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Thursday, February 11, 2021

GCG की छात्रा परिषद का 2019-20 का स्तर समाप्त

Thursday: 11th February 2021: 6:55 PM: WhatsApp

 बढ़िया कारगुज़ारी दिखाने वाली छात्राओं को किया गया सम्मानित 


लुधियाना
: 11 ਫਰਵਰੀ 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

लुधियाना में स्थित लड़कियों के राजकीय कालेज में एक बार फिर अलग अलग कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो।  गौरतलब है कोरोना काल में कोविड-19 के चलते इस तरह के सभी आयोजन बंद हो गए थे। कोरोना की  स्थिति कुछ नियंत्रण में आने के बाद इन आयोजनों का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है। कालेज की छात्रा परिषद का 2020-21 का स्तर समाप्त होने को आया तो इसे यादगारी बनाने के लिए एक  सादा सा कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

कालेज के जन प्रशासन की छात्रा कौंसिल में सक्रिय छात्राओं को सम्मनित भी किया गया। इस अवसर पर कालेज की प्रिंसिपल डाक्टर सुखविंदर कौर, जन प्रशासन विभाग की प्रमुख प्रोफेसर बलजीत कौर और प्रोफेसर शर्मा भी मौजूद रहे। परिषद की सदस्य छात्राएं मुस्कान जैन, तानिया, सुप्रीत आनंद, अलीशा छाबड़ा और अश्मीत कौर को उनकी सेवाओं के लिए ट्राफियां और प्रमाणपत्र दे कर सम्मानित किया गया। 

इस सफल कार्यक्रम के अवसर पर कालेज की प्रिंसिपल डाक्टर सुखविंदर  कौर ने छात्राओं को हार्दिक बधाई दी और कहा कि छात्राओं को ऐसे कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर भाग लेते रहना चाहिए। इसी से उनकी शख्सियत में हर तरह से विकास होगा। प्रोफेसर बलजीत कौर और प्रोफेसर दिनेश शारदा ने भी छात्राओं की हौंसला अफ़ज़ाई की।

Friday, February 5, 2021

शिक्षित व्यक्ति ही देश के उत्थान में दे सकता है अपना योगदान

CJM प्रीति सुखीजा ने की हैल्पिंग हैंडज़ क्लब की हौंसला अफ़ज़ाई 


लुधियाना
: 5 फरवरी 2021: (कार्तिका सिंह//एजुकेशन स्क्रीन):

विकास के दावे तो अक्सर बहुत से किए जाते हैं लेकिन समाज की वास्तविक स्थितियां परस्थितियां उन दावों के अक्सर बिलकुल विपरीत होती हैं। आज भी समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभावों भरी ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर नज़र  आता है। ज़िंदगी के हर कदम पर एक जंग लड़ता हुआ यह वर्ग ही हमारी धरती और देश का वह हिस्सा है जिसे हमारे सहयोग की सर्वाधक आवश्यकता है। इस हकीकत के बावजुद ज़िंदगी  की असली जंग लड़ते हुए इन योद्धाओं को हम हर बार भूल जाते हैं। हमें धर्मस्थल भी याद रहते हैं और राजनीतिक मंच भी लेकिन दुःख, दर्द और गमों की आंधियों में भी मुस्कराते हुए इन बहादुर लोगों को हम अक्सर भूल जाते हैं। इस बार फिर हमें इन की याद दिलाई है हैल्पिंग हैन्डज़ क्लब  की सक्रिय टीम ने। गौरतलब है कि यह टीम कई बरसों से रमन गोयल और उनके साथियों की अगवानी में सरगर्म है। कभी फीस  माफ़ी, कभी बुक क्लब, कभी वर्दियां, कभी बूट,  लिए वस्त्र और कभी ज़रूरत की अन्य चीज़ें ज़रूरतमंद छात्रों तक पहुंचाना इस टीम का मुख्य मकसद रहता है। यह टीम कभी गुरुनानक भवन में नज़र आती, कभी पंजाबी भवन में, कभी स्कूलों और कालेजों में, कभी पीएयू के किसान मेलों में और कभी किसी अन्य स्थान पर। 

