तो कोई उतार ही नहीं सकता

 आज की पीढ़ी को भी मां के प्रति अपने कर्तव्य याद रखने चाहिएं 
लुधियाना: 10 मई 2020: (*आरती सिंगला)::
लेखिका आरती सिंगला 
एक औरत के कई रूप होते हैं जैसे के मां, बहन, पत्नी और  प्रेमिका। औरत हर रूप में त्याग की मूरत मानी जाती है  वह अपनी सारी ज़िंदगी त्याग करती हुई गुज़ार देती है, पर जब वह मां बन जाती है तो अपने आप को भूल जाती है। औरत सिर्फ  बच्चे के जन्म के बाद ही नहीं बल्कि  उसके जन्म से पहले भी बहुत कष्ट सहन करती है। उसकी ज़िंदगी का एक ही उद्देश्य रह जाता है कि वह अपने बच्चे की अच्छी तरह से परवरिश करें, उसको अच्छे संस्कार दें और उसको एक सफल और एक अच्छा नागरिक बनाएं। इसीलिए मां को ही बच्चे की पहली अध्यापका होने का दर्जा दिया जाता है पर आज हमारे समाज में मां सिर्फ अपने घर के काम तक सीमित ना रहकर अपनी बाहर की ज़िम्मेदारियों को भी उतनी अच्छी तरह से निभाती है जैसे एक मां अपने बच्चे के प्रति सारी ज़िंदगी सब कुछ करती है लेकिन इस सबके बदले में मां अपने लिए कुछ भी नहीं मांगती।  वह हमेशा यही चाहती है कि उसका बच्चा जहां भी रहे खुश व सुखी रहे। आज जरूरत है बच्चों में मां के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने की भावना पैदा करने की। हमारे समाज में आज की पीढ़ी स्वार्थी बनती जा रही है। बच्चों को चाहिए कि वह अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर अपनी मां के प्रति भी अपने फर्ज पूरे करें।  एक  मां का ऋण तो कोई नहीं उतार सकता पर इतना तो बनता ही है की वह अपने कर्तव्यों को सही ढंग से पूर्ण करके अपनी मां को सुख  पहुंचाए।--*आरती सिंगला
*आरती सिंगला  जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल ,लुधियाना के कॉमर्स विभाग शिक्षिका