इस बार का आयोजन हुआ संगळा शिवाला चौंक में जहांइस संगठन का कार्यालय है। समाजसेवी संस्था हेल्पिंग हैंडस क्लब के संगला शिवाला  चौक स्थित श्री शिक्षा केंद्र में विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट वितरित करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया , कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में पहुंचे सीजेएम व सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी श्रीमती प्रीति सुखीजा जी का स्वागत संस्था के सदस्यों द्वारा पुष्पगुच्छ देकर किया गया। संस्था के संस्थापक प्रधान रमन गोयल, शशि भूषण गोयल ,सीनियर उप प्रधान सुभाष सूद  मुख्य सचिव एडवोकेट पवन शर्मा , कोषाध्यक्ष राकेश गुप्ता व महिला शाखा की प्रधान इंदु खुराना , उपप्रधान ललिता लाम्बा ने मुख्य अतिथि के साथ ज्योति प्रज्वल्लन कर कार्यक्रम का आगाज किया। कार्यकम में सीजेएम प्रीति सुखीजा ने सदस्यों को जिला कानूनी सेवाएं व फ्री लीगल एड के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि सभी को इंसाफ मिलना चाहिए और उसके लिए जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी की तरफ से मुफ्त वकील मिलने तक की सुविधाएं उपलब्ध है उसके पश्चात उन्होंने संस्था के विद्यार्थियों को कोर्स कंप्लीट होने पर बधाई देते हुए सर्टिफिकेट वितरित किए व उनके मंगल भविष्य की कामना की। सीजीएम प्रीति सुखीजा ने संस्था के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्था द्वारा दी जा रही सेवाएं अत्यंत सराहनीय है और हम हमेशा संस्था के साथ हैं। इस अवसर पर राकेश सिंगला, अवनीश मित्तल, दीपक जैन, जगदीप सिंह मोगैंबो, डॉ वीरेंद्र कुमार , संजय गुप्ता, ज्योति गुप्ता, इमेज गर्ग बृजेश उप्पल, बॉबी शर्मा, प्रवेश मक्कड़, प्रेम कुमार, विजय कपूर, सुगंधी गोयल, रजनी सिंगला, वर्षा शर्मा, राजवंत कौर, आरती सोनी और श्रुति खरबंदा आदि व कई छात्र उपस्थित थे।

आप अगर अभी तक इस संगठन के सम्पर्क में नहीं आये तो देर मत कीजिये। आपके सहयोग से इस संगठन की टीम को और बल  मिलेगा।   

Wednesday, December 23, 2020

SCD: याचना शर्मा ने 85.87% के साथ पहला स्थान पाया

 एस. सी. डी. कॉलेज के छात्रों के नाम स्वर्ण और रजत पदक 

लुधियाना: 23 दिसंबर 2020: (कार्तिका सिंह// एजुकेशन स्क्रीन )::
स्नातकोत्तर हिंदी विभाग एवं शोध-केन्द्र,
सतीश चंद्र धवन राजकीय महाविद्यालय के एम.ए हिंदी चौथे समैस्टर के विद्यार्थियों ने पंजाब विश्वविद्यालय की मेधा सूची में अपना स्थान बनाते हुए कॉलेज का नाम चमकाया किया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी टाॅपर लिस्ट में कॉलेज की मेधावी छात्रा याचना शर्मा ने 85.87 प्रतिशत अंक प्रात करते हुए यूनिवर्सिटी मे पहला स्थान पाया और अपने लिए स्वर्ण पदक पक्का किया। 
रिंकू कुमारी 
इसी तरह
रिंकू कुमारी (84.18%) ने दूसरा स्थान हासिल करते हुए रजत पदक की दावेदारी पक्की की।  रजत सेठी (82.31%) ने सातवां स्थान हासिल किया। हिंदी विभाग के इस परिणाम से समूचे कॉलेज में खुशी की लहर देखने को मिली। प्रिंसिपल डॉ. धर्म सिंह संधू ने इस शानदार परिणाम हेतु हिंदी विभाग को बधाई दी और कहा कि हिन्दी विभाग के विद्यार्थी हर सेमेस्टर में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय में अपना स्थान बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इन विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के100 वर्ष के ऐतिहासिक यात्रा में सफलता का एक पन्ना और जोड़ दिया है। विद्यार्थियों ने इस सेमेस्टर में भी केवल हिंदी विभाग का ही नहीं अपितु संपूर्ण कॉलेज का नाम रोशन किया है।  विभागाध्यक्ष  प्रो.(डां.)अश्वनी भल्ला ने विद्यार्थियों की सफलता का सारा श्रेय उनकी मेहनत और साधना को दिया।  डॉ. मुकेश अरोड़ा (सीनेट सदस्य, पंजाब विश्वविद्यालय, चंड़ीगढ़) ने विशेष तौर पर शिरकत करते हुए विद्यार्थियों को बधाई दी तथा कहा कि विद्यार्थियों की लगन और अध्ययनशीलता के परिणाम स्वरूप ही ऐसे परिणाम सामने आते हैं। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि विभाग के विद्यार्थियों ने इस परिणाम के माध्यम से सिद्ध कर दिया कि चाहे कोरोना का आतंक अभी भी छाया है परंतु मानसिक रूप से  विद्यार्थी इससे उबरने लगे हैं। डॉ. सौरभ कुमार ने कहा कोरोना काल मे भी  विभाग के विद्यार्थियों ने टॉपर बनने की अपनी परंपरा को कायम करने में सफलता पाई है, जो आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। इस अवसर पर  टॉपर याचना शर्मा, रिंकू  और रजत सेठी तीनों का कहना है कि "हम भी साहित्य की लहर को आगे बढ़ाते हुए भाषा-साहित्य का प्रोफेसर बनकर आपने अध्यापकों का नाम रोशन करना चाहते है।" विद्यार्थियों ने कहा कि महाविद्यालय और विशेषकर हिन्दी विभाग में  विद्यार्थियों को मिलने वाला सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उनके लिए हमेशा लाभदायक रहा।  विभाग के अन्य प्रध्यापक डॉ. मोनिका जैन, डॉ. सौरभ कुमार, प्रो. सोनदीप, प्रो. इंद्रजीत पासवान ने भी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों पर विभाग को गर्व है। 

Sunday, May 10, 2020

Mothers Day:मैं अंश हूँ उस रूह का

मां के लिए सिर्फ एक दिन ही क्यों?
सोनिया नागपाल 
मैं अंश हूँ उस रूह का 
जिसने तकलीफ में मुझे पाला था 
जब अंदर उसके सिमटा था 
उसका रोम रोम खिल उठता था 
मेरी नब्ज़ उससे जुड़ती थी 
तब वह अकेली बैठ कर हंसती थी। 
ये पंक्तियां हैं मेरे उस रिश्ते के लिए जो इस दुनिया में आने से पहले ही मेरे साथ जुड़ गया था।  कहते है कि  हर इंसान को हर रिश्ता जन्म लेने के बाद ही मिलता है परन्तु मां का रिश्ता दुनिया में आने से पहले ही  मिल जाता है।  का यह किसी चमत्कार से कम है?
आज Mother's Day है, मेरी मां और उन सभी माओं को प्रणाम जिन्होंने ने एक बीज को इंसान रूप दिया और इस दुनिया में लेकर खड़ा कर दिया।  कहते है कि मां के लिए सिर्फ एक दिन ही क्यों? मां तो एक हस्ती है, जिसके लिए लाखों दिन भी कम है।  मां के लिए हमारी ज़िन्दगी की हर एक सांस अर्पित है।  मां खुद जलती है परन्तु हमेशा अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करती है।  मां की कुर्बानियां इतिहास से लेकर अब तक चलती आ रही है।  मां अपने बच्चो के लिए जितना सहती है, उसे शब्दों में ब्यान करना कठिन है।  
वर्तमान काल की स्थिति जहां कोरोना वायरस ने चारो तरफ हाहाकार मचा रखा है, मां की कुर्बानियां यहां भी नज़र आ रही है। हाल ही में मैंने उन लोगो को देखा जो पलायन कर रहे है, जिसमे गर्भवती महिलाये भी शामिल है।  अपने पेट में सात माह के बच्चे को लेकर अपने गांव लौट रही हैं।  इससे बढ़ी उदाहरण क्या होगी मां की ममता की?
मां का देना हम दे नहीं सकते ,
मां को शब्दों में बयाँ हम कर नहीं सकते।  
                                           --*सोनिया नागपाल 
 --सोनिया नागपाल जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल लुधियाना के इंग्लिश विभाग में शिक्षिका हैं।  

Mothers Day: कुछ भी नहीं मां बिन यह दुनिया

मां ने ही हर राह दिखाया--पग पग मेरा साथ निभाया 
पार्थ गुप्ता अपनी मां मोनिका गुप्ता के साथ 
जब जब खुद को अकेला पाया 
दूर तक कोई नज़र न आया,
तब तूने मेरा हाथ थामकर
इस अकेलेपन को मिटाया। 

जब जब मैं इन राहों में,
भटक गया था मंज़िल में,
तब तूने उजाला बन कर 
मुझे खोये रस्ते पर लौटाया। 

जब कोई न मेरी खुशियों में 
शामिल होने आया था,
मां  तुम ही तो थी वो 
जिसने हर पल मेरा होंसला बढ़ाया। 

सब समझते थे मुझको 
जुगनू हूं मैं आवारा सा,
तुम्ही से तो मैंने मां
सितारे का दर्ज़ा पाया। 

झाँक लिया हर कोने में
हर लम्हे को देख लिया,
समझ गया कुछ भी नहीं
बिन तेरे ये दुनिया।

मेरे जीवन के हर लम्हे में,
तेरी मज़ूदगी बनी रहे,
जब भी मैं खुद को अकेला पाऊं 
माँ तू हाथ थामने खड़ी रहे।
                   -पार्थ गुप्ता 
पुत्र श्रीमती मोनिका गुप्ता 
शिक्षिका - इंग्लिश विभाग 
जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लुधियाना। 

मां का मुकाबला किसी के साथ हो ही नहीं सकता

 मां और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़ कर है 
लुधियाना: 10 मई 2020: (*वीणा शर्मा)::
किसी ने रोज़ा रखा, किसी ने व्रत रखा,
क़बूल उसका हुआ, जिसने मां बाप को करीब रखा।  
लेखिका वीना शर्मा 
मां शब्द का मुकाबला किसी के साथ नहीं किया जा सकता। मां शब्द पूरी सृष्टि के साथ जुड़ा हुआ है। अगर हम अपने आस पास झांक कर देखें तो हमे पता लगता है, धरती मां की विशालता के बारे में। किस तरह धरती मां ने हमे संभाल कर रखा हुआ है,  ये सचमुच एक वरदान ही है।  मां के ममतामयी आंचल को देखना हो तो गंगा माता की उदहारण ली जा सकती है।  लाखों करोड़ो लोग इस पवित्र गंगा में स्नान करके खुद को सभी तरह के पापों से मुक्त समझते हैं। मां की उदारता को देखने के लिए गऊ माता की पूजनीयता को देख सकते है।  जन्म दात्री मां किस तरह एक कलाकार की तरह अपने बच्चे को विद्या और अच्छे संस्कारो से संवारती और सजाती है।  वो अपने बच्चे को कदम से कदम मिला कर समाज में आगे बढ़ने, उसका विवाह होने और उसकी संतान की कामयाबी के लिए भी चिंतित रहती है।  मां हमेशा अपने बच्चों का इंतज़ार करती है लेकिन उसके बच्चे कभी उसे समय ही नहीं दे पाते।  आज के बच्चे अपने मां बाप को वृद्ध आश्रम में भेजना चाहते हैं।  हमे ये समझना चाहिए कि जन्म दात्री मां और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़ कर है जिसकी रक्षा के लिए हमे हर दम तैयार रहना चाहिए। 
जैसे स्वर्गो को जाने के कोई दूसरा रास्ता नहीं होता,
लाखो रिश्तों में भी मां जैसा कोई नाम नहीं होता।   
किसी बच्चे की सफलता पीछे उसकी मां की ही तस्वीर होती है,
 मां की दुआओं से  वाले कल की तक़दीर बनती है। 
दुनिया के सभी रिश्ते मुंह मोड़ लेते है, लेकिन माँ का रिश्ता स्वार्थ रहित, उदारता सहित, ममतामयी और विशालता भरपूर है कि वो ज़िन्दगी के हर मोड़ पर हमारा साथ निभाती है। --*वीना शर्मा
 *वीना शर्मा जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लुधियाना के पंजाबी विभाग में शिक्षिका हैं। 

मां का ऋण तो कोई उतार ही नहीं सकता

 आज की पीढ़ी को भी मां के प्रति अपने कर्तव्य याद रखने चाहिएं 
लुधियाना: 10 मई 2020: (*आरती सिंगला)::
लेखिका आरती सिंगला 
एक औरत के कई रूप होते हैं जैसे के मां, बहन, पत्नी और  प्रेमिका। औरत हर रूप में त्याग की मूरत मानी जाती है  वह अपनी सारी ज़िंदगी त्याग करती हुई गुज़ार देती है, पर जब वह मां बन जाती है तो अपने आप को भूल जाती है। औरत सिर्फ  बच्चे के जन्म के बाद ही नहीं बल्कि  उसके जन्म से पहले भी बहुत कष्ट सहन करती है। उसकी ज़िंदगी का एक ही उद्देश्य रह जाता है कि वह अपने बच्चे की अच्छी तरह से परवरिश करें, उसको अच्छे संस्कार दें और उसको एक सफल और एक अच्छा नागरिक बनाएं। इसीलिए मां को ही बच्चे की पहली अध्यापका होने का दर्जा दिया जाता है पर आज हमारे समाज में मां सिर्फ अपने घर के काम तक सीमित ना रहकर अपनी बाहर की ज़िम्मेदारियों को भी उतनी अच्छी तरह से निभाती है जैसे एक मां अपने बच्चे के प्रति सारी ज़िंदगी सब कुछ करती है लेकिन इस सबके बदले में मां अपने लिए कुछ भी नहीं मांगती।  वह हमेशा यही चाहती है कि उसका बच्चा जहां भी रहे खुश व सुखी रहे। आज जरूरत है बच्चों में मां के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने की भावना पैदा करने की। हमारे समाज में आज की पीढ़ी स्वार्थी बनती जा रही है। बच्चों को चाहिए कि वह अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर अपनी मां के प्रति भी अपने फर्ज पूरे करें।  एक  मां का ऋण तो कोई नहीं उतार सकता पर इतना तो बनता ही है की वह अपने कर्तव्यों को सही ढंग से पूर्ण करके अपनी मां को सुख  पहुंचाए।--*आरती सिंगला
*आरती सिंगला  जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल ,लुधियाना के कॉमर्स विभाग शिक्षिका

Monday, May 4, 2020

इस तरह कम हो सकता है कोरोना फैलने का खतरा...

 Monday: 4th May 2020 at 12:10 PM  
 डीडी जैन कालेज के हितेश आहूजा ने दिया विशेष आईडिया  
लुधियाना: 4 मई 2020: (एजुकेशन स्क्रीन ब्यूरो):: 
हितेश आहूजा 
पंजाब में भी कोरोना का फैलाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आज की अखबारी खबरों के मुताबिक  कोरोना को लेकर पंजाब टॉप-10 में शामिल हो गा है। पंजाब की ऐसी भयानक तरक्की तो हमने कभी न सोची थी। पंजाब तो खाने-पीने, हंसने-खेलने और देश व दुनिया के लिए कुर्बानियां करने वालों में सबसे आगे रहा। उम्मीद है अब कोरोना के साथ लदी जा रही जंग में भी पंजाब आगे ही रहेगा लेकिन मौजूदा तस्वीर चिंतित करने वाली है। कोरोना के फैलाव में कमी नहीं आ रही। संक्रमण के आंकड़े अब डराने लगे हैं। 
कोरोना को ले कर समाज के सभी वर्ग चिंतित हैं। कोरोना कब तक रहेगा? कब जायेगा? इसके दूरगामी प्रभाव क्या होंगें? इन सवालों पर सभी जागरूक लोग विचार कर रहे हैं। समाज के सभी जागरूक लोग विचार कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े *श्री हितेश आहूजा ने कहा है की उनके पास इस समस्या को कर एक विशेष विचार है। यदि इस सलाह को सरकार मान ले तो इस समस्या को नियंत्रित करने में आसानी होगी। 
श्री आहूजा ने अपने इस विचार की चर्चा करते हुए कहा है कि पंजाब सरकार को और देश की सभी सरकारों को चाहिए कि अगर कोई प्रवासी मजदूर अपनी स्टेट में जाना चाहे तो उसे पहले कम से कम 10 से 15 दिन तक अपनी निगरानी में कुआरनटाईन रखा अर्थात पूरी तरह एकांतवास में रखा जाये। इस निगरानी से यह साबित  हो जाएगा कि उस व्यक्ति को करोना इन्फेक्शन है या नहीं अगर कोई भी व्यक्ति को करोना इन्फेक्शन से संक्रमित निकलता है या उसके लक्षण आते हैं उस व्यक्ति को किसी सबंधितअस्पताल में पहुंचाया जाये। उसका इलाज करवाया जाए। इस तरह दो सप्ताह तक निगरानी के बाद फिर टेस्टिंग हो। ऐसे व्यक्ति जिन पर कोई लक्षण नहीं दिखाई देते उन व्यक्तियों को आसानी से उनके राज्य में वापिस भेजा जा सकता है। इससे करोना इन्फेक्शन के फैलने की संभावना बहुत ही कम हो सकती है। साथ ही हमारे दूसरे राज्यों में भी कोरोना की इंफेक्शन को भेजने से बचाव किया जा सकता है।  अगर इस बात से आप सहमत हैं तो इसको आप ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें और कोशिश करें की यह बात सरकार तक जल्द से जल्द पहुंच जाए। इस तरह के रास्तों पर चल कर  इस महामारी से लड़ने में मदद मिल सकेगी। -*हितेश आहूजा 
*श्री हितेश आहूजा देवकी देवी जैन मैमोरियल कालेज फॉर वुमन में कार्यरत हैं समाज के विकास से जुड़े विषयों पर गहरी रुचि रखते हैं। 


Friday, May 1, 2020

कोरोना काल में उच्च शिक्षा: चुनौतियां एवं संभावनाएं

Friday: 1st May 2020 at 05:04 PM Whats app
हिन्दी विभाग एवं शोध-केन्द्र द्वारा वेबिनार का आयोजन
लुधियाना: 1 मई 2020: (कार्तिका सिंह//एजुकेशन स्क्रीन)::
कोरोना एस. सी. डी. सरकारी कॉलेज के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग एवं शोध-केन्द्र द्वारा वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार का विषय *"कोरोना काल में उच्च शिक्षा: चुनौतियां एवं संभावनाएं"* रही। उक्त विषय पर बीज व्याख्यान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. धर्म सिंह संधू द्वारा दिया गया तथा विषय-विशेषज्ञ व मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर (डॉ.) अश्वनी भल्ला में शिरकत की। प्राचार्य डॉ. संधू के निर्देशन में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. सौरभ कुमार द्वारा ज़ूम मीट एप्लिकेशन के माध्यम से ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमें महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक सक्रियता दिखाई। डॉ. संधू ने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि शोध-केंद्र द्वारा महाविद्यालय में पहली बार *'वेबिनार'* का आयोजन किया गया है, जो उच्च शिक्षा का भविष्य है।
कोरोना संकट के समय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्पन्न हालात की भूमिका रखते हुए प्राचार्य डॉ. संधू ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि संकट की इस घड़ी में शिक्षक-विद्यार्थियों के मध्य संवाद की कड़ी टूटती नज़र आ रही है क्योंकि आज भी सभी प्रकार के विद्यार्थी सूचना-प्रौद्योगिकी से जुड़ नहीं पा रहे हैं। शहरी विद्यार्थियों में इस प्रकार की समस्या कम देखने को मिल सकती है परंतु सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए यह एक गंभीर चुनौती है। आज हमें "डिजिटल लर्निंग प्रोसेस" को स्वीकार करना ही पड़ेगा और इसके लिए जहां शिक्षकों को पहले से अधिक जागरूक रहना पड़ेगा वहीं अधिक संवेदनशीलता से अपने विद्यार्थियों के साथ पुनः संवाद स्थापित करनी होगी। आजकल ई-लर्निंग के जितने भी स्रोत हैं, उनसे जुड़ते हुए अपने शिक्षण के तरीकों में भी बदलाव लाने होंगे। 
प्रोफेसर अश्वनी भल्ला ने उक्त विषय पर विस्तारपूर्वक विमर्श करते हुए कहा कि आज हमारे सामने सबसे बड़ी चिंता विद्यार्थियों के भविष्य की है, आज सर्वत्र यह चर्चा हो रही है कि पाठ्यक्रम कैसे पूरा किया जाए, परीक्षा किस प्रकार से हो आदि आदि।  परंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सबसे पहले शिक्षक-विद्यार्थी की शारीरिक-मानसिक सुरक्षा बनाए रखना बहुत बड़ी चुनौती है। इसी लिए आज विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा वर्चुअल क्लास की व्यवस्था तैयार की जा रही है ताकि  व्हाइवा, प्रेक्टिकल, असाइनमेंट आदि सभी प्रकार की शैक्षिक गतिविधियों को ऑनलाइन पूरा किया जा सके। इसी प्रकार मूल्यांकन व्यवस्था भी संभव दिखाई दे रही है जहां शिक्षक ऑनलाइन गतिविधियों द्वारा विद्यार्थियों के कार्यों का मूल्यांकन करते हुए उन्हें अंक दे सकते हैं।   इसके लिए हमें तकनीकी तौर पर जागरूक भी होगा होगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा इस संबंध में कई प्रकार के प्रयास किये जा रहे हैं जिनमें ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था का में हम पहले से अधिक समर्थ हो पाए हैं। आयोग द्वारा कई प्रकार के ऑनलाइन वेबसाइटों की सूची भी दी गयी है जिसे बड़े पैमाने पर आज उपयोग में लाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि निजी तौर पर यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से भी हम अपने विद्यार्थियों से संवाद कर सकते हैं। यद्यपि बहुत सारे ज्ञान के स्रोत यू-ट्यूब पर उपलब्ध हैं परंतु विद्यार्थी आज भी अपने शिक्षक का लेक्चर सुनना ही अधिक पसंद करते हैं। इसके साथ साथ महाविद्यालय के कई प्राध्यापकों ने भी अपने सुझाव व्यक्त किये।
डॉ. तनवीर सचदेव(विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग) ने सुझाव दिया कि हमें आज अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ने की आवश्यकता है ताकि सभी प्रकार के विद्यार्थियों को हम साथ लेकर आगे बढ़ सकें। प्रो. दीपक चोपड़ा का कहना था प्रेक्टिकल क्लास जो लैब में होना था, विद्यार्थी उससे वंचित हो रहे हैं, जो विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अति आवश्यक है।
इस वेबिनार में एक बात निकल कर सामने आई कि ऑनलाइन शिक्षण में विद्यार्थियों की भागीदारी कम है। डॉ. डी. एस. सिद्धू ने बताया कि आज सरकारी में बहुसंख्यक ऐसे विद्यार्थी हैं जो छात्रवृत्ति से पढ़ाई कर रहे हैं, उनके अभिभावक दिहाड़ीदार मजदूर हैं जिनकी रोजी-रोटी प्रतिदिन काम करने के बाद ही चलती है। ऐसे परिवार के विद्यार्थी को दो वक्त का खाना मुश्किल से मिला पा रहा है, वे किस प्रकार ऑनलाइन पढ़ पाएंगे? अतः हम शिक्षकों को विद्यार्थियों की परेशानी को भी समझना होगा। प्रो. रीतिन्दर जोशी द्वारा आगामी परीक्षा के सम्बन्ध में दिया गया  सुझाव का स्वागत अधिकांश प्राध्यापकों द्वारा किया गया, उन्होंने कहा कि सभी महाविद्यालय द्वारा मिड-सेमेस्टर टेस्ट का आयोजन किया गया था, उस परीक्षा के अंक का प्रतिशत ही आगामी परीक्षा का मान लिया जाना चाहिए जिससे शिक्षक-विद्यार्थी की सुरक्षा भी बनी रहेगी और विद्यार्थियों का भविष्य भी संकट में नहीं रहेगा। इसी प्रकार महाविद्यालय के 60 से अधिक प्राध्यापकों ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी करते हुए सुझाव दिए। महाविद्यालय के ऐसे प्राध्यापक जो 'कोरोना योद्धा' की भूमिका में अपनी ड्यूटी दे रहे हैं, उन्हें सभी प्राध्यापकों द्वारा तालियां बजाकर उन्हें सलामी दी गयी व उनकी सफलता-सुरक्षा की कामना की। प्राचार्य डॉ. संधू, प्रो. भल्ला तथा अन्य प्राध्यापकों ने  इस वेबिनार के लिए हिन्दी विभाग को बधाई दी। कुल तीन सत्रों में यह वेबिनार का आयोजन किया गया।

Friday, January 10, 2020

एस सी डी कालेज: हिन्दी विभाग ने मनाया 'विश्व हिन्दी दिवस'

Friday:10th January 2020 at 17:09 Whats App
कभी भी किसी भाषा को एक-दूसरे पर नहीं थोपना चाहिए-मुकेश अरोड़ा 
लुधियाना: 10 जनवरी 2020: (कार्तिका सिंह//एजुकेशन स्क्रीन)::    
 सतीश चन्द्र धवन राजकीय महाविद्यालय लुधियाना के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग एवं शोध-केन्द्र द्वारा 'विश्व हिन्दी दिवस' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. धर्म सिंह संधू एवं मुख्य-वक्ता डॉ. मुकेश कुमार अरोड़ा(सीनेटर, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़) रहे। विभाग के विद्यार्थियों द्वारा अतिथियों को पुष्पगुच्छ दे कर स्वागत किया गया तथा हिन्दी विषय से संबंधित प्रस्तुति दी गयी। उल्लेखनीय है कि 10 जनवरी को विश्व-भर में 'विश्व हिन्दी दिवस' मनाया जाता है। मुख्य वक्ता डॉ. मुकेश अरोड़ा जी ने अपने संबोधन में कहा कि हमें कभी भी किसी भाषा को एक-दूसरे पर नहीं थोपना चाहिए बल्कि जो भाषा हमारे हृदय के निकट है उसे गर्व से अपनाना चाहिए। स्वयं से प्रेरित होकर जब हम किसी भाषा को अपनाते हैं तब स्वतः ही उस भाषा का प्रसार होता है। इसी रूप में हिन्दी विश्व की एक मात्र ऐसी भाषा है जो स्वतः ही प्रसारित हो रही है और आज  विश्व के कोने-कोने में इसकी खुशबू महसूस की जा सकती है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि भाषा के विकास में मूल्यवान साहित्य का होना आवश्यक है। मुख्य अतिथि डॉ. संधू जी ने विभाग के विद्यार्थियों को बधाई देते हुए, विभाग के प्राध्यापकों  का हौसला बढ़ाया कि इस विभाग के प्राध्यापक हमेशा ही इस प्रकार के कार्यक्रम करते रहते हैं जिससे इनका अपने विषय का व्यापक ज्ञान हो सके। उन्होंने कहा कि आज हिन्दी न सिर्फ एक भाषा है बल्कि यह करोड़ों लोगों को रोज़गार देती है। बाज़ारवाद के इस युग में जिस भाषा में यह गुण होगी, उसी का अस्तित्व बना रहेगा, हिन्दी ऐसी ही भाषा है। विभागाध्यक्ष प्रो. अश्वनी भल्ला ने हिन्दी के महत्त्व को रेखांकित करते हुए अपनी लिखी एक कविता सुनाई। इस अवसर पर एम. ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा याचना शर्मा ने स्वरचित कविता प्रस्तुत की। एम.ए. प्रथम वर्ष के छात्र अंकित दुबे ने गीत, सुमित गुप्ता ने कविता की प्रस्तुति दी तथा मंच संचालन सदाशिव मिश्र ने की। इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. मोनिका जैन, डॉ. सौरभ कुमार, प्रो. सोनदीप, प्रो. इंदरजीत पासवान के साथ साथ अन्य विभागों के प्राध्यापक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में विभाग द्वारा महाविद्यालय में मिष्ठान बांट कर हिन्दी की वैश्विक उपलब्धि पर खुशियाँ मनाई गई